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Mutual Funds से चाहिए ज्यादा रिटर्न, जोखिम भी होगा कम, अपनाएं ये टिप्स

Mutual Funds से चाहिए ज्यादा रिटर्न, जोखिम भी होगा कम, अपनाएं ये टिप्स

म्यूचुअल फंड में निवेश किसी के कहने या फिर सुनी हुई बातों के आधार पर कतई ना करें.

म्यूचुअल फंड में निवेश किसी के कहने या फिर सुनी हुई बातों के आधार पर कतई ना करें.

बाजार के तमाम उतार-चढ़ाव के बाद म्यूचुअल फंड (mutual fund) से 15 प्रतिशत तक का रिटर्न मिल जाता है. और यह रिटर्न आपके पोर्टफोलियो (mutual fund portfolio) पर भी निर्भर करता है. आपकी रिस्क लेने के क्षमता से आपके एसेट एलोकेशन का निर्धारण होता है.

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    Mutual Fund News: निश्चित ही म्यूचुअल फंड्स से अच्छा रिटर्न मिलता है, लेकिन ये भी बाजार के आधीन होने के चलते रिस्क पूरा रहता है. अगर आप अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता रखेंगे तो आप नुकसान कम फायदा ज्यादा ले पाएंगे. म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो (mutual fund portfolio) में आपका निवेश एक जगह ना होकर कई अलग-अलग फंड्स में होना चाहिए. पोर्टफोलियो विविधतापूर्ण होना चाहिए. निवेश को विभिन्न सम्पतियों में बांटना ही एसेट एलोकेशन यानी परिसंपत्ति आवंटन कहलाता है.

    सही पोर्टफोलियो का नियम यह है कि निवेश से पहले निवेश करने का मकसद और समयसीमा तय करनी चाहिए. निवेश की सीमा जितनी अधिक होगी, उतना ही अधिक आवंटन इक्विटी फंड में होगा और रिटर्न भी अच्छा मिलेगा.

    रिस्क क्षमता के अनुसार निवेश (Mutual Fund SIP investment)
    बाजार के तमाम उतार-चढ़ाव के बाद म्यूचुअल फंड से 15 प्रतिशत तक का रिटर्न मिल जाता है. और यह रिटर्न आपके पोर्टफोलियो की वैरायटी पर भी निर्भर करता है. आपकी रिस्क लेने के क्षमता से आपके एसेट एलोकेशन का निर्धारण होता है. अगर आप ज्यादा रिस्क ले सकते हैं तो इक्विटी आवंटन अधिक हो सकता है. याद रखें जितना ज्यादा रिस्क होता है रिटर्न भी उतना ज्यादा होता है.

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    अगर रिस्क लेने की क्षमता कम है तो इक्विटी में निवेश कम करना होगा. यहां आप ज्यादा रिटर्न की उम्मीद नहीं कर सकते हैं. फिर आपको डेट फंड में निवेश करना ठीक रहेगा.

    निवेश से पहले स्टडी जरूर करें (investment tips)
    म्यूचुअल फंड में निवेश किसी के कहने या फिर सुनी हुई बातों के आधार पर कतई ना करें. निवेश से पहले फंड हाउस की रिटर्न हिस्ट्री का अध्ययन जरूर करें. रिटर्न हिस्ट्री में केवल एक-दो साल का इतिहास नहीं बल्कि करीब 10 सालों का रिकॉर्ड देखना चाहिए. फंड हाउस के मैनेजर्स के बारे में भी जरूर पता करें.

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    पोर्टफोलियो तैयार करना (mutual fund portfolio)
    इक्विटी और डेट फंड्स का पोर्टफोलियो अलग-अलग तैयार करें. डेट पोर्टफोलियो में ब्याज दर जोखिम और क्रेडिट जोखिम पर ध्यान देना होगा. ब्याज दर में बदलाव के चलते डेट पोर्टफोलियो के रिटर्न पर असर पड़ सकता है.

    डेट फंड में निवेश कर रहे हैं तो शॉर्ट टर्म के लिए निवेश करें. लॉन्ग टर्म के निवेश पर ब्याज दरों में बदलाव का असर पड़ता है.

    Tags: Business news in hindi, Investment tips, Mutual funds

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