इधर आपने कार्ड स्वाइप किया उधर गायब हुई आपकी गाढ़ी कमाई

मुंबई में एक ऐसे गिरोह के पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है जो बैंकों द्वारा दी जाने वाली कार्ड स्वाइप मशीनों से घर पर बैठकर तसल्ली से कार्ड स्वाइप करते हुए बैंक खातों से रकम उड़ा लेते थे. इस गिरोह के तार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जुड़े होने का शक है.

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: June 22, 2018, 7:48 PM IST
Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: June 22, 2018, 7:48 PM IST
अगली बार जब आप किसी होटल या रेस्तरां या शॉपिंग के बाद किसी दुकान में अपना कार्ड स्वाइप करते हुए पेमेंट करें तो सावधान रहें क्योंकि अगर ज़ुबेर, हसन, सुबोध, नईम या अबु जैसे कुछ लोगों की नज़र आप पर है तो आपको बड़ा झटका लग सकता है. इन पांच लोगों ने पिछले पांच सालों में 40 करोड़ रुपये तक की ठगी को अंजाम दिया है, वह भी अनोखी तरकीब से.

क्या बैंकों में आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित है? बैंकों को आप जो अपनी जानकारियां देते हैं, क्या बैंक वो संभाल कर रख पा रहे हैं? यह कहानी ऐसे कई सवाल खड़े करते हुए आपको डरा भी सकती है और सतर्क रहने की हिदायत भी दे सकती है. इस कहानी की जड़ें तलाशी जा रही हैं लेकिन 2013 में मुंबई में इन पांचों का याराना एक गिरोह में तब्दील हुआ और ज़ुबेर, हसन, सुबोध, नईम और अबु ने ठगी का कारोबार शुरू किया. इनमें से एक मूलत: बेंगलूरु का था और वह कंप्यूटर और साइबर मामलों के बारे में अच्छी जानकारी रखता था. यही इस गैंग का मास्टरमाइंड बना और इसी ने बाकी दोस्तों को तरकीबें सिखाईं.

इन पांचों के दो-तीन साथी विदेशों में थे और वहां फ्रॉड की नयी तकनीकें सीख चुके थे. इनके साथ बातचीत के बाद मिलकर ठगी करने की योजना बनी. अमेरिका जैसी जगह उनके लिए नयी होने और वहां कानून सख्त होने के कारण विदेशों में बैठे इन पांचों के दोस्तों ने भारत में फ्रॉड करने की योजना बनाई. विदेशी दोस्तों का काम यह था कि वो अंतर्राष्ट्रीय बैंकों में अकाउंट रखने वाले विदेशी ग्राहकों के डेबिट और क्रेडिट कार्डों के बारे में जानकारी देंगे और यहां ये पांचों इनके ज़रिये ठगी करेंगे.

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इस पूरी साज़िश में प्लस पॉइंट या पकड़े न जाने की तरकीब यही थी कि चूंकि जिनके साथ भारत में धोखा किया जाएगा, वो भारत में होंगे ही नहीं इसलिए न तो वो ट्रैक कर पाएंगे और न ही कोई बड़ी कार्यवाही होगी. अब साज़िश तैयार थी और इसे अमल में लाने के लिए ये पांचों देश के उन शहरों में गए जहां विदेशी पर्यटकों की संख्या अच्छी रहती है. अपने नेटवर्क की मदद से इन शहरों में पांचों ने शॉपिंग मॉल्स और दुकानदारों से सेटिंग की और 20 से 30 परसेंट तक कमीशन फिक्स किया.

प्लैन के मुताबिक अमेरिका में बैठे इनके एक ठग दोस्त ने एक विदेशी ग्राहक के डेबिट और क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स भेजीं. यहां ज़ुबेर, अबु, सुबोध, नईम और हसन ने उनके हिसाब से कार्ड उसका क्लोन तैयार करवाया. इसके बाद एक दुकानदार से कार्ड स्वाइप मशीन ली और घर आकर इस मशीन से कार्ड स्वाइप किए. एक-दो प्रयोगों के फेल होने के बाद उन्हें कामयाबी मिल गई.

