लॉकडाउन में निवेशकों के 1 लाख बन गए 1.25 लाख रु, यहां मिला बंपर मुनाफा

लॉकडाउन में निवेशकों के 1 लाख बन गए 1.25 लाख रु, यहां मिला बंपर मुनाफा
लॉकडाउन में इक्विटी म्यूचुअल फंड ने दिया 25% मुनाफा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ सरकार द्वारा उठाए गए आर्थिक कदमों से लॉकडाउन के दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स ने 25 फीसदी रिटर्न दिए हैं.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रसार को रोकने के लिए लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) में इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स स्कीम (Equity mutual fund schemes) ने निवेशकों को बंपर रिटर्न दिए हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ सरकार द्वारा उठाए गए आर्थिक कदमों से लॉकडाउन के दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स ने 25 फीसदी रिटर्न दिए हैं. हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह बाजार की रैली से ज्यादा कुछ नहीं है. प्राइमइन्वेस्टर डॉट इन के को-फाउंडर विद्या बाला ने कहा, हालांकि, मार्च के निचले स्तर से उछाल से म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में बाउंस बैक आया है, उनका लॉन्ग टर्म रिटर्न अभी भी खराब है.

यहां मिला 25 फीसदी मुनाफा
मॉर्निंगस्टार इंडिया द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी स्कीम के सभी कैटेगरी- इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS), मिड-कैप, लार्ज और मिड-कैप, लार्ज-कैप, स्मॉल-कैप, मिड-कैप और मल्टी-कैप- ने 25 मार्च से 3 जून तक 23 से 25 फीसदी रिटर्न दिया है. लार्ज-कैप फंड्स ने 25.1 फीसदी रिटर्न दिया है. इसके अलावा, मल्टी-कैप (25 फीसदी), ELSS के साथ लार्ज और मिड-कैप फंड्स (24.9 फीसदी), स्मॉल-कैप (24 फीसदी) और मिड-कैप (23.2) में रिटर्न मिला.

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समीक्षाधीन अवधि में व्यापक बाजारों में 25-30  फीसदी की रिकवरी हुई है. हालांकि, अधिकांश सक्रिय फंडों ने अपने संबंधित बेंचमार्क सूचकांकों को कमजोर कर दिया. बता दें कि COVID-19 संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन 25 मार्च से शुरू हुई और इसे कुछ राज्यों द्वारा 30 जून तक सम्‍मिलन क्षेत्रों में बढ़ा दिया गया है. इससे पहले, सभी इक्विटी स्कीमों ने 19 फरवरी को बीयर बाजार की शुरुआत से  24 फरवरी को लॉकडाउन की घोषणा तक माइनस 32-37 फीसदी तक निगेटिव रिटर्न दिया था.



स्क्रिपबॉक्स के सह-संस्थापक प्रतीक मेहता ने कहा, पिछले 12 हफ्तों में दुनिया भर में सरकार और केंद्रीय बैंकरों द्वारा उठाए गए कदमों से म्यूचुअल फंडों का रिटर्न पॉजिटिव रहा है. उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि भारत में आरबीआई द्वारा दर में कटौती और सरकार के व्यापक उपायों के चलते बाजार में गिरावट थमी है और मई और जून में एफपीआई की वापसी हुई है.

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