अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारत को नहीं है बड़ा खतरा, इस वजह से है सुरक्षित

अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारत को नहीं है बड़ा खतरा, इस वजह से है सुरक्षित
मोदी सरकार टैक्‍नोलॉजी बेस्‍ड इनोवेटिव बिजनेस को विशेष रूप से प्रमोट कर रही है. यही वजह है कि केंद्र सरकार के अधीन चल रहे स्‍मॉल इंडस्‍ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) ने ऑनलाइन कैटरिंग बिजनेस शुरू करने वाले लोगों को 75 फीसदी लोन देने की योजना शुरू की है.

दुनिया की बड़ी रेटिंग एजेंसी मूडीज की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से दुनियाभर की करेंसीज पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन इससे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता नहीं है.

  • Last Updated: June 29, 2018, 10:50 AM IST
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अमेरिका के डॉलर में आई मजबूती भारत की मुद्रा और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी टेंशन नहीं है.
दुनिया की बड़ी रेटिंग एजेंसी मूडीज की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से दुनियाभर की करेंसीज पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन इससे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता नहीं है. भारत उन पांच देशों में शुमार है जो डॉलर के मजबूत होने से सबसे कम जोखिम की स्थिति में हैं. आपको बता दें कि पिछले कुछ महीनों के दौरान कई बड़े एशियाई देशों की करेंसी 8 फीसदी तक टूट चुकी है. भारतीय रुपया भी अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया हैं.

शुक्रवार को मजबूत खुला रुपया- शुक्रवार को भारतीय रुपये में जारी गिरावट थम गई है. एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे की मजबूती के साथ 68.70 के स्तर पर खुला. वहीं, गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 19 पैसे लुढ़ककर 68.79 के स्तर पर बंद हुआ था. (ये भी पढ़ें-रुपये में कमजोरी से आपकी जेब होगी खाली, ये सारी चीजें होंगी महंगी!)

इस वजह से भारत पर नहीं होगा असर- मूडीज का कहना है कि भारत, चीन, ब्राजील, मेक्सिको और रूस उन देशों में हैं जो मुद्रा के दबाव को लेकर सबसे कम जोखिम की स्थिति में हैं. मूडीज ने कहा कि  बड़ी बचत के जरिये भारत जैसी अर्थव्यस्थाएं घरेलू स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं.(ये भी पढ़ें-भारत के रुपये ही नहीं चीन के युआन में भी भारी गिरावट, जानिए क्यों)



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मूडीज ने कहा कि हालांकि, भारत का चालू खाते का घाटा (CAD) कच्चे तेल की कीमतों की वजह से बढ़ा है , लेकिन सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के प्रतिशत में बहुत ऊंचा नहीं है. इसकी भरपाई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आदि के जरिये की जा सकती है.
First published: June 29, 2018, 10:41 AM IST
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