लाखों रुपये इस मशीन के ज़रिये ट्रांसफर कर दिए गए जो सीधे मशीन के मालिक दुकानदार के खाते में पहुंचे. अगले दिन पांचों ने जाकर उस दुकानदार को तय कमीशन दिया और बाकी रकम हासिल कर ली. अब धंधा चल पड़ा. इनके ठग दोस्त इन्हें कार्ड और पिन संबंधी डिटेल्स देते थे. विदेशियों के अकाउंट डिटेल्स पा लेने के बाद ज़ुबेर, अबु, सुबोध, नईम और हसन सेटिंग के ज़रिये दुकानदारों से बैंकों द्वारा उन्हें दी गई पीओएस यानी कार्ड स्वाइप करने की मशीनें घर ले आते थे. घर पर बैठकर तसल्ली से विदेशों से मिले डिटेल्स के मुताबिक कार्ड स्वाइप करते और रकम ट्रांसफर कर लेते.
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इस गैंग से ज़ब्त की गईं 51 स्वाइप मशीनें.


मुंबई में कुछ प्रयोगों के बाद इन लोगों ने बेंगलूरु, गोवा, जयपुर, कुल्लू और मनाली जैसे देश के कई शहरों में जाकर इसी ठगी का कारोबार शुरू कर दिया. 2013 से शुरू हुआ यह सिलसिला पांच सालों तक चलता रहा. इस गिरोह को कोई खतरा नहीं था क्योंकि जिन कार्डों के ज़रिये जिन बैंक खातों में वो सेंध लगा रहे थे, वो अंतर्राष्ट्रीय बैंक थे और ग्राहक भी विदेशी जो भारत आए ही नहीं थे. इसलिए इन पांच सालों में इनके खिलाफ ऐसे किसी मामले की शिकायत तक दर्ज नहीं हुई.

फिर अचानक गिरफ्त में आया गिरोह

ज़ुबेर, अबु, सुबोध, नईम और हसन अपनी मस्ती और अय्याशी में गुम थे और बीते पांच सालों में करीब 40 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दे चुके थे. पकड़े जाने का डर तक वो भुला चुके थे क्योंकि पांच सालों में कुछ नहीं हुआ तो बेपरवाह हो बैठे. लेकिन पिछले दिनों मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इनके ठिकानों पर छापेमारी की और पांचों को एक के बाद एक हिरासत में ले लिया.

इन पांचों को समझ ही नहीं आया कि पुलिस इन तक आखिर पहुंच कैसे गई क्योंकि इनके खिलाफ कोई शिकायत कहीं से दर्ज हुई नहीं थी. अस्ल में, पुलिस को अपने मुखबिरों से इस तरह के गिरोह के सक्रिय होने की गुप्त सूचना मिली जिसके आधार पर जाल बिछाते हुए पुलिस इन शातिर ठगों तक पहुंची.

इस गैंग से ज़ब्त की गईं 51 स्वाइप मशीनें.
पुलिस की गिरफ्त में फ्रॉड करने वाला गैंग.


दिलीप सावंत,डीसीपी क्राइम ब्रांच ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम जुबेर सय्यद, हसन शेख, नईम शेख, अबु बकर और सुबोध शर्मा हैं. इनके पास से 51 स्वाइप मशीनें (पीओएस मशीन), दो लैपटॉप, 65 नकली डेबिट/क्रेडिट कार्ड, कार्ड रीडर/राइटर और पैसे निकालने के लिए इस्तेमाल कई बैंकों की पासबुक बरामद की गई हैं. अब पुलिस को शक है कि इस गिरोह के तार अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हो सकते हैं. इस फ्रॉड में शामिल दुकानदारों पर शिकंजा कसने की तैयारी भी है.

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