केंद्र ने प्रवासी मजदूरों को रोजगार की सुरक्षा समेत श्रम सुधारों से जुड़े तीन बिल किए पेश, विपक्ष ने किया हंगामा

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने संसद के मानसून सत्र के दौरान श्रम सुधारों से जुड़े तीन विधेयक लोकसभा में पेश किए.
श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने संसद के मानसून सत्र के दौरान श्रम सुधारों से जुड़े तीन विधेयक लोकसभा में पेश किए.

Monsoon Session: केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने श्रम सुधारों (Labour Reform) से जुड़े तीन विधेयक संसद के निचले सदन (Lok Sabha) में पेश करने से पहले 2019 में पेश किए बिल वापस लिए. उन्‍होंने बताया कि पिछले साल पेश किए विधेयकों पर संसद की स्‍थायी समिति की ओर से मिलीं 233 सिफारिशों में 174 स्‍वीकार कर ली गई हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2020, 8:30 PM IST
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नई दिल्ली. संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने श्रम सुधारों (Labour Reforms) से जुड़े तीन विधेयक लोकसभा (Lok Sabha) में पेश किए. इनमें ऑक्‍यूपेशनल सेफ्टी, हेल्‍थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020 (Occupational Safety, Health and Working Condition Code 2020), इंडस्‍ट्रीयल रिलेशंस कोड 2020 (Industrial Relations Code 2020) और सोशल सिक्‍योरिटी कोड 2020 (Social Security Code 2020) शामिल हैं. इनमें किसी कंपनी में काम की सुरक्षा, स्वास्थ्य व काम के महौल को विनियमित करने, इंडस्‍ट्रीयल डिस्‍प्‍यूट्स की जांच व निर्धारण और कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधान हैं.

नए बिल पेश करने से पहले 2019 के विधेयक लिए वापस
केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लोकसभा में इन तीनों कोड्स से जुड़े विधेयक पेश करने से पहले 2019 में लाए गए श्रम सुधार से जुड़े विधेयक वापस लिए. उन्‍होंने बताया कि 2019 में पेश किए गए विधेयकों को श्रम संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया था. इसके बाद समिति ने 233 सिफारिशों के साथ रिपोर्ट सौंपी है. इनमें से 174 सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है. अब नया विधेयक पेश किया जा रहा है. इससे पहले, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने 2019 में पेश विधेयकों को वापस लेने का विरोध करते हुए कहा कि वे तकनीकी आधार पर इसका विरोध कर रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि इन विधेयकों पर श्रम संबंधी स्थायी समिति ने रिपोर्ट सौंप दी है. ऐसे में इनको वापस लेने से पहले समिति से बात की जानी चाहिए.

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विपक्ष की ओर से बिल वापस लेने पर जताई गईं आपत्तियां


प्रेमचंद्रन ने कहा कि क्या समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है. कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता मनीष तिवारी व शशि थरूर और माकपा के एएम आरिफ ने नए विधेयक पेश करने का विरोध किया. तिवारी ने कहा कि नया विधेयक लाने से पहले श्रमिक संगठनों और संबंधित पक्षों के साथ फिर से चर्चा की जानी चाहिए थी. अगर ऐसा नहीं किया गया है तो मंत्रालय को फिर से यह प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि नये विधेयकों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि लोग इस पर सुझाव दे सकें. इसमें प्रावसी मजदूरों की परिभाषा स्पष्ट नहीं है. श्रमिकों से जुड़े कई कानून अब भी इसके दायरे से बाहर हैं. इस पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए. लिहाजा, विधेयक वापस लेकर आपत्तियां दूर करने के बाद लाया जाए.

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'44 कानूनों से जुड़े 4 लेबर कोड्स की प्रक्रिया की गई पूरी'
कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि विधेयक में अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक के बारे में स्पष्टता नहीं है. नियमों के तहत इन विधयकों को पेश किए जाने से दो दिन पहले सदस्यों को दिया जाना चाहिए था. इसमें श्रमिकों के हड़ताल करने पर गंभीर रूप से रोक की बात कही गई है. वहीं, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिये पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं. विधेयकों को पेश करते हुए श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि 44 कानूनों के संबंध में चार श्रम संहिता बनाने की प्रक्रिया पूरी की गई. सबसे पहले इस पर 2004 में चर्चा हुई. इसके बाद 10 साल तक कुछ नहीं हुआ. अब बिल पेश करने से पहले 9 त्रिपक्षीय वार्ताएं हुईं, 10 बार क्षेत्रीय विचार-विमर्श हुए, 10 बार अंतर-मंत्रालयी परामर्श हुआ, चार उप-समिति स्तर की चर्चा हुई. कोड्स को 3 महीने के लिए वेबसाइट पर रखा गया. इस पर 6 हजार सुझाव मिले. समिति की 233 सिफारिशों में से 174 स्वीकार की गईं. इसके बाद ही नया विधेयक पेश किया जा रहा है.
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