छोटी कंपनियों का राहत देने की तैयारी में सरकार, मिल सकता है 1 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज

छोटी कंपनियों का राहत देने की तैयारी में सरकार, मिल सकता है 1 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज
कंपनी में कर्मचारियों के आधार पर मदद पर विचार

लॉकडाउन से परेशान छोटी कंपनियों को राहत देने और इकोनॉमी में जान फूंकने के लिए सरकार एक और पैकेज की घोषणा कर सकती है. यह राहत पैकेज 90,000 करोड़ रुपए से 1 लाख करोड़ रुपए का हो सकता है.

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नई दिल्ली. लॉकडाउन (Lockdown) और कम डिमांड से परेशान MSMEs सेंगमेंट की कंपनियों की मदद के लिए सरकार एक और राहत पैकेज का ऐलान कर सकती है. इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है. दरअसल, MSMEs सेगमेंट का योगदान अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा है. देश में सबसे ज्यादा यह सेगमेंट सबसे ज्यादा पैदा कर रहा है. लिहाजा इनके लिए विशेष राहत पैकेज की तैयारी की जा रही है. यह राहत पैकेज 90,000 करोड़ रुपए से 1 लाख करोड़ रुपए का हो सकता है.

सूत्रों के मुताबिक, इस राहत पैकेज का इस्तेमाल इन कंपनियों के ऊपर कर्मचारियों के वेतन के बोझ को कम करने के तौर पर किया जाएगा. एमएसएमई मंत्रालय और टेक्सटाइल मंत्रालय लगातार इस तरह के पैकेज की मांग कर रहे हैं. अब वित्त मंत्रालय ने इन दोनों मंत्रालयों के साथ कई दौर की बैठकें की है और इस पैकेज के लिए कई तरह के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.

पहला विकल्प- कंपनी में कर्मचारियों के आधार पर मदद
पहले विकल्प में कंपनियों को कर्मचारियों के आधार पर आर्थिक मदद दी जाएगी. इस मदद का वो इस्तेमाल कर्मचारियों के 3 या 6 महीने का पूरा वेतन या आंशिक वेतन के भुगतान के तौर पर करेंगे. इसके लिए ईएसआई (ESI) के तहत अटल बीमित व्यक्ति योजना के तहत 80,000 करोड़ रुपए के फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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दूसरा विकल्प- 2 से 3 फीस पर लोन
दूसरे विकल्प में एमएसएमई को 2 से 3 फीसदी के ब्याज दर पर बैंक और वित्तीय संस्थाओं से लोन दिए जाएंगे. इसका रिपेमेंट वो तब करेंगे, जब स्थितियां सामान्य हो जाएं. लोन रिपेमेंट के लिए अधिकतम 3 साल का समय निर्धारित किया जा सकता है.

तीसरा विकल्प- टेक्सटाइल के लिए बांग्लादेश मॉडल पर विचार
तीसरे विकल्प के रूप में टेक्सटाइल के लिए बांग्लादेश मॉडल को लागू करने विचार किया जा सकता है. इसके तहत सरकार इन कंपनियों को सीधे आर्थिक तौर पर मदद कर सकेगी. इस मदद का इस्तेमाल वो अपने कर्मचारियों के सैलरी सपोर्ट के तौर पर करेंगे. (प्रकाश प्रियदर्शी, संवाददाता- CNBC आवाज़)
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