लाइव टीवी

झटका! मूडीज ने भारत का ग्रोथ रेट अनुमान घटाकर 5.8 फीसदी किया

भाषा
Updated: October 10, 2019, 3:08 PM IST
झटका! मूडीज ने भारत का ग्रोथ रेट अनुमान घटाकर 5.8 फीसदी किया
मूडीज ने घटाया GDP का अनुमान

मूडीज का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था नरमी (Economic Slowdown) से काफी प्रभावित है और इसके कुछ कारक दीर्घकालिक असर वाले हैं.

  • Share this:
नई दिल्ली. मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस (Moody's Investors Service) ने 2019-20 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की ग्रोथ रेट (Growth Rate) का अनुमान 6.20 फीसदी से घटाकर 5.80 फीसदी कर दिया है. मूडीज का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था नरमी (Economic Slowdown) से काफी प्रभावित है और इसके कुछ कारक दीर्घकालिक असर वाले हैं. रिजर्व बैंक (RBI) ने भी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक (MPC) के बाद GDP ग्रोथ रेट का अनुमान घटाकर 6.10 फीसदी कर दिया है.

मूडीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि नरमी का कारण निवेश में कमी है जो बाद में रोजगार सृजन में नरमी और ग्रामीण क्षेत्र में वित्तीय संकट के कारण उपभोग में भी प्रभावी हो गया. उसने कहा, नरमी के कई कारण हैं और इनमें से अधिकांश घरेलू हैं और दीर्घकालिक असर वाले हैं.

2020-21 में ग्रोथ रेट में बढ़ोतरी
मूडीज ने कहा कि ग्रोथ रेट बाद में तेज होकर 2020-21 में 6.6 फीसदी और मध्यम अवधि में करीब 7 फीसदी हो जाएगी. उसने कहा, हम अगले दो साल जीडीपी की वास्तविक ग्रोथ और महंगाई में धीमे सुधार की उम्मीद करते हैं. हमने दोनों के लिये अपना पूर्वानुमान घटा दिया है. दो साल पहले की स्थिति से तुलना करें तो जीडीपी ग्रोथ रेट 8 फीसदी या इससे अधिक बने रहने की उम्मीद कम हो गई है.

ये भी पढ़ें: जेपी के घर खरीदारों के लिए खुशखबरी, सरकार ₹33 हजार करोड़ का टैक्स कर सकती है माफ.

राजकोषीय घाटा बढ़ने की आशंका
इससे पहले एशियाई विकास बैंक (ADB) और ओईसीडी ने भी भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ का अनुमान कम कर दिया था. रेटिंग एजेंसियां स्टैंडर्ड एंड पुअर्स और फिच ने भी पूर्वानुमान में कटौती की है. मूडीज ने कॉरपोरेट कर में कटौती तथा कम जीडीपी ग्रोथ रेट के कारण राजकोषीय घाटा सरकार के लक्ष्य से 0.40 प्रतिशत अधिक होकर 3.70 प्रतिशत पर पहुंच जाने की आशंका व्यक्त की.
Loading...

उसने कहा, अंतरराष्ट्रीय मानक के हिसाब से वास्तविक जीडीपी में पांच प्रतिशत की वृद्धि अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन भारत के संदर्भ में यह कम है. हालिया वर्षों में मुद्रास्फीति में अच्छी खासी गिरावट के कारण सांकेतिक जीडीपी की वृद्धि दर पिछले दशक के करीब 11 फीसदी से गिरकर 2019 की दूसरी तिमाही में करीब 8 फीसदी पर आ गयी है. उसने कहा कि 2012 के बाद निजी निवेश अपेक्षाकृत नरम रहा है लेकिन जीडीपी में करीब 55 फीसदी योगदान देने वाला उपभोग शानदार रहा है.

ये भी पढ़ें: जल्द इन 2 कंपनियों को बंद करने की तैयारी में है मोदी सरकार! जानिए कौन सी हैं ये कंपनियां?

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 10, 2019, 2:59 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...