बैंकिंग रेग्‍युलेशन संशोधन बिल लोकसभा में पास, RBI के अधीन होंगे देश के सभी को-ऑपरेटिव बैंक

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए बैंकिंग रेग्‍युलेशन संशोधन बिल को लोकसभा में पारित कर दिया गया है.

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए बैंकिंग रेग्‍युलेशन संशोधन बिल को लोकसभा में पारित कर दिया गया है.

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने लोकसभा में बैंकिंग रेग्‍युलेशन एक्‍ट, 1949 में संशोधन के लिए विधेयक (Amendment Bill) पर चर्चा करते हुए कहा कि जब भी कोई बैंक मुश्किल में फंसता है तो लोगों की मेहनत की कमाई संकट में पड़ जाती है. नए कानून से लोगों के बैंकों में जमा पैसे को सुरक्षा मिलेगी. साथ ही देश के तमाम को-ऑपरेटिव बैंक (Co-Operative Banks) भी रिजर्व बैंक (RBI) के तहत आ जाएंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 16, 2020, 8:39 PM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार ने बैंक उपभोक्‍ताओं (Bank Customers) की मुश्किलों को कम करने और को-ऑपरेटिव बैंकों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अधीन लाने के लिए एक संशोधन विधेयक (Amendment Bill) संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान लोकसभा में पेश किया. इस विधेयक को आज चर्चा के बाद लोकसभा में पारित कर दिया गया है. वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने संसद के निचले सदन में बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि केंद्र सरकार बैंकिंग रेग्‍युलेशन एक्‍ट, 1949 (Banking Regulation Act, 1949) में संशोधन कर बैंक उपभोक्‍ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना चाहती है.

जून में लाए गए अध्‍यादेश की जगह लेगा संशोधित कानून
बिल पारित होने से पहले वित्‍त मंत्री ने कहा कि को-ऑपरेटिव बैंक और छोटे बैंकों के डिपॉजिटर्स पिछले दो साल से कई तरह की समस्‍याओं का सामना कर रहे है. हम इस विधेयक के जरिये उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित करेंगे. ये बैंक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं और एक मोरेटोरियम सुविधा चाहते हैं. इसमें रेग्‍युलटर का काफी समय खराब होता है. बता दें कि इस विधेयक को पहली बार बजट सत्र के दौरान मार्च में पेश किया गया था. हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण ये पारित नहीं हो सका था. इसके बाद केंद्र सरकार ने जून 2020 में देश के 1,482 अर्बन को-ऑपरेटिव और 58 मल्‍टी-स्‍टेट कॉ-आपरेटिव बैंकों को रिजर्व बैंक के अधीन (Under Supervision) लाने के लिए अध्‍यादेश लागू कर दिया था.





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को-ऑपरेटिव बैंकों के नियमन के लिए नहीं है नया कानून
निर्मला सीतारमण ने स्‍पष्‍ट किया कि ये विधेयक को-ऑपरेटिव बैंकों का नियमन (Regulate) नहीं करता है और ना ही ये केंद्र सरकार के को-ऑपरेटिव बैंकों का अधिग्रहण (Undertake) करने के लिए लाया गया है. संशोधन विधेयक के जरिये आरबीआई किसी बैंक के समामेलन (Amalgamation) की स्‍कीम बिना मोरेटोरियम के तहत रखे ला सकेगा. इस संशोधन से पहले अगर किसी बैंक को मोरेटोरियम (Moratorium) के तहत रखा जाता था तो डिपॉजिटर्स की निकासी की सीमा (Withdrawl Limit) तय कर दी जाती थी. साथ ही बैंक के कर्ज देने पर रोक लगा दी जाती थी.



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इन सोसायटीज पर लागू नहीं होगा संशोधन विधेयक
संशोधन विधेयक में धारा-45 के तहत कई बदलाव करने का प्रस्‍ताव रखा गया था. इनकी मदद से आरबीआई बैंकों की रोजमर्रा की गतिविधियों को बिना रोके जनहित, बैंकिंग सिस्‍टम और मैनेजमेंट के हित के लिए स्‍कीम बना सकता है. हालांकि, कानून में बदलाव से राज्‍यों के कानून के तहत को-ऑपरेटिव सोसायटी के स्‍टेट रजिस्‍ट्रार की मौजूदा शक्तियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. वित्‍त मंत्री सीतारमण ने स्‍पष्‍ट किया कि संशोधन विधेयक उन प्राइमरी एग्रीकल्‍चर क्रेडिट सोसायटी या को-आपरेटिव सोसायटी पर लागू नहीं होगा, जो कृषि कार्यों के लिए लंबी अवधि का कर्ज उपलब्‍ध कराती हैं. हालांकि, ये जरूरी है कि ये सोसायटी अपने नाम में 'बैंक', 'बैंकर' या 'बैंकिंग' शब्‍द का इस्‍तेमाल ना करती हों.

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328 अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों की कुल एनपीए 15 फीसदी से ज्‍यादा
वित्‍त मंत्री सीतारमण ने कहा कि जब भी कोई बैंक किसी भी तरह की मुश्किल में पड़ता है तो उसमें जमा लोगों के कड़ी मेहनत से कमाए पैसे संकट में फंस जाते हैं. उन्‍होंने कहा कि देश के 227 अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों (Urban Co-Operative Banks) की माली हालत बेहद खराब है. इसके अलावा 105 को-ऑपरेटिव बैंक ऐसे हैं, जिनके पास जरूरी न्‍यूनतम नियामकीय पूंजी (Minimum Regulatory Capital) तक नहीं है. वहीं, 47 को-ऑपरेटिव बैंकों की नेटवर्थ निगेटिव (Negative Net Worth) है. वहीं, 328 अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों की कुल नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross NPA) 15 फीसदी से ज्‍यादा हैं.
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