झटका! महंगा हो सकता है सरसों और रिफाइंड का तेल, जाने कितने बढ़ जाएंगे दाम

महंगा हो जाएगा सरसों-रिफाइंड का तेल

एक बार फिर पाम ऑयल महंगे होने के बाद सरसों और रिफाइंड तेल (Refined Oil) महंगे होते नजर आ रहे हैं. 15 दिन पहले तक जो पाम ऑयल 90 से 95 रुपये लीटर तक आ गया था, वहीं अब 130 रुपये लीटर बिक रहा है.

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नई दिल्ली: पहले ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि खाद्य तेलों (Edible oil) पर आई तेजी मार्च-अप्रैल में कम हो जाएगी; मतलब होली या उसके बाद सरसों (Mustard Oil) और रिफाइंड तेल सस्ते हो जाएंगे, लेकिन अब ऐसी उम्मीद कम ही नजर आ रही है. एक बार फिर पाम ऑयल महंगे होने के बाद सरसों और रिफाइंड तेल (Refined Oil) महंगे होते नजर आ रहे हैं. 15 दिन पहले तक जो पाम ऑयल 90 से 95 रुपये लीटर तक आ गया था, वहीं अब 130 रुपये लीटर बिक रहा है.

जबकि कुछ समय पहले केन्द्र सरकार ने पाम ऑयल (Pam Oil) पर से 10 फीसद इंपोर्ट डयूटी कम कर दी थी. जब तक आम पब्लिक को पाम ऑयल के रेट कम होने का फायदा मिल पाता एक बार फिर पाम ऑयल महंगा हो गया.

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बजट में लिए फैसलों का दिखा असर
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है, "केन्द्रीय आम बजट में क्रूड पाम तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल आदि पर मूल आयात शुल्क में कटौती की घोषणा की गई, लेकिन इसी के साथ उस पर कृषि विकास सेस लागू करने का निर्णय भी लिया गया. जिसके चलते वास्तविक आयात शुल्क में परिवर्तन हो गया और पहले से ही महंगे बिक रहे खाद्य तेल के दामों में और इजाफा हो गया. बजट में लिए गए कुछ खास फैसलों के चलते खाद्य तेलों पर यह महंगाई आई है."

ऐसे बिगड़ा सरसों और रिफाइंड तेल का खेल
राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर की मानें तो आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2 फरवरी 2021 से क्रूड पाम तेल (सीपीओ) पर मूल आयात शुल्क 15 फीसद और कृषि विकास सेस 17.50 फीसद लागू होगा, जिससे यह 32.50 फीसद हो जाएगा. इस पर 10 फीसद का समाज कल्याण सेस लगेगा जो 3.25 फीसद होता है. इसे मिलाकर कुल वास्तविक आयात शुल्क 35.75 फीसद हो जाएगा.

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इससे पूर्व सीपीओ पर 27.50 फीसद के मूल आयात शुल्क और इस पर 10 फीसद के सेस के साथ कुल 30.25 फीसद का सीमा शुल्क लग रहा था. 10 फीसद का समाज कल्याण सेस सभी खाद्य तेलों के आयात पर बरकरार रखा गया है जबकि कृषि विकास सेस नए सिरे से लगाया गया है.

आर.बी.डी पामोलीन पर तथा रिफाइंड पाम तेल पर कृषि विकास सेस नहीं लगा है. इन दोनों पर 45-54 फीसद का मूल आयात शुल्क और 10 फीसद  का सेस पहले की तरह से लागू रहेगा. क्रूड सोयाबीन तेल पर मूल आयात शुल्क को 35 फीसद से घटाकर 15 फीसद नियत किया गया है जबकि 20 फीसद का कृषि विकास सेस लगाया गया है.

इसके कुल योग 35 फीसद पर 10 फीसद का समान कल्याण सेस लगेगा जिससे वास्तविक आयात शुल्क 38.50 फीसद के पुराने स्तर पर ही बरकरार रहेगा. क्रूड सूरजमुखी तेल के लिए भी इसी दर से आयात शुल्क निर्धारित किया गया है. बाकी सभी खाद्य तेलों पर आयात शुल्क पुराने स्तर पर ही बरकरार रहेगा और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है.

इसलिए और महंगे हो गए खाने के तेल
शंकर ठक्कर का कहना है कि इस साल खाद्य तेल के अधिक उत्पादन करने वाले देशों में कोविड-19 और अल नीनो की वजह से बदले मौसम में उत्पादन घट गया है. जिससे अंतरराष्ट्रीय दाम आसमान छू रहे हैं. दामों को काबू में लाने के लिए संगठन ने सरकार से खाद्य तेल पर लगने वाले 5 फीसद जीएसटी को हटाने की मांग रखी थी, लेकिन सरकार ने ऐसा करने की बजाय और ज़्यादा बोझ उपभोक्ताओं पर डाल दिया जिससे महंगे तेल और भी महंगे हो गए हैं.

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