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बजट 2022 को अच्छे-से समझना है तो आसान भाषा में लिखा ये आर्टिकल अवश्य पढ़ें!

बजट 2022 को अच्छे-से समझना है तो आसान भाषा में लिखा ये आर्टिकल अवश्य पढ़ें!

इस बजट में जो सबसे बड़ी कमी है, वो यह है कि इसमें मध्‍यम वर्ग (Middle Class) की पूरी तरह उपेक्षा की गई है.

इस बजट में जो सबसे बड़ी कमी है, वो यह है कि इसमें मध्‍यम वर्ग (Middle Class) की पूरी तरह उपेक्षा की गई है.

एरिन कैपिटल पार्टनर्स के अध्‍यक्ष टी.वी.मोहनदास पई (T.V. Mohandas Pai) का कहना है कि इस बात में कोई शक नहीं है कि इस वर्ष का बजट (Budget 2022) विकास को गति देने वाला है. लेकिन, इसकी सबसे बड़ी खामी यह है कि देश के खपत इंजन मध्‍यम वर्ग की इसमें घोर उपेक्षा की गई है.

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टी.वी.मोहनदास पई

बजट 2022-23 (Budget 2022) राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन (NDA) सरकार के तरक्की और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने वाला है. यह बजट आर्थिक विकास को गति देने के लिये अति आवश्‍यक बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा. सरकार ने बजटीय अनुमानों को बहुत चतुराई से निर्धारित किया है और ये वास्‍तविकता के बहुत करीब हैं. इस बजट में जो सबसे बड़ी कमी है, वो यह है कि इसमें मध्‍यम वर्ग (Middle Class) की पूरी तरह उपेक्षा की गई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने मध्‍यम वर्ग को टैक्‍स से राहत न देकर बजट को परिवर्तनकारी बजट में परिवर्तित करने का सुअवसर खो दिया.

मध्‍यम वर्ग की उपेक्षा बहुत चिंताजनक है. समाज की इस श्रेणी ने कोविड-19 में सबसे ज्‍यादा दुश्‍वारियां झेली हैं. महामारी में सबसे ज्‍यादा नौकरियों से मध्‍यम वर्ग ने ही हाथ धोया. स्‍वास्‍थ्‍य पर सबसे ज्‍यादा खर्च इस वर्ग ने किया और घर बैठकर अपनी कमाई को डूबते हुए भी इसी ने सबसे ज्‍यादा देखा है. स्‍टार्टअप (Startup) के हाथ भी इस बजट में कुछ नहीं आया है. मेक इन इंडिया (Make In India) मुहिम को यह बजट खूब सहारा देगा, इसमें कोई शक नहीं है. कुल रक्षा खरीद में से 68 फीसदी की पूर्ति घरेलू बाजार से करने का वादा वास्‍तव में मेक इन इंडिया मुहिम के लिए बूस्‍टर का काम करेगा.

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अर्थव्‍यवस्‍था ने लगाई लंबी छलांग

चालू वित्त वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के लिए उत्कृष्ट रहा है, जीडीपी 197 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 232 लाख करोड़ रुपये हो गई है. इस तरह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 35 लाख करोड़ रुपये की भारी वृद्धि हुई है. अगर डॉलर के हिसाब से देखें तो सालभर में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में 466 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई है. यह बहुत भारी उछाल है और हम भारत की जीडीपी को लगभग 3.15 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ते हुए देख सकते हैं. यह 17.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. यह भारी भरकम वृद्धि तब हुई है जब कोरोना ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था पर गहरा असर डाला है. यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और भारत सरकार द्वारा कोरोना से भारतीयों और भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को बचाने के किए गए प्रयासों को भी प्रतिबिंबित करती है.

