• Home
  • »
  • News
  • »
  • business
  • »
  • छोटे कारोबारियों को बांटे गए लोन में हुई 40 फीसदी बढ़ोतरी, MSME को मिला 9.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज

छोटे कारोबारियों को बांटे गए लोन में हुई 40 फीसदी बढ़ोतरी, MSME को मिला 9.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज

MSME सेक्‍टर को बांटे गए लोन में बढ़ोतरी से छोटे उद्योगों की धारणा भी बदली है.

MSME सेक्‍टर को बांटे गए लोन में बढ़ोतरी से छोटे उद्योगों की धारणा भी बदली है.

केंद्र सरकार की क्रेडिट गारंटी योजना (Credit Guarantee Scheme) से वित्‍त वर्ष 2020-21 के दौरान सूक्ष्‍म, लघु और मझोले उद्यमियों (MSMEs) को कामकाज जारी रखने के लिए कर्ज बांटे गए. इससे एमएसएमई का कुल लोन बुक 20.21 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है.

  • Share this:

    नई दिल्‍ली. कोरोना संकट की सबसे बुरी मार सूक्ष्म, लघु व मझोले उद्यमों (MSMEs) पर पड़ी है. केंद्र सरकार ने इस सेक्‍टर को संकट से उबारने के लिए वित्‍त वर्ष 2020-21 के दौरान 9.5 लाख करोड़ रुपये के कर्ज दिए, जो इससे पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी ज्यादा है. इससे पहले वित्‍त वर्ष 2019-20 में एमएसएमई को 6.8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज दिया गया था. सिडबी और ट्रांसयूनियन सिबिल की एमएसएमई पल्स रिपोर्ट (MSME Pulse) में कहा गया है कि इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्‍कीम (ECLGS) के कारण एमएसएमई को दिए कर्ज में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

    ईसीएलजीएस के कारण कर्ज की मांग में हुआ सुधार
    रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कॉमर्शियल सेक्‍टर को मार्च 2021 तक दिया गया कुल कर्ज सालाना आधार पर 0.6 फीसदी बढ़कर 74.36 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. इसमें एमएसएमई के लोन बुक की हिस्सेदारी 20.21 लाख करोड़ रुपये की रही, जो सालाना आधार पर 6.6 फीसदी ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक, महामारी की पहली और दूसरी लहर का असर कम होने से लॉकडाउन समेत तमाम पाबंदियों में ढील मिलने के बाद कर्ज की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पहली लहर के दौरान कॉमर्शियल लोन की मांग में 76 फीसदी गिरावट रही थी, लेकिन ईसीएलजीएस के बाद मांग सुधरकर कोविड-19 से पहले के स्तर पर पहुंच गई.

    ये भी पढ़ें- बैंक डूबा तो 90 दिन के भीतर ग्रा‍हकों को मिलेगी ₹5 लाख तक जमा रकम, कैबिनेट की DICGC Act में संशोधन को मंजूरी

    छोटे उद्योगों की धारणा में भी हुआ है बड़ा सुधार
    सिडबी के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक शिवसुब्रमण्यम रमन ने कहा कि ईसीएलजीएस के कारण्‍सा एमएसएमई के कर्ज में 40 फीसदी बढ़ोतरी के साथ ही छोटे उद्योगों के बीच कारोबार की धारणा में भी सुधार हुआ है. उन्‍होंने कहा कि कर्ज के आंकड़े बताते हैं कि बैंकों की नए ग्राहकों को लोन देने की दर कोरोना से पहले के स्तर पर पहुंच गई है. उन्होंने उम्‍मीद जताई कि हेल्थकेयर, ट्रैवेल और पर्यटन उद्योग को दी गई मदद से एमएसएमई क्षेत्र में कर्ज की मांग में इजाफा होगा.

    ये भी पढ़ें- NPS सब्‍सक्राइबर्स के लिए बड़ी खबर! अब एन्‍युटी सरेंडर के मामले PFRDA के बजाय निपटाएंगी बीमा कंपनियां

    नई कंपनियों को लोन देने से बच रहे कर्जदाता
    रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा माहौल में कर्जदाता ज्यादा जोखिम लेने से बच रहे हैं. इसलिए नई कंपनियों को कर्ज देने से परहेज किया जा रहा है. इस कारण सिबिल रैंक (CMR) 8-10 श्रेणियों में नई एमएसएमई की संख्या घटी है. वहीं, सीएमआर 6-7 श्रेणियों में नई संस्थाओं की बढ़ती संख्‍या से इस कमी की भरपाई हुई है. बता दें कि सिबिल रैंक एमएसएमई की आर्थिक स्थिति और भुगतान क्षमता को दर्शाती है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज