राज्यसभा में IBC संशोधन विधेयक पारित, कंपनी और गारंटर पर एकसाथ हो सकती है कार्रवाई

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से राज्‍यसभा में पेश किया गया दिवाला संशोधन कानून पारित हो गया है.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से राज्‍यसभा में पेश किया गया दिवाला संशोधन कानून पारित हो गया है.

Monsoon Session: संसद के उच्‍च सदन में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड एमेडमेंट बिल, 2020 (IBC Code (Amendment) Bill, 2020) पारित कर दिया गया है. इस विधेयक के जरिये कारोबार को दिवालिया होने से बचाने के लिए धारा-7, 9 और 10 का निलंबन किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2020, 9:27 PM IST
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नई दिल्ली. संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा (Rajya Sabha) ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड सेकेंड एमेंडमेंट बिल, 2020 (IBC Code (Amendment) Bill, 2020) को चर्चा के बाद पारित कर दिया है. यह विधेयक इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (एमेंडमेंट ) बिल, 2020 की जगह लेगा. इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने कहा कि इससे जुड़े अध्‍यादेश को कोविड-19 के कारण पैदा हालात के कारण लाया गया था. अब अध्यादेश को कानून बनाने के लिए सरकार ने विधेयक पेश किया है. उनके जवाब के बाद उच्‍च सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया.

कंपनियों-गारंटर के खिलाफ साथ-साथ हो सकती है कार्रवाई
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत कर्ज भुगतान में चूक करने वाली कंपनियों और व्यक्तिगत गारंटी देने वालों के खिलाफ साथ-साथ दिवाला कार्रवाई चल सकती है. उन्‍होंने कहा कि कई बार कर्ज लेने वाली कंपनियों की ओर से कुछ गारंटर होते हैं. ऐसे में कॉम्प्रिहैन्सिव कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजॉल्यूशन एंड लिक्विडेशन के लिए उनका मानना है कि जहां तक संभव हो कॉरपोरेट कर्जदार और उसके गारंटर के खिलाफ साथ-साथ दिवाला कार्रवाई की जाए. सरकार की ओर से जून में लाए अध्यादेश में प्रावधान किया गया था कि महामारी की वजह से 25 मार्च से छह महीने तक कोई नई दिवाला कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी. साथ ही साफ किया कि 25 मार्च से पहले कर्ज भुगतान में चूक करने वाली कंपनियों के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रहेगी.

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माकपा के रागेश का पेश किया गया संकल्‍प नामंजूर


वित्‍त मंत्री सीतारमण ने बताया कि इस विधेयक के जरिये कारोबार को दिवालिया होने से बचाने के लिए धारा-7, 9 और 10 का निलंबन किया गया है. राज्‍यसभा में माकपा (CPM) सदस्य केके रागेश की ओर से पेश किए गए उस संकल्प को नामंजूर कर दिया गया, जिसमें विधेयक को नामंजूर करने का प्रस्ताव किया गया था. इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा में कई सदस्यों ने अध्यादेश को लेकर सरकार की जमकर आलोचना की. भाकपा (CPI) के बिनय विश्वम ने सीतारमण की 'ईश्वर की देन' वाली टिप्‍पणी को लेकर सरकार पर हमला किया. उन्होंने कहा, 'भारतीय अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में है और वित्‍त मंत्री कह रही हैं कि ये सब ईश्वर के काम हैं. भगवान पर आरोप मत लगाओ. भगवान दोषी नहीं है.'

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एनसीपी, बीजेडी ने संशोधन विधेयक का किया समर्थन
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि उनकी पार्टी संशोधनों का समर्थन करती है, क्योंकि सरकार का लक्ष्य अस्थायी था. भविष्य में इसमें और संशोधन की जरूरत हो सकती है. बीजू जनता दल (BJD) के अमर पटनायक ने कहा कि 2016 के बाद से आईबीसी काफी सफल रहा है. ऐसे में तीन अध्यादेशों की क्या जरूरत थी. वहीं, माकपा के केके रागेश ने कहा कि दिवालिया होने की कार्यवाही रोकने से बैंकिंग सेक्टर संकट में आ जाएगा. वैश्विक महामारी के कारण लागू किए गए लॉकडाउन पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि उस समय रोजगार से ज्यादा जरूरी जिंदगी की हिफाजत करना था. इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा.

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बीजेपी के अरुण सिंह ने कहा, बैंकों का एनपीए हुआ कम
वित्‍त मंत्री ने कहा कि कोरोना संकट के कारण लोगों को हुई परेशानी पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने कई कदम उठाए. वहीं, उन्होंने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता का जिक्र करते हुए कहा कि यह अच्छा काम कर रही है. विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि इससे बैंकों की नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) में कमी आई है. उन्होंने संशोधन विधेयक को साहसिक कदम बताया. कांग्रेस के सदस्य विवेक तन्खा ने कहा कि धारा-10 के निलंबन से कुछ हासिल नहीं होगा. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के खत्‍म होने का समय तय नहीं है. अगर सरकार केवल बड़े कॉरपोरेट्स पर ध्‍यान देती रही तो छोटे व्‍यापारियों पर बुरा असर होगा.
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