बजट में आय (EARNINGS) और व्यय (EXPENDITURE)

सरकार ने 22.17 लाख करोड़ रुपये के सकल कर राजस्व (Gross Tax Revenue) का बजट रखा है. संशोधित अनुमान में राजस्‍व का आंकड़ा 25.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. बजट से यह 3 लाख करोड़ ज्‍यादा है. अगर सरकार के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि दिसंबर 2021 तक कर संग्रहण (Tax Collection) 19.28 लाख करोड़ रुपये था. जनवरी-मार्च के बीच हुए 6.85 लाख करोड़ के कर संग्रह को पिछले वर्ष की तुलना में देखें तो कुल कर संग्रह 26.13 लाख करोड़ रुपये हो सकता है. साफ है कि सरकार ने अपने संशोधित अनुमान में कर संग्रह (Tax Collection) को कम करके आंका है.

आश्‍चर्यचकित होने के लिए अभी और भी बातें है. संशोधित अनुमानों में विनिवेश लक्ष्‍य (Disinvestment Target) को 1.75 लाख करोड़ से घटाकर 78,000 करोड़ रुपये कर दिया गया. इसका अर्थ है कि एलआईसी के 1 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को घटाकर 50,000 करोड़ रुपये किया जा सकता है. अगले साल के विनिवेश लक्ष्य को घटाकर 65,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. पिछले दो-तीन साल में पहली बार बजट में हमारे पास बड़ा विनिवेश लक्ष्य नहीं है.

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लाभांश प्राप्ति (Dividend Received) में भी बढ़ोतरी हुई है. यह 1.03 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इसमें बढ़ोतरी का मुख्‍य कारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा दिया गया 43,000 करोड़ रुपये का लाभांश है. अगले साल के लिए लक्ष्‍य को घटाकर 1.13 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. कुल मिलाकर, अगर हम संशोधित बजटीय अनुमानों को देखें तो यह एक बहुत ही स्वस्थ ट्रेंड को दर्शाता है.

अगर हम अगले साल के सकल कर राजस्व की बात करें तो सरकार ने FY2023 में 27.57 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा है. यह वित्‍तवर्ष 2022 में 25.16 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा है, लेकिन फिर भी इसे कम करके आंका गया है. ऐसा इसलिये है, क्‍योंकि इस साल प्रत्‍यक्ष करों में एक से डेढ़ लाख करोड़ रुपये बढ़ोतरी हो सकती है. इस तरह अगले वर्ष कर संग्रहण 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. केंद्र सरकार ने शायद अनुमानित लक्ष्‍यों को इसलिये कुछ कम रखा है, ताकि यह कुछ राहत, खास तौर पर मध्‍यम वर्ग, को दे सके.

अगले साल 39.45 लाख करोड़ रुपये व्‍यय होने का अनुमान बजट में लगाया गया है. यह बढ़िया अनुमान है. ऐसा इसलिये है क्‍योंकि इस वर्ष के बजट में से करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये एकमुश्त खर्च पर व्‍यय होगा, 67,000 करोड़ रुपये एयर इंडिया को इसकी देनदारियों के भुगतान के लिए देने पड़ेंगे. पिछले वर्ष के निर्यात पर सब्सिडी देनदारियों के मद में भी 53,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे और करीब 50,000 करोड़ रुपये खाद्य सब्सिडी पर खर्च होंगे.

इस साल सरकारी प्रतिभूतियों के मामले में 10.40 लाख करोड़ रुपये की बाजारी उधारियों (Market Borrowing) को वित्तपोषित करना है. जबकि बजट में इसका अनुमान 12.05 लाख करोड़ लगाया गया है. अगले साल उधार में भारी उछाल देखने को मिलेगा और यह आंकड़ा 14.95 लाख रुपये करोड़ तक जा सकता है. उधार का बड़ा हिस्‍सा छोटी बजत योजनाओं से आ रहा है. इस साल यह 6.5 लाख करोड़ रुपये के करीब है. वहीं, अगले साल यह 5 लाख करोड़ रुपये से कम होगा. जाहिर है, पूरे बजट में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि राजस्व बढ़ने की संभावनाएं उसके पक्ष में हों और अचानक कोई खर्च करना पड़े तो उसके पास भरपूर पूंजी हो.

