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NCR में अटके हैं 2 लाख से ज्यादा लोगों के मकान, ये सरकारी कंपनी कर सकती है अब मदद: रिपोर्ट

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Updated: April 10, 2019, 1:04 PM IST
NCR में अटके हैं 2 लाख से ज्यादा लोगों के मकान, ये सरकारी कंपनी कर सकती है अब मदद: रिपोर्ट
NCR में 2 लाख 10 हजार 200 लोगों के घर अभी तक अधर में लटके हैं.

ऐनारॉक प्रॉपर्टीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश के टॉप 7 शहरों में 2013 या उसके पहले लॉन्च हुई 5 लाख 61 हजार 100 रेजिडेंशल यूनिट अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं. इनकी कुल कीमत 4.51 लाख करोड़ है. जानिए रिपोर्ट में और क्या है खास...

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  • Last Updated: April 10, 2019, 1:04 PM IST
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देशभर में करीब 5.6 लाख हाउसिंग यूनिट लॉन्च होने के पांच साल या इससे ज्यादा समय बाद भी तैयार नहीं हो सकी हैं, इनकी कुल कीमत करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये है. इनमें 38% यूनिट सिर्फ एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में हैं, जिनकी वैल्यू 1.31 लाख करोड़ है. ये सारा खुलासा लटके पड़े हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स पर ऐनारॉक प्रॉपर्टीज की ओर से जारी रिपोर्ट में हुआ है. सरकार की ओर से उठाए गए कदम जैसे रेरा और अदालती सख्ती के बावजूद लटके पड़े हाउसिंग प्रॉजेक्ट को पूरा कराने में अभी भी बहुत ज्यादा तेजी नहीं आ पाई है.

अब आगे क्या-
>> 
रिपोर्ट में कहा गया है कि एनसीआर में प्रॉजेक्ट पूरा कराने की दिशा में सरकारी कंपनी एनबीसीसी का आगे आना एक बड़ी पहल है, जिसका असर आने वाले समय में दिख सकता है.
>> अगर एनबीसीसी 50 फीसदी प्रॉजेक्ट्स भी हाथ में ले ले तो बड़े पैमाने पर एलआईजी और ईडब्ल्यूएस प्रॉजेक्ट्स पूरे होंगे और रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

>> बैंकों की ओर से फंड जारी करने में हिचकिचाहट दूर होगी.
>> आईबीसी कोड में संशोधन कर सरकार ने जो पहल की थी, उसके असर भी दिख सकते हैं.
>> कम से कम इससे बायर्स के मन में बना डर थोड़ा कम हुआ है.
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>> अब अगर बिल्डर खुद को दिवालिया घोषित कर देता है तो सरकार दखल देगी और ग्राहकों के हितों की रक्षा करेगी. (ये भी पढ़ें-10 हजार रुपए में बुक करें अपने सपनों का घर, आज से करें अप्लाई)

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NCR और मुंबई में अटके हैं सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट
>> इनमें सबसे ज्यादा 2 लाख 10 हजार 200 यूनिट एनसीआर में हैं.
>> मुंबई मेट्रो रीजन में 1.92 यूनिट पर काम पूरा नहीं हुआ हैं.
>> इस तरह इन दो शहरों में ही ही करीब 72%  प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए है.
>> इनकी कीमत 3.49 लाख करोड़ रुपये है.
>> वहीं, ग्रेटर नोएडा में 1.04 लाख यूनिट अभी लटकी हुई है. इनकी वैल्यू करीब 45,039 करोड़ रुपये बैठती है.
>> इसी तरह नोएडा में 44,082 घरों पर अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया है. इनकी कीमत 38,511 करोड़ रुपये है.
>> गाजियाबाद में 24,728 यूनिट अटकी है. इनकी कीमत 9,664 करोड़ रुपये है.
>> इसके अलावा गुरुग्राम में 23,287 यूनिट अटकी है और इनकी वैल्यू 25,086 करोड़ रुपये है
>> भिवाड़ी में 5,477 यूनिट अटकी है. इनकी कीमत 1,415 करोड़ रुपये है.
>> इसके अलावा दिल्ली में भी 4,102 यूनिट अधर में लटकी पड़ी  है. इनकी कीमत 9,930 करोड़ रुपये है. (ये भी पढ़ें-
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क्या कहती हैं रिपोर्ट- ऐनारॉक प्रॉपर्टीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक  रेरा और अदालत की ओर से उठाए कदमों के बावजूद रियल एस्टेट डेवल्पर्स प्रॉजेक्ट पूरे करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. इसके पीछे बड़ी वजह कहीं तो फंड डाइवर्जन करने की कोशिश है तो कई जगह पर उनके पास पैसा नहीं है.


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>> देश के टॉप 7 शहरों में 2013 या उसके पहले लॉन्च हुई 5 लाख 61 हजार 100 रेजिडेंशल यूनिट अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं या ग्राहक पजेशन से वंचित हैं. इनकी कुल कीमत 4.51 लाख करोड़ है.

क्यों अटके हैं प्रोजेक्ट-
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रोजेक्ट लटकने का सबसे कारण डिवेलपर्स में इच्छाशक्ति का अभाव है, क्योंकि इनमें से ज्यादातर की कोशिश फंड डायवर्ट करने की हो सकती है.

>>कई व्यावहारिक वजहें भी हैं. जैसे बिल्डर्स के पास अब पैसा नहीं बचा है.

>> कई जगह बायर्स ने भी लंबे इंतजार के बाद बिल्डर्स को पैसा देना बंद कर दिया है. ऐसे में बिल्डर्स की  लागत में भी इजाफा हो रहा है, जिससे क्रेडिट का दबाव और बढ़ जाता है.

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First published: April 10, 2019, 11:06 AM IST
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