रोजगार बढ़ाने के लिए चीनी मॉडल पर सरकार की नजर

देश को 5 ट्रिलियन डॉलर यानी 5 लाख करोड़ की इकोनॉमी बनाने के लिए हमें ग्रोथ रेट को न केवल बढ़ाना होगा, बल्कि बढ़ी हुई ग्रोथ रेट को बरकरार भी रखना होगा.

News18Hindi
Updated: July 5, 2019, 9:44 AM IST
रोजगार बढ़ाने के लिए चीनी मॉडल पर सरकार की नजर
चीन और ईस्ट एशिया ने एक्सपोर्ट ड्रिवन मॉडल को अपनाया, जिसने उन्हें इंटरनेशनल मार्केट्स के साथ कंपीट करने में सक्षम बनाया.
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Updated: July 5, 2019, 9:44 AM IST
देश के चीफ इकोनॉमिक एडवायजर केवी सुब्रमण्यन ने भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में अपना ब्लूप्रिंट जारी किया है. इस लक्ष्य को पाने के लिए आर्थिक सर्वे में उन्होंने जॉब, ग्रोथ, निवेश बढ़ाने और MSME पर फोकस करने पर जोर दिया गया है. साथ ही सीईए सुब्रमण्यन ने कहा कि देश को 5 ट्रिलियन डॉलर यानी 5 लाख करोड़ की इकोनॉमी बनाने के लिए हमें ग्रोथ रेट को न केवल बढ़ाना होगा, बल्कि बढ़ी हुई ग्रोथ रेट को बरकरार भी रखना होगा.

यह ग्रोथ रेट अगले 5 साल 8 फीसदी की होनी चाहिए. इस लक्ष्य को पाने के लिए निवेश बढ़ाने पर जोर देना जरूरी है. इन्वेस्टमेंट का परसेंटेज GDP के 30 फीसदी से ज्यादा होना चाहिए. हमें आगे चलकर लगभग 35 फीसदी इन्वेस्टमेंट की जरूरत है. उन्होंने चीन और ईस्ट एशिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जैसे-जैसे ग्रोथ रेट बढ़ी, सेविंग्स को इन्वेस्ट करने की रेट भी बढ़ी. इससे प्रॉडक्टिविटी बेहतर हुई.

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आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि चीन और ईस्ट एशिया ने एक्सपोर्ट ड्रिवन मॉडल को अपनाया, जिसने उन्हें इंटरनेशनल मार्केट्स के साथ कंपीट करने में सक्षम बनाया. इसके चलते इकोनॉमी को बूस्ट मिला और ग्रोथ रेट में और इजाफा होता चला गया. हमें भी इस तरीके को अपनाने की जरूरत है.

सुब्रमण्यन ने कहा, 'निजी निवेश को बढ़ावा मिलना चाहिए. साथ ही विदेशों से निजी निवेश भी बढ़ना चाहिए. इससे कंपनियां ज्यादा प्रॉडक्टिव होंगी और जॉब्स व एक्सपोर्ट भी बढ़ेगा. साथ ही कंपनियां इंटरनेशनल मार्केट ​के साथ कंपीट भी कर सकेंगी. इससे ​आगे चलकर डिमांड और निवेश भी बढ़ेगा.'

एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए प्रॉडक्टिविटी बढ़ाने की जरूरत सुब्रमण्यन ने कहा कि जैसे-जैसे सेविंग को निवेश में लगाया जाएगा, डिमांड और खपत में बढ़ोत्तरी होगी. साथ ही प्रॉडक्टिविटी भी बढ़ेगी, जिससे एक्सपोर्ट को सहारा मिलेगा. बाहर के देशों में बिजनेस बढ़ने से इकोनॉमी की स्ट्रेंथ बढ़ेगी.

जॉब बढ़ाने पर फोकस
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मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि देश में जिस हिसाब से कंपनियां हैं, उस लिहाज से जॉब क्रिएशन नहीं है. कई कंपनियां ऐसी हैं, जो सालों पुरानी हैं लेकिन उनमें जॉब क्रिएशन की दर अभी भी काफी कम है. 85 फीसदी मैन्युफैक्चरिंग मार्केट पर MSME का दबदबा है लेकिन उनमें इंप्लॉयमेंट रेट केवल लगभग 23 फीसदी है. इसलिए इंप्लॉयमेंट के मोर्चे पर काम करने की जरूरत है. इसमें लेबर रिफॉर्म भी काम आएंगे क्योंकि इनकी मदद से ज्यादा लेबर इंडस्ट्रीज से जुड़ेंगे, जिससे इंप्लॉयमेंट के साथ प्रॉडक्टिविटी भी बढ़ेगी. डेटा को पब्लिक गुड बनाया जाना सीईए ने कहा कि डेटा लगातार सस्ता हो रहा है और इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है. सरकार को इसे पब्लिक गुड बनाने के लिए इन्वेस्टमेंट करने की जरूरत है.'

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इसमें उन्होंने महंगाई पर लगाम कसने, बढ़ती ग्रोथ रेट, इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में किया गया काम जैसे इलेक्ट्रिफिकेशन, उड़ान योजना आदि, आईबीसी, वित्तीय घाटा कंट्रोल में रखने को उठाए गए कदम आदि का जिक्र किया. इसके अलावा उन्होंने कुछ बिहेवियरल चेंजेस भी गिनाए, जिनमें स्वच्छता अभियान प्रमुख है. उन्होंने कहा कि बिहेवियरल चेंज भी पब्लिक पॉलिसी और प्रोग्राम की कामयाबी में मदद कर सकते हैं.

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First published: July 5, 2019, 9:02 AM IST
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