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इस साल अर्थव्‍यवस्‍था में 9.2 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है और अगले साल यह बढ़ोतरी 8 से 8.5 फीसदी रह सकती है. इस साल के बजट की खास बात यह है कि इसमें बुनियादी ढांचे पर खर्च को बढ़ाया गया है. बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर 7.50 लाख करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे. यह कुल जीडीपी का 3 फीसदी है. अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के निवेश के साथ 2022-23 में व्‍यय 10.68 लाख करोड़ रुपये हो जायेगा. इसी के भाग के रूप में सरकार राज्‍यों को 50 साल के लिए ब्‍याज रहित 1 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने के लिए भी देगी. इस साल सरकार 15,000 करोड़ रुपये राज्‍यों को उपलब्‍ध कराएगी.

ग्रीन सेक्‍टर और मेक इन इंडिया को बढ़ावा

बजट में कई सुधार पहलों (Reform Initiatives) की भी घोषणा की गई है. आकांक्षी जिला कार्यक्रम, 25,000 अनुपालनों का निरसन, विश्वास आधारित शासन पर जोर, ई-पासपोर्ट, शहरी नियोजन और सार्वजनिक परिवहन पर ध्यान, भूमि अभिलेखों के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग, दिवाला प्रक्रिया में सुधार आदि कई स्‍वाग्‍त-योग्‍य कदम बजट में उठाये गए हैं. इस बजट की एक और बड़ी विशेषता यह है कि अगले साल कुल रक्षा खरीद में से 68 फीसदी खरीद घरेलू कंपनियों से की जाएगी. इस साल यह 58 फीसदी है. मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि भारत अपनी कुल ऊर्जा खपत का 50 फीसदी का उत्‍पादन वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से पैदा करें. इसलिए बजट में सोलर मोड्यूल्‍स के लिए 19,500 करोड़ रुपये उत्पादन प्रोत्साहन (Production-linked incentive – PLI) हेतु रखे गये हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हिकल, सौर और पवन ऊर्जा पर भी बहुत जोर दिया गया है.

उद्यम पूंजी उद्योग, स्टार्टअप खाली हाथ

अगर हम उद्यम पूंजी उद्योग की बात करें तो, इस क्षेत्र के लिए बजट में कुछ खास नहीं है. जबकि, यह उद्योग 40 अरब डॉलर के निवेश और 2021 में 43 यूनिकॉर्न के साथ विकास का इंजन रहा है. हालांकि, एक विशेषज्ञ समिति का गठन जरूर किया है. इसका गठन अनुपालन में आसानी सुनिश्चित करने के लिए उद्योग द्वारा उठाए गए मामलों की समीक्षा करने के लिए किया गया है.

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स्‍टार्टअप के लिए भी यह बजट निराशाजनक है. सरकार ने सभी गैर-सूचीबद्ध संपत्तियों (Non-Listed Assets) पर सरचार्ज घटा दिया है. सरचार्ज को 37 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दिया गया है. सरचार्ज स्टार्टअप्स में निवेश पर भी लागू होता है. परंतु एक भारतीय निवेशक को अब भी गैर सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश पर 20 फीसदी टैक्‍स पूंजीगत लाभ पर देना होगा. स्‍टार्टअप में भी निवेश पर उसे यह टैक्‍स देना होगा. वहीं, विदेशी निवेशक पर टैक्‍स की यह दर केवल 10 फीसदी है.

सरकार ने यह भी घोषणा की है कि स्टार्टअप्स के लिए टैक्‍स ब्रेक एक साल ओर जारी रहेगा. यह स्‍टार्टअप को टैक्‍स लाभ देने के लिए गजब की सरकारी योजना है, जिसमें इतनी कड़ी शर्तें लगाई गई हैं कि कोई भी इसका लाभ नहीं ले सकता है. भारत में मौजूद कुल 60,000 स्‍टार्टअप में अभी तक केवल 600 स्‍टार्टअप को ही योजना के योग्‍य माना गया है.

भारतीय कर योजना में एक ऐसे भारतीय निवेशक के साथ एनडीए सरकार में भी असमानता जारी है जो भारत में रहकर, भारत में ही निवेश करके स्‍वयं का विकास करना चाहता है. पिछले सात वर्षों में करीब 10 हजार करोड़पति इसी कर आतंकवाद (Tax Terrorism) की वजह से देश छोड़कर चले गये. उनके साथ ही करीब 20 से 30 हजार करोड़ की खपत भी विदेश चली गई. एक हाई नेटवर्थ वाले व्‍यक्ति के लिए यहां रहकर ज्‍यादा टैक्‍स देने से अच्‍छा है कि वो विदेश में जाकर बस जाये. एक बढ़िया जीवनशैली जीये और अनिवासी भारतीय का तमगा हासिल कर भारत में पूंजी लगाए और कम टैक्‍स भरे.

मध्‍यम वर्ग के हिस्‍से आया सिर्फ इंतजार

बजट में मध्‍यम वर्ग (Middle Class) की पूरी तरह उपेक्षा की गई है. यह बहुत निराशाजनक है. समाज की इस श्रेणी ने कोविड-19 में सबसे ज्‍यादा दुश्‍वारियां झेली हैं. महामारी में सबसे ज्‍यादा नौकरियों से मध्‍यम वर्ग ने ही हाथ धोया. स्‍वास्‍थ्‍य पर सबसे ज्‍यादा खर्च किया और घर बैठकर अपनी कमाई को डूबते देखा. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में मध्‍यम वर्ग खपत का इंजन (Driver Of Consumption) है. भारत के 138 करोड़ की आबादी में से करीब 100 करोड़ लोगों की वार्षिक आय एक हजार डॉलर से भी कम है. 8 करोड़ लोग इनकम टैक्‍स भरते हैं.

एक आयकरदाता के परिवार में कुल चार सदस्‍य ही मानें तो 32 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिसे हम मध्‍यम वर्ग कह सकते हैं. यही वो आबादी है जो कार खरीदती है और गृहऋण (Home Loan) लेती है. ये भारत के मुख्‍य करदाता हैं और उपभोक्‍ता भी. इन्‍हीं लोगों ने पिछले दो वर्षों में सबसे ज्‍यादा परेशानियों का सामना किया है. सरकार से इन्‍हें उम्‍मीद थी कि वह उन्‍हें कुछ टैक्स से जुड़ी राहत देगी. लेकिन, ये उम्‍मीद बस उम्‍मीद ही रह गई.

हमें उम्मीद थी कि सरकार मध्यम वर्ग के लिए टैक्‍स कम करेगी. यह उम्‍मीद इसलिए भी बढ़ी थी, क्‍योंकि व्‍यक्तिगत टैक्‍स संग्रह में भारी बढ़ोतरी हुई थी. अगर टैक्‍स छूट दी जाती तो मध्‍यम वर्ग के हाथ में ज्‍यादा पैसा आता. इससे खपत में भी वृद्धि होती. महामारी के दौरान भी मध्‍यम वर्ग उपेक्षित रहा था. सरकार ने गरीबों को बहुत सहायता दी, लेकिन मध्‍यम वर्ग की सुध नहीं ली. सरकार ने मध्‍यम वर्ग को टैक्‍स राहत न देकर बजट को परिवर्तनकारी बजट में बदलने का सुअवसर खो दिया.

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संक्षेप में कहें तो, केंद्र सरकार ने राज्‍यों को ज्‍यादा पूंजी देकर और बुनियादी ढांचे पर ज्‍यादा व्‍यय करके अपनी विकास की रणनीति को बरकरार रखा है. भारत के अगले दो-तीन वर्षों तक उच्च विकास पथ पर अग्रसर रहने की उम्‍मीद की जा रही है. इस बात की 90 फीसदी संभावना है कि भारत 2026 तक 5 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी को हासिल कर लेगा. और वर्ष 2032 तक भारत की जीडीपी के 10 ट्रिलियन डॉलर हो जाने की 80 टका उम्‍मीद है. बस शर्त एक ही है, इस अवधि में रुपया-डॉलर रेट में स्थिरता रहे.

(लेखक एरिन कैपिटल पार्टनर्स के अध्यक्ष हैं. इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं और ये इस प्रकाशन के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.)

Tags: Budget, Finance minister Nirmala Sitharaman, Start Up

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