होम /न्यूज /व्यवसाय /Personal Finance: महीने के आखिर में पैसों की कमी! अपनाएं ये टिप्स नहीं होगी टेंशन

Personal Finance: महीने के आखिर में पैसों की कमी! अपनाएं ये टिप्स नहीं होगी टेंशन

यदि आपको अपने फाइनेंशियल टारगेट पूरे करने हैं तो खर्चों का भी हिसाब रखना होगा.

यदि आपको अपने फाइनेंशियल टारगेट पूरे करने हैं तो खर्चों का भी हिसाब रखना होगा.

घर का सामान खरीदते समय जरूरत की चीजों और इच्छा वाली चीजों को अलग-अलग बांट लें. अब केवल जरूरत वाली चीजों की खरीदारी करें ...अधिक पढ़ें

    financial planning: नौकरीपेशा लोगों (Salaried Person) पर एक कहावत एकदम सटीक बैठती है- चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात. इस कहावत का जिक्र इसलिए किया जा रहा है क्योंकि आमतौर पर हम देखते हैं कि महीने के पहले 10 दिन हम बड़े शान से रहते हैं क्योंकि महीने के पहले हफ्ते में नौकरीपेशा लोगों को वेतन मिलता है. लेकिन जैसे-जैसे महीना आगे बढ़ता है हाथ तंग होना शुरू हो जाता है और महीने का आखिर आते-आते हाथ और जेब बिल्कुल खाली हो जाते हैं.

    हर महीने ऐसा क्यों होता है कि महीने के अंत में हमारे पास पैसे की कमी हो जाती है और हमें अगले महीने के लिए अपने टारगेट बदलने पड़ते हैं.

    पर्सनल फाइनेंशियल एडवाइडर ममता गोदियाल (Mamta Godiyal) कहती हैं कि यह दिक्कत तकरीबन हर नौकरीपेशा आदमी के साथ है. वह कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन महीने के आखिर के 5-7 दिन बड़ी ही मुश्किलभरे कटते हैं. कई मामलों में तो देखने में आया है कि ऐसे समय पर घर में तनाव भी पैदा हो जाता है.

    क्या इस समस्या से मुक्ति पाई जा सकती है, इस सवाल पर ममता कहती हैं कि बिल्कुल पाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए कुछ नियम बनाने होंगे, हमें कुछ बुनियादी बातों पर ध्यान देना होगा.

    तो आइए, कुछ बुनियादी बातों पर चर्चा करें जिन पर ध्यान देने से कम से कम महीने के आखिर में तंगी झेलनी नहीं पड़ेगी. इसके लिए आपको अपने कैश फ्लो को समझने की जरूरत होती है. कैश फ्लो यानी नकदी प्रवाह का गणित समझने से ना केवल इनकम और खर्चों को मैनेज (manage your expenses) करने में मदद मिलती है, बल्कि इससे बचत भी होती है.

    आइए जानते हैं तनाव भरे महीने के आखिर को हैप्पी एंडिंग में कैसे बदलें-

    जरूरत और चाहत में अंतर को पहचानें
    अपनी जरूरतों और चाहतों को स्पष्ट रूप से समझें और प्राथमिकताएं निर्धारित करें. आमतौर पर हम अपनी जरूरतों और चाहतों के बीच का अंतर नहीं जानते हैं. पहला नियम है कि हमें अपनी जरूरत और चाहत इसके बारे में तस्वीर एकदम साफ होनी चाहिए.

    घरेलू महिलाएं भी बन सकती हैं अच्छी निवेशक, इन्वेस्टमेंट की आदत से बनेगी बात

    आवश्यकता वह होती है जो हमें जीने के लिए, घर चलाने के लिए जरूरी होता है. उन चीजों के बिना आपका जीवन और घर नहीं चल सकता.

    और चाहत सिर्फ एक इच्छा है. इसके बिना आप रह सकते हैं.

    इसलिए घर का सामान खरीदते समय जरूरत की चीजों और इच्छा वाली चीजों को अलग-अलग बांट लें. अब केवल जरूरत वाली चीजों की खरीदारी करें. इच्छा वाली चीजों को साइड कर दें. ऐसा करने से निश्चित ही आपके घर के बजट में काफी सुधार दिखाई देगा.

