लॉकडाउन में कोरोना वायरस से नहीं इस कारण ज्‍यादा लोगों की गई जान, जानें असली वजह

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री वीके सिंह ने संसद में बताया कि लॉकडाउन के दौरान कोरोना के बजाय किस कारण लोगों की ज्‍यादा मौत हुई.
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री वीके सिंह ने संसद में बताया कि लॉकडाउन के दौरान कोरोना के बजाय किस कारण लोगों की ज्‍यादा मौत हुई.

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह ने संसद को बताया कि मार्च से जून 2020 के दौरान देश के नेशनल हाइवे पर 81,385 सड़क दुर्घटनाएं (Road Accidents) हुईं. इन दुर्घटनाओं में 29,415 लोगों की मौत हुई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 6:56 AM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस (Coronavirus in India) की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से यातायात के सभी साधन बंद हो गए थे. सड़कों पर वाहनों की संख्या बहुत कम हो गई थी. इसके बाद भी मार्च से जून 2020 के दौरान देश के नेशनल हाइवे पर 81,385 सड़क दुर्घटनाएं (Road Accidents) हुईं. इन दुर्घटनाओं में 29,415 लोगों की मौत हुई. सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह ने संसद को बताया कि 23 मार्च से 1 मई के बीच नेशनल हाइवे पर दुर्घटनाओं से मरने वाले प्रवासी मजदूरों (Migrant Labor) की संख्‍या का अलग से डाटा तैयार नहीं किया गया है.

लाखों प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्य लौटे
लॉकडाउन के दौरान आर्थिक गतिविधियां, फैक्‍ट्रीज, इंडस्‍ट्रीज बंद हो गए थे. बड़े शहरों में मौजूद इन जगहों पर काम करने वाले लाखों-करोड़ों मजदूरों के सामने दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया था. बस और रेल यातायात (Indian Railways) बंद हो जाने के कारण लाखों प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने गृह राज्य या शहर जाने को मजबूर हो गए थे. श्रम मंत्रालय (Labor Ministry) के मुताबिक करीब 1.06 करोड़ प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के दौरान अपने गृह राज्य लौटे. इसमें वे प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं जो पैदल ही अपने गृह राज्य पहुंचे थे.

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प्रवासी मजदूरों के लिए की गई थी ये व्यवस्था


सोशल मीडिया और मीडिया में खबरें आने के बाद जागी सरकारों ने आनन-फानन प्रवासी मजदूरों के लिए कई व्यवस्थाओं व सुविधाओं का इंतजाम किया. प्रवासी मजदूरों के लिए खाना, पीने का पानी, जरूरी दवाइयों, जूते-चप्पल का इंतजाम किया गया. इसके अलावा प्रवासी मजदूरों के ठहरने और नजदीकी गंतव्य तक जाने के लिए परिवहन का भी इंतजाम किया गया. यहीं नहीं, भारतीय रेलवे ने 1 मई से राज्यों की मांग पर श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की व्यवस्था की. राज्यों ने प्रवासी मजदूरों के लिए बसों का इंतजाम भी किया.

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जून तक कोरोना से इतने मरीजों की मौत हुई
जनवरी 2020 में कोरोना का पहला मामला केरल में आते ही देश सहम सा गया था. सरकारें, विभाग और स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार अपनी तैयारियों को लेकर बैठकें कर रहा था. कोरोना से 30 जून तक करीब 17 हजार लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी. कुल 5.66 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके थे. मौजूदा आंकड़ों पर गौर करे तो 55 लाख से अधिक लोग अब तक इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं, जबकि 89 हजार से अधिक की मौत हो चुकी है.
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