MSME सेक्टर पर कोरोना की मार, एसोचैम ने की सरकार से राहत पैकेज की मांग

एमएसएमई सेक्टर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एमएसएमई सेक्टर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इंडस्ट्री बॉडी एसोचैम (Assocham) ने सरकार से कोरोना से प्रभावित एमएसएमई (MSME) सेक्टर के लिए सुगठित राहत पैकेज की मांग की है.

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लखनऊ. इंडस्ट्री बॉडी एसोचैम (Assocham) ने सरकार से कोरोना महामारी के मद्देनजर लागू पाबंदियों से सबसे ज्यादा प्रभावित कुटीर, लघु एवं मंझोले उद्योगों (MSME) के लिए सुगठित राहत पैकेज की मांग करते हुए कहा है कि छोटे और रेहड़ी, पटरी दुकानदारों को दिए जाने वाले वित्तीय लाभ और रियायतों का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए.

एसोचैम के अध्यक्ष और 'ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड के एमडी विनीत अग्रवाल ने कहा कि महामारी के कारण उद्योगों, खासकर एमएसएमई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. ऐसे में एमएसएमई को राहत पैकेज दिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ''एमएसएमई को राहत पैकेज देते हुए इस बात का खास ध्यान रखना होगा कि इसका फायदा एमएसएमई के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचे. एसोचैम का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों को एमएसएमई की मदद के लिए एक साथ आगे आना चाहिए ताकि उद्योगों के इस समूह को केन्द्रित, लक्षित और सही तरीके की राहत मिल सके.''

एमएसएमई के एनपीए का रीक्लासिफेकेशन करने की मांग
अग्रवाल ने कहा ''अगर सरकार बैंकों को निर्देश देकर एमएसएमई की वर्किंग कैपिटल की सीमा को बिना जमानत के 20 फीसदी तक बढ़ावा दे, एमएसएमई के एनपीए का रीक्लासिफेकेशन करे और छोटे तथा पटरी दुकानदारों को दिए जाने वाले वित्तीय लाभों का दायरा बढ़ाकर उसे अधिक तर्कसंगत और न्याय संगत बनाये तो इससे बहुत राहत मिलेगी.''

हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म क्षेत्रों के सामने बड़ी चुनौती

एसोचैम अध्यक्ष ने कहा, ''जैसा कि हमने पहली लहर में भी देखा था कि बड़ी कंपनियां लॉकडाउन के झटके से अपेक्षाकृत तेजी से उबर गई थीं लेकिन एमएसएमई क्षेत्र को बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा था. उनके प्रोडक्ट्स की न सिर्फ मांग घटी बल्कि उन्हें समय से भुगतान भी नहीं हो पाया था. सेवा क्षेत्र से जुड़ी एमएसएमई जैसे कि हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म क्षेत्रों पर गौर करें तो उनके सामने चुनौतियां अपेक्षाकृत ज्यादा बड़ी हो गई हैं. आने वाले वक्त में उन एमएसएमई के सामने और भी दुश्वारियां आएंगी जो अभी पहली लहर की मार से ही नहीं उबर पाई हैं.''



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अग्रवाल ने बताया कि पिछले दिनों आरबीआई के गवर्नर के साथ एसोचैम और अन्य  इंडस्ट्री बॉडी की बैठक हुई थी, जिसमें उन्होंने खास तौर पर एमएसएमई को लेकर कुछ सुझाव दिए थे. पिछले साल महामारी के दौरान रिजर्व बैंक ने स्थितियों को पहले से ही भांपकर कुछ कदम उठाए थे जिसकी वजह से बहुत बड़े पैमाने पर कारोबार और उद्योगों को बचाने में मदद मिली थी. यह कवायद आगे भी जारी रहनी चाहिए.

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अग्रवाल ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर के बाद पैदा हुए हालात पहली लहर के मुकाबले कुछ अलग हैं. पिछली बार लॉकडाउन में अचानक सब कुछ बंद कर दिया गया था. मगर इस बार 'माइक्रो कंटेनमेंट' रणनीति अपनायी गई है. इस दफा धीरे-धीरे करके हर जगह थोड़ा-थोड़ा लॉकडाउन शुरू किया गया है जिससे और भी ज्यादा अनिश्चितता पैदा हुई है. मगर सकारात्मक पहलू यह है कि इस बार सब कुछ एक साथ बंद नहीं है, इसलिए आपूर्ति श्रंखला पर उतना बुरा असर नहीं पड़ा है.

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