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मुकेश अंबानी ने की अनिल अंबानी की मदद, अनिल ने मुकेश-नीता को कहा थैंक्स

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी. (फाइल फोटो)
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी. (फाइल फोटो)

आरकॉम के एक प्रवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करते हुए एरिक्सन के 550 करोड़ का भुगतान पूरा हो गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 19, 2019, 7:49 AM IST
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रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने छोटे भाई अनिल अंबानी की कर्जे में डूबी कंपनी रिलायंस कम्‍युनिकेशन लिमिटेड(आरकॉम) के कर्ज का भुगतान किया है. इसके बाद अनिल ने बड़े भाई मुकेश और भाभी नीता अंबानी का बकाया चुकाने में मदद करने पर आभार जताया है. बड़े भाई मुकेश अंबानी की मदद से अनिल ने स्वीडन की कंपनी एरिक्सन के 458.77 करोड़ रुपये चुकाए.

आरकॉम के प्रवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करते हुए एरिक्सन के 550 करोड़ का भुगतान पूरा हो गया है. इस भुगतान के साथ ही आरकॉम की एरिक्‍सन के साथ चल रही 18 महीने पुरानी कानूनी लड़ाई भी समाप्‍त हो गई.

अनिल अंबानी ने एक बयान जारी कर कहा, "संकट की इस घड़ी में मेरे साथ खड़े रहने के लिए मैं अपने बड़े भाई मुकेश और भाभी नीता को धन्यवाद कहता हूं. ऐसे मौके पर मदद करके उन्होंने यह दिखाया कि अपने पारिवारिक मूल्यों के प्रति सच्चाई के साथ खड़े रहना कितना जरूरी है. मैं और मेरा परिवार उनके इस कदम के काफी आभारी हैं और इसने हम पर गहरी छाप छोड़ी है.'



आरकॉम फरवरी में पहले ही सुप्रीम कोर्ट में 118 करोड़ रुपये जमा कर चुका था. स्वीडिश फर्म ने आरकॉम के नेटवर्क का प्रबंधन और संचालन करने के लिए 2014 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और पिछले साल बकाया राशि को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
यह दूसरा मौका है जब मुकेश अंबानी ने अपने छोटे भाई की मदद की है. साल 2018 में मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो इंफोकॉम ने आरकॉम की वायरलैस सेवा को 3000 करोड़ रुपये में खरीदा था. बाजार में प्राइस वॉर के चलते आरकॉम को पैसों की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

आरकॉम एक समय देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी थी लेकिन गिरते राजस्‍व, बढ़ते घाटे और 46 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के चलते साल 2017 के आखिरी दिनों में उसे अपना वायरलैस का कारोबार बंद करना पड़ा.

आरकॉम और एरिक्‍सन के बीच 2017 में कानूनी जंग शुरू हुई थी. एरिक्‍सन ने बैंकरप्‍सी कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया था कि 2013 में आरकॉम के नेटवर्क की सारसंभाल को लेकर हुए सात साल के सौदे के तहत उसे 1500 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया.

इसके बाद मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल से नेशनल कंपनी लॉ अपीलैट ट्रिब्‍यूनल में चला गया. यहां पर दोनों कंपनियों के बीच 30 सितंबर 2018 तक 550 करोड़ रुपये का भुगतान करने की सहमति बनी. 30 सितम्‍बर तक आरकॉम की ओर से भुगतान नहीं मिलने पर एरिक्‍सन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डाली. सुप्रीम कोर्ट ने आरकॉम को 15 दिसंबर 2018 तक भुगतान करने को कहा. इस तारीख तक भी भुगतान नहीं हो पाया.

जब 550 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया तो एरिक्‍सन ने आरकॉम के चेयरमैन अनिल अंबानी और उनकी दो यूनिट के खिलाफ अवमानना की याचिकाएं दाखिल कीं. फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को फटकार लगाई और कहा कि 19 मार्च तक ब्‍याज सहित भुगतान किया जाए.

(डिस्क्लेमर: न्यूज़18 हिंदी रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का हिस्सा है. नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है.)
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