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Bank FD और पोस्टल डिपॉजिट से ज्यादा रेगुलर इनकम, मूलधन भी बढ़ता है, जानिए क्या है SWP निवेश

म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं तो आपके लिए जरूरी खबर है.

ज्यादातर लोग फिक्स अमाउंट या मोटी रकम जमा करना चाहते हैं तो बैंक एफडी या पोस्टल डिपॉजिट का विकल्प चुनते हैं. इससे नियमित आय भी होती और पैसा सुरक्षित भी होता है. लेकिन इन पर मिलने वाली कम ब्याज दर से लोग दूसरे निवेश विकल्प भी देखते रहते हैं.

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    मुंबई. ज्यादातर लोग फिक्स अमाउंट या मोटी रकम जमा करना चाहते हैं तो बैंक एफडी या पोस्टल डिपॉजिट का विकल्प चुनते हैं. इससे नियमित आय भी होती और पैसा सुरक्षित भी होता है. इन पर मिलने वाली कम ब्याज दर से लोग दूसरे निवेश विकल्प भी देखते रहते हैं. कम ब्याज की वजह से एक्सपर्ट भी ऐसे ट्रेडिशनल विकल्पों की बजाय दूसरे ऑप्शन में निवेश की सलाह देते हैं. ऐसे निवेश विकल्प देख रहे लोगों के लिए म्यूचुअल फंड ( Mutual Fund) का सिस्टेमैटिक विद्ड्रॉल प्लान (SWP) भी एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है. यहां से आप नियमित आय भी प्राप्त कर सकते हैं और अपने मूलधन पर अतिरिक्त रिटर्न भी कमा सकते हैं.

    सिस्टेमैटिक विद्ड्रॉल प्लान (SWP) क्या है
    SWP भी SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) की तरह एक म्यूचुअल फंड निवेश योजना है. इसमें निवेशक को कितने समय में कितना पैसा निकालना है यह विकल्प चुनने का मौका मिलता हैं. यानि आप एक तय राशि वापस पाते हैं. अपनी जरूरत के हिसाब से आप रोजाना, हर हफ्ते, मंथली, तिमाही, 6 महीने पर या सालाना आधार पर राशि निकाल सकते हैं.

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    सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर अमित पटेल कहते हैं, “कोई भी म्यूचुअल फंड निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं देता है लेकिन सही स्कीम चुनकर आप बैंक एफडी से तो ज्यादा रिटर्न कमा ही सकते हैं. SWP के लिए आप इक्विटी, डेट या हाइब्रिड जैसी किसी भी प्रकार की म्यूचुअल फंड स्कीम चुन सकते हैं.”

    SWP में एग्जिट लोड
    आप तय अवधि से पहले पैसा निकालते हैं तो एग्जिट लोड लगता है. उदाहरण के लिए, यदि आपके निवेश के 6वें महीने से प्रति माह 10,000 रुपये का SWP है, तो हर महीने SWP किस्त में से 1 फीसदी या 100 रुपये काटा जाएगा.

    टैक्स देनदारी
    आप किस प्रकार के फंड से निकासी कर रहे हैं और आपके फंड की अवधि कितनी है उस हिसाब से SWP में टैक्स लागू होता है. इक्विटी फंड के मामले में, खरीद के 1 साल के भीतर पैसे निकालने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (STCG) के तहत 15% टैक्स लगेगा. 1 साल के बाद निकलने पर, 1 लाख रुपये से अधिक मुनाफे पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) के तहत 10% टैक्स लगेगा. यदि आपने डेट फंड में पैसे निवेश किया है तो 3 साल में निकासी पर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स चुकाना होगा और 3 साल बाद इंडेक्सेशन का लाभ मिलने के बाद 20% टैक्स लागू होगा.

    SWP किसके लिए है सही?
    यदि आप सेकेंड्री इनकम प्राप्त करना चाहते हैं, अपने मूलधन में बढ़ोतरी करना चाहते हैं, पेंशन प्लान बनाना चाहते हैं और जो लोग ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में आते हैं उनके लिए ये अच्छा विकल्प है. पटेल के मुताबिक, “SWP के जरिए आप निवेश पर हुए केवल कैपिटल गेन वाले हिस्से को निकाल सकते हैं.
    दूसरे इन्वेस्टमेंट के मुकाबले इसमें प्रोफिट वाले हिस्से पर टैक्स नहीं लगता इसलिए टैक्स के नजरिए से ये विकल्प अच्छा है. आय प्राप्त करने के लिए मंथली ऑप्शन ज्यादा लोकप्रिय है.” म्यूचुअल फंड्स के डिविडंड प्लान के मुकाबले SWP बेहतर है क्योंकि डिविडंड पर 10 फीसदी टीडीएस कटता है और निवेशक को मिलने वाली डिविडंड अमाउंट भी टैक्सेबल गिनी जाती है.

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