आर्थिक मंदी की आहट की वजह से दुनियाभर में मची खलबली, भारत पर होगा ये असर

आर्थिक मंदी की आहट की वजह से दुनियाभर में मची खलबली, भारत पर होगा ये असर
इस वजह से अगले 9 महीनों में आ सकती है मंदी: मॉर्गन स्टेनली

दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (Economy) के बीच बढ़ रहे व्यापारिक तनाव से वैश्विक मंदी (Global Economic Slowdown) की संभावनाएं बढ़ रही हैं. अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वार (Trade war) की वजह से दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाएं मंदी के संकेत दे रही हैं. जानिए इससे भारत पर क्या होगा असर.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 16, 2019, 10:22 AM IST
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दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (Economy) के बीच बढ़ रहे व्यापारिक तनाव से वैश्विक मंदी (Global Economic Slowdown) की संभावनाएं बढ़ रही हैं. अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वार (Trade war) की वजह से दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाएं मंदी के संकेत दे रही हैं. अमेरिका की इंवेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने एक बार फिर से आर्थिक मंदी के संकेत दिए हैं. मार्गन स्टेनली की मानें तो यह मंदी अगले 9 महीनों में आ जाएगी. लेकिन राहत की बात ये है कि भारत इस मंदी की चपेट से थोड़ा दूर रहेगा. लेकिन, सरकार को चौकन्ना रहना होगा और इसकी अनदेखी किए बगैर जरूरी कदम उठाने होंगे. कुछ ही दिन पहले RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी मंदी की चिंता को दूर करते हुए कहा था कि नीतिगत तौर पर भारत में सबकुछ सही दिशा में चल रहा है.

मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि अगर अमेरिका के जरिए ट्रेड वॉर फिर से भड़कता है और वह चीन से आने वाले सभी सामानों पर ड्यूटी बढ़ाकर 25 फीसदी कर देता है, तो दुनिया में तीन तिमाही में मंदी आ जाएगी. हालांकि भारत के सभी सेक्टर्स में मंदी का असर नहीं दिख रहा है लेकिन ऑटे सेक्टर मंदी की चपेट आता दिख रहा है है. लेकिन सरकार ऑटो सेक्टर (Auto Sector) के रिवाइवल के लिए बड़े पैकेज का ऐलान कर सकती है. डेडिकेटेड विंडो (Dedicated Window) के तहत नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) ऑटो सेक्टर को ज्यादा कर्ज दे सकती है.

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इकॉनोमिक स्लोडाउन की वजह से दुनिया के सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में कर रहे हैं कटौती



इस मंदी को देखते हुए दुनिया के तमाम सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में कटौती कर रहे हैं. भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले दिनों रेपो रेट में 0.35 फीसदी की कटौती की थी. न्यूजीलैंड ने 50 आधार अंकों और थाईलैंड ने भी 25 आधार अंकों की कटौती की है.

क्या हैं ग्लोबल स्लोडाउन की वजह?
अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर चल रहा है. इसके साथ ही दोनों देश के बीच चल रही बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि चीन और अमेरिका के बीच होने वाले ट्रेड टॉक को कैंसिल किया जा सकता है. जानकारों का कहना है कि 2020 के अंत में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव तक ट्रंप का यह रवैया रह सकता है और तब तक ट्रेड वॉर का खतरा बना रहेगा. पिछले दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि वह 1 सितंबर से चीन से आने वाले 300 बिलियन डॉलर के सामान पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाएंगे. उन्होंने कहा कि यह टैरिफ 250 बिलियन डॉलर के सामान पर लगने वाले 25 फीसदी के टैरिफ से अलग होगा.

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अगर डोनाल्ड ट्रंप ने उठाया ये कदम तो जल्द मंदी आने के आसार
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि अगर 300 बिलियन डॉलर पर टैरिफ बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाता है तो दुनिया भर में तीन तिमाही में मंदी आ जाएगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ट्रंप आने वाले दिनों में ऐसा कर सकते हैं. उधर, IMF ने चीन की विकास दर को घटाकर 6.2 फीसदी कर दिया है. अमेरिका के इस कदम से चीन का ग्रोथ रेट तेजी से गिर रही है. 11 साल बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स (2.25 फीसदी से 2 फीसदी) की कटौती की है. राष्ट्रपति ट्रंप लगातार रेट कट का दबाव बना रहे हैं. न्यूजीलैंड ने 50 बेसिस प्वाइंट्स की और थाईलैंड ने 25 बेसिस प्वाइंट्स और भारत ने 35 बेसिस प्लाइंट की कटौती की है.
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