...अचानक इतनी क्यों बढ़ गई इस मुर्गी की डिमांड, मुंह बोली कीमत पर नहीं मिल रही

बाज़ार में नहीं मिल रही ये मुर्गी
बाज़ार में नहीं मिल रही ये मुर्गी

आखिर ऐसा क्या हुआ जो कोरोना-लॉकडाउन से पहले 215 और 220 रुपये की एक बिकने वाली मुर्गी आज मुंह बोली कीमत पर भी बाज़ार में नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 15, 2020, 8:36 AM IST
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नई दिल्ली. देश में अंडे के दाम बढ़ने लगे हैं. अक्टूबर की शुरुआत से ही अंडा 7 रुपये का बिक रहा है. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अंडे के दाम बढ़ने के साथ ही मुर्गी भी बेशकीमती हो गई है. कोरोना-लॉकडाउन से पहले 215 और 220 रुपये की एक बिकने वाली मुर्गी आज मुंह बोली कीमत पर भी बाज़ार में नहीं है. यह मुर्गी बेचने वाली दो कंपनियों के पास भी मौजूद नहीं हैं. जिसके चलते यह आशंका डराने लगी है कि कड़ाके की सर्दी में अंडा और महंगा हो सकता है.

बाज़ार में नहीं मिल रही है बीवी 300 और बोवोन मुर्गी
पोल्ट्री फार्म के मालिक अनिल शाक्य की मानें तो कोरोना और लॉकडाउन से पहले तक बीवी 300 और बोवोन मुर्गी बाज़ार में आराम से मिल रही थी. इस मुर्गी का बच्चा (चूजा) भी 42 रुपये तक का मिल रहा था. वहीं 4 से 5 महीने की तैयार मुर्गी 215 और 220 रुपये की मिल रही थी. लेकिन अब कोरोना और लॉकडाउन के चलते बाज़ार ने ऐसी पलटी मारी की बीवी 300 और बोवोन मुर्गी एक-दो हज़ार तो छोड़ों मुंह बोले दाम पर 100-200 भी नहीं मिल रही हैं. अंडा देने वाली मुर्गियों की यह वो दो नस्ल हैं जो पोल्ट्री फार्म में सबसे ज़्यादा पाली जाती हैं.

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इसलिए बाज़ार में कम हो गई अंडा देने वाली यह मुर्गियां


उत्तर प्रदेश के पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अली ने न्यूज18 से बात करते हुए बताया, “इस साल फरवरी-मार्च से मुर्गियों पर भी कोरोना की आफत गिरनी शुरु हो गई थी. हालांकि किसी भी एक्सपर्ट ने यह नहीं बताया था कि मुर्गियों को भी कोरोना हो सकता है या फिर मुर्गियां और अंडे खाने से कोरोना हो सकता है. बावजूद इसके सोशल मीडिया पर मैसेजों की ऐसी बाढ़ आई की पोल्ट्री कारोबार तबाह हो गया. लोगों ने मुर्गें और अंडे खाने से मुंह फेर लिया. नतीजा यह हुआ कि लोगों ने मुर्गियां और उनके बच्चों को जिंदा दफनाना शुरु कर दिया. अंडे भी फेंक दिए. कुछ जगहों पर मुर्गियां फ्री में बांट दी या औने-पौने दाम में बेच दी गईं.”

इसलिए बढ़ गई मुर्गी की डिमांड
नई दिल्ली. देश में अंडे के दाम बढ़ने लगे हैं. अक्टूबर की शुरुआत से ही अंडा 7 रुपये का बिक रहा है. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अंडे के दाम बढ़ने के साथ ही मुर्गी भी बेशकीमती हो गई है. कोरोना-लॉकडाउन से पहले 215 और 220 रुपये की एक बिकने वाली मुर्गी आज मुंह बोली कीमत पर भी बाज़ार में नहीं है. यह मुर्गी बेचने वाली दो कंपनियों के पास भी मौजूद नहीं हैं. जिसके चलते यह आशंका डराने लगी है कि कड़ाके की सर्दी में अंडा और महंगा हो सकता है.

बाज़ार में नहीं मिल रही है बीवी 300 और बोवोन मुर्गी
पोल्ट्री फार्म के मालिक अनिल शाक्य की मानें तो कोरोना और लॉकडाउन से पहले तक बीवी 300 और बोवोन मुर्गी बाज़ार में आराम से मिल रही थी. इस मुर्गी का बच्चा (चूजा) भी 42 रुपये तक का मिल रहा था. वहीं 4 से 5 महीने की तैयार मुर्गी 215 और 220 रुपये की मिल रही थी. लेकिन अब कोरोना और लॉकडाउन के चलते बाज़ार ने ऐसी पलटी मारी की बीवी 300 और बोवोन मुर्गी एक-दो हज़ार तो छोड़ों मुंह बोले दाम पर 100-200 भी नहीं मिल रही हैं. अंडा देने वाली मुर्गियों की यह वो दो नस्ल हैं जो पोल्ट्री फार्म में सबसे ज़्यादा पाली जाती हैं.

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इसलिए बाज़ार में कम हो गई अंडा देने वाली यह मुर्गियां
उत्तर प्रदेश के पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अली ने न्यूज18 से बात करते हुए बताया, “इस साल फरवरी-मार्च से मुर्गियों पर भी कोरोना की आफत गिरनी शुरु हो गई थी. हालांकि किसी भी एक्सपर्ट ने यह नहीं बताया था कि मुर्गियों को भी कोरोना हो सकता है या फिर मुर्गियां और अंडे खाने से कोरोना हो सकता है. बावजूद इसके सोशल मीडिया पर मैसेजों की ऐसी बाढ़ आई की पोल्ट्री कारोबार तबाह हो गया. लोगों ने मुर्गें और अंडे खाने से मुंह फेर लिया. नतीजा यह हुआ कि लोगों ने मुर्गियां और उनके बच्चों को जिंदा दफनाना शुरु कर दिया. अंडे भी फेंक दिए. कुछ जगहों पर मुर्गियां फ्री में बांट दी या औने-पौने दाम में बेच दी गईं.”
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