    अपनी आय को समझें (Manage Your Money)
    ममता कहती हैं कि एक आदमी की आमदनी के माध्यम अलग-अलग हो सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि अपनी आय के विभिन्न स्रोतों को समझें. यह आपके वेतन, व्यावसायिक आय, ब्याज, किराये की आय, भत्ते आदि के रूप में हो सकता है. बस उन्हें जोड़ें और अपने खर्चों और भविष्य की बचत का प्रबंधन करने के लिए इसका ट्रैक रखें. पूरी आमदनी को घर में ही खर्च ना करें. अलग-अलग स्रोतों से होने वाली आमदनी को अलग-अलग मदों में खर्च और निवेश करें.

    खर्चों का हिसाब लगाएं
    खर्चों के बारे में ममता गोदियाल कहती हैं कि हमें जीने के लिए जरूरी सभी आवश्यक चीजों का भुगतान करना होता है. यदि आपको अपने फाइनेंशियल टारगेट पूरे करने हैं तो आपको अपने खर्चों का भी हिसाब रखना होगा. आमतौर पर एक मध्यमवर्गीय परिवार में आमदनी का तो पता होता है कि एक आदमी कितना कमा रहा है, लेकिन वह आमदनी खर्च कहां और किस तरह हो रही है, इस बात की जानकारी नहीं होती. बस यह कह दिया जाता है कि घर में ही तो खर्च हो रहे हैं.

    इसलिए अपने खर्चों की पहचान करें और अनावश्यक खर्चों को कम करें.

    इस काम के लिए आपको कुछ टिप्स फॉलो करने होंगे-
    – सभी रसीदें रखें.
    – प्रतिदिन हर खर्च को रिकॉर्ड करें.
    – महीने के अंत में आपके कुल खर्चों को लिखें.
    – ऐसा कम से कम 3 महीने तक करें.

    तीन महीने के बाद, आप देखेंगे कि आप अपने बारे में, अपनी इनकम और खर्चों के बारे में बहुत जागरूक हैं.

    बजट बनाना (Household Budget)
    अब आप जान गए हैं कि आपके खर्च और बजट क्या हैं तो बस उन्हें एक साथ रख दें और सरल सूत्र (आय – व्यय) के साथ अंतर देखें.

    यदि शेष राशि सकारात्मक है यानी आपके पास कैश बचा हुआ है तो इसका मतलब कि आपकी आय आपके खर्च से अधिक है. इस बची हुई राशि से आप कर्जों को चुका सकते हैं या भविष्य के लिए निवेश कर सकते हैं या अपनी बचत बढ़ा सकते हैं.

    यदि शेष राशि ऋणात्मक है अर्थात आपको घाटा है. इसका मतलब आपका खर्च आपकी आय से अधिक है. यहां आपको अपने खर्चों में कटौती करके अपने बजट में बदलाव करने की जरूरत है. अपनी चाहतों से ज्यादा अपनी जरूरतों पर ध्यान दें.

    याद रखें, बजट बनाना एक बार की कसरत नहीं है. आपको इसे महीने में कम से कम एक बार नियमित रूप से करने की आवश्यकता है.

    फाइनेंशियल टारगेट (Financial Goals)
    किसी स्थान पर जाने के लिए आपको वहां जाने वाले रास्तों के बारे में जानना बहुत जरूरी है. इसी तरह अपने पैसे को अच्छी तरह से मैनेज करने के लिए आपके पास एक टारगेट होना चाहिए. टारगेट को मापने का पैमाना होना चाहिए. और फिर उस पैमाने पर खरा उतरने के लिए प्लानिंग होनी चाहिए. सही प्लानिंग से आप अपने टारगेट को हासिल कर सकते हैं.

    “आरबीआई कहता है जानकर बनिये”. इस नई जागरूकता से आप अपनी आय को अपने खर्चों के साथ संतुलित कर पाएंगे. और फिर किसी का को हाथ तंग कहकर अगले महीने के लिए नहीं टालेंगे.

    Tags: Money Making Tips, Personal finance

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें