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म्यूचुअल फंड-सरकार ने दी नए टैक्स को लेकर सफाई, आपके मुनाफे पर होगा सीधा असर

News18Hindi
Updated: February 5, 2020, 9:48 AM IST
म्यूचुअल फंड-सरकार ने दी नए टैक्स को लेकर सफाई, आपके मुनाफे पर होगा सीधा असर
जानिए 10 फीसदी टीडीएस के प्रस्ताव को लेकर क्या हुआ फैसला

म्‍यूचुअल फंड (Mutual Funds) में पैसा लगाने वालों के लिए बजट में हुए फैसलों पर CBDT ने सफाई जारी करते हुए कहा हैं कि बजट में 10 फीसदी टीडीएस का प्रस्ताव केवल म्यूचुअल फंड द्वारा दिये गये डिविडेंड पर लागू होगा.

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  • Last Updated: February 5, 2020, 9:48 AM IST
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नई दिल्ली. म्‍यूचुअल फंड (Mutual Funds) में पैसा लगाने वालों के लिए बजट में हुए फैसलों पर CBDT ने सफाई जारी करते हुए कहा हैं कि बजट में 10 फीसदी टीडीएस (Mutual Funds Scheme) का प्रस्ताव केवल म्यूचुअल फंड द्वारा दिये गये डिविडेंड पर लागू होगा. यह यूनिट को भुनाने से होने वाले मुनाफे पर लागू नहीं होगा. अगर आसान शब्दों में कहें तो जिन म्यूचुअल फंड्स स्कीम में डिविडेