बड़ी खबर: दिवाली के बाद और बढ़ सकते हैं सरसों तेल के दाम! जानिए कब मिलेगी राहत

दिसंबर के बाद सस्ता हो सकता है सरसों का तेल
दिसंबर के बाद सस्ता हो सकता है सरसों का तेल

तेल कारोबारियों की मानें तो दिवाली (Diwali) के बाद अब तेल के दाम 160 के पार जा सकते हैं. दरअसल शादी-ब्याह का सहलग शुरू होने के कारण तेल की डिमांड बढ़ जाएगी. ऐसे में दाम बढ़ने का सबसे बड़ा यही माना जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 14, 2020, 8:44 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के इस संकट में आम आदमी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. अब खाने के तेल की महंगाई ने चिंताएं बढ़ा दी है. तेल कारोबारियों की मानें तो दिवाली (Diwali 2020) के बाद अब तेल के दाम 160 के पार जा सकते हैं. शादी-ब्याह का सहलग शुरू हो जाएगा. तेल की डिमांड भी बढ़ जाएगी. वहीं ब्लेंडिंग (मिलावट) बंद होने के चलते प्योर सरसों का तेल से इस रेट में कोई मुनाफा नहीं निकल रहा है. इसलिए रेट बढ़ाना मजबूरी होगी. वहीं इंटरनेशनल (International) लेवल पर भी दूसरे तेलों के दाम बढ़ने का असर सरसों के तेल पर भी पड़ रहा है.

30 फीसदी तक महंगे हुए खाना बनाने वाले तेल- पिछले 1 साल के अंदर दामों में 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है. पिछले साल सरकार ने पाम ऑयल के आयात पर रोक लगा दी थी जिससे इस साल पाम ऑयल का आयात 14 फीसदी गिरा है, जिसका असर भाव पर साफ दिख रहा है.

खाने के तेलों के बढ़ते भाव पर नजर डालें तो 2019 में इसी समय मूंगफली के तेल का भाव 140 प्रति किलो के आसपास था जो अभी 162 रुपये के आसपास है. 2019 में इसी समय सरसों के तेल का भाव 120 प्रति किलो के आसपास था जो अभी 160 रुपये के आसपास है.2019 में इसी समय सोयाबीन के तेल का भाव 85 प्रति किलो के आसपास था जो अभी 103 रुपये के आसपास है. 2019 में इसी समय सनफ्लावर के तेल का भाव 89 प्रति किलो के आसपास था जो अभी 130 रुपये के आसपास है. 2019 में इसी समय पाम ऑयल का भाव 67 रुपये प्रति किलो के आसपास था जो अभी 98 रुपये के आसपास है.



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150 रुपये लीटर तक बिक रहा अच्छे ब्रांड का तेल- तेल के रिटेल कारोबारी कपिल गुप्ता ने न्यूज18हिंदी को बताया कि अक्टूबर से 5 नवंबर तक सरसों के तेल पर 15 से 20 रुपये बढ़ चुके हैं. सबसे ज़्यादा बिकने वाला एक लीटर का पाउच 140 से 150 रुपये तक का बिक रहा है. 140 रुपये लीटर में किसी भी शहर का लोकल ब्रांड बिक रहा है. वहीं अच्छे ब्रांड की बात करें तो 145 से 150 रुपये तक बिक रहा है. थोक बाज़ार में ऐसी आशंका है कि दिवाली के बाद सहलग शुरु होते ही देवोत्थान में यह दाम 10 रुपये किलो तक और बढ़ सकते हैं.

अब इसलिए भी नहीं हो रही है तेल में मिलावट- एक नामी तेल कंपनी के एक्जीक्यूटिव फील्ड अफसर अमित सिंह का कहना है कि राइस ब्रान ऑयल, पॉमलीन और दूसरे तेल 20 फीसद तक की मात्रा में सरसों के तेल में मिलाए जाते थे. लेकिन पॉमलीन कितना भी अच्छा हो वो सर्दियों में जमने लगता है. और राइस ब्रान समेत दूसरे तेलों की बात करें तो इंटरनेशनल पॉलिसी के चलते उनके दाम पहले से ही बढ़े हुए हैं.

इसलिए दिसंबर के बाद मिल सकती है राहत- एक अक्टूबर से केन्द्र सरकार ने सरसों के तेल में की जाने वाली ब्लैंडिंग (सरकार की अनुमति से सरसों के तेल में दूसरे तेलों का 20 फीसदी तक मिश्रण) बंद कर दी है. अब कारोबारियों को प्योर सरसों का तेल बेचना होगा. लेकिन यहां सिर मुंडाते ही ओले पड़ने वाली कहावत चरितार्थ हुई है. इस साल सरसों की पैदावार भी कम हो गई है. और प्योर तेल बेचने का खर्च ज़्यादा है. ब्लैंडिंग बंद करने के खिलाफ कुछ कारोबारी कोर्ट भी गए हैं. जहां दिसम्बर में सुनवाई है. वहीं दो कारोबारियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में भी ब्लैंडिंग बंद होने के खिलाफ अर्जी दी है.
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