ग्रेटर नोएडा से महज 15 घंटे में देश के किसी भी हिस्से में पहुंच जाएगा सामान, जानिए कैसे

प्रतीकात्मक तस्वीर

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ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी दो परियोजनाओं मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (Transport Hub) और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब (Logistics Hub) पर तेजी से काम कर रहा है.

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नोएडा. ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) में शुरू होने वाली दो बड़ी परियोजनाएं कारोबार की रफ्तार को बदलकर रख देंगी. सिर्फ 15 घंटे में ग्रेटर नोएडा से देश के किसी भी हिस्से में सामान पहुंच जाएगा. इतना ही नहीं दूसरे शहरों के मुकाबले सामान भेजने की लागत भी कम आएगी. और यह सब मुमकिन होगा मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (Transport Hub) और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब (Logistics Hub) से. ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी दोनों ही परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है. अथॉरिटी का मानना है कि यह दो परियोजनाएं बड़ी-बड़ी कंपनियों को ग्रेटर नोएडा आने पर मजबूर कर देंगी और नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी (Yamuna Expressway) के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को भी इसका फायदा मिलेगा.

पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है लॉजिस्टिक हब
गौरतलब रहे मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब पीएम नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है. इस प्रोजेक्ट को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है. सीईओ ग्रेटर नोएडा नरेन्द्र भूषण के मुताबिक मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब बनने के बाद वेयर हाउसिंग का पूरा सिस्टम विकसित किया जाएगा. वेयर हाउसिंग में 1500 से 2000 करोड़ रुपये का निवेश ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी करेगी. बाकी का पैसा सरकार लगाएगी.

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सीईओ का कहना है कि ग्रेटर नोएडा शहर की कनेक्टिविटी देश के दूसरे शहरों से कहीं बेहतर है. यहां पर दुबई और सिंगापुर जैसे पोर्ट की तरह इनलैंड कंटेनर डिपो भी बनाया जाएगा. जिसके जरिए कोई भी सामान भारत के किसी भी हिस्से में सिर्फ 15 घंटे में पहुंच जाएगा. ऐसा होने के बाद ट्रांसपोर्ट पर लागत भी कम आएगी.



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ऐसा होगा मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब
अथॉरिटी के सीईओ के मुताबिक मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब बन जाने से ग्रेटर नोएडा में कंपनियों की बाढ़ आ जाएगी. ट्रांसपोर्ट हब जिले में पहले से मौजूद बोड़ाकी रेलवे स्टेशन पर बनेगा. इसके साथ ही दुबई और सिंगापुर जैसे पोर्ट की तरह इनलैंड कंटेनर डिपो बनाया जाएगा. इसी स्टेशन के दूसरे तरफ इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) का निर्माण भी किया जाएगा.

साथ में एक मेट्रो स्टेशन भी बनाया जाएगा. इसमें भी 1500 से 2000 करोड़ का निवेश अथॉरिटी की तरफ से किया जाएगा. बाकी निवेश भारत सरकार करेगी. वहीं 12 हजार करोड़ का निवेश कुछ समय बीत जाने के बाद प्राइवेट सेक्टर करेगा. इन दो प्रोजेक्टों से लगभग एक लाख लोगों को रोजगार मिलेगा.
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