Moody's ने कहा- कोरोना संकट के कारण तेजी से बदलेंगे वैश्विक व्यापार संबंध, सप्‍लाई चेन में भी होगा बदलाव

Moody's ने कहा- कोरोना संकट के कारण तेजी से बदलेंगे वैश्विक व्यापार संबंध, सप्‍लाई चेन में भी होगा बदलाव
रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा कि वैश्विक महामारी की वजह से तमाम देशों के बीच व्यापारिक संबंधों और आपूर्ति श्रृंखला में कुछ बुनियादी बदलाव आना तय हैं.

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस (Moody's Investors Service) ने कहा कि वैश्विक महामारी के कारण व्यापार, निवेश (Investment) और टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर (Technology Transfer) पर अंकुश की धारणा बढ़ने से ग्‍लोबल इकोनॉमी में संरक्षणवाद (Protectionism) बढ़ेगा. यही नहीं वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था (Global Economy) के बिखराव की रफ्तार भी तेज होगी.

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  • Last Updated: August 11, 2020, 10:56 PM IST
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नई दिल्ली. मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस (Moody's Investors Service) का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनियाभर के देशों के बीच कारोबारी संबंधों (Trade Relations) में बहुत तेजी से बदलाव होगा. इसके साथ ही ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन (Global Supply Chain) में भी बुनियादी बदलाव की रफ्तार बढ़ जाएगी. मूडीज ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक महामारी के कारण व्यापार, निवेश (Investment) और टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर (Technology Transfer) पर अंकुश की धारणा बढ़ने से ग्‍लोबल इकोनॉमी में संरक्षणवाद (Protectionism) बढ़ेगा. यही नहीं वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था (Global Economy) के बिखराव की रफ्तार भी तेज होगी.

कोविड-19 के बाद ग्‍लोबलाइजेशन के खिलाफ रुख होगा कड़ा
मूडीज ने कहा कि वैश्विक महामारी (Pandemic) की वजह से तमाम देशों के बीच व्यापारिक संबंधों और आपूर्ति श्रृंखला में कुछ बुनियादी बदलाव आना तय हैं. इससे ग्‍लोबलाइजेशन (Globalization) के खिलाफ रुख और कड़ा होगा. मूडीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में बदलाव आने में कई साल लगेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन (China) दुनिया की बाकी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कई मामलों में फायदे की स्थिति में रहेगा. चीन को छोड़कर कुछ एशियाई बाजारों को भी सप्‍लाई चेन में होने वाले बदलावों का फायदा मिलेगा.

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एशिया, यूरोप, अमेरिका का होगा अलग रीजनल ट्रेड सिस्‍टम


रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां किसी एक देश पर निर्भरता कम करने के लिए कई देशों से आपूर्ति कराएंगी. इसका चीन को छोड़कर बाकी एशियाई देशों को फायदा मिलेगा. हालांकि, इसके लिए देशों की आर्थिक बुनियाद मजबूत, बुनियादी ढांचा भरोसेमंद, पर्याप्त श्रम पूंजी और आपूर्ति सुरक्षा का जोखिम कम होना जरूरी होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका (US) और यूरोप (Europe) में स्‍थानीय स्‍तर पर उत्पादन को बढ़ावा देने से एशियाई उत्‍पादकों पर बुरा असर पड़ सकता है. मूडीज ने कहा कि ऐसे में ग्‍लोबल ट्रेड सिस्‍टम पहले से ज्‍यादा क्षेत्र केंद्रित हो जाएगा. एशिया, यूरोप और अमेरिका के लिए अलग रीजनल ट्रेड सिस्‍टम (RTS) बन जाएगा.

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भारत जैसे एशिया के विकासशील देशों को मिलेगा फायदा
मूडीज का कहना है कि उत्‍पादन के स्‍थानीयकरण (Localization) से हर क्षेत्र के पास रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए अपने खुद के आपूर्तिकर्ता होंगे. जनरल सिस्‍टम ऑफ प्रायॉरिटी (GSP) के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिकी बाजारों पर तरजीह पहुंच की वजह से इंडोनेशिया, कंबोडिया और भारत (India) जैसे एशिया के विकासशील देशों को फायदा मिलेगा. मूडीज का मानना है कि कोविड-19 के बाद की दुनिया में सरकारों और कंपनियां का मुख्य लक्ष्य सप्‍लाई चेन को मजबूत कर आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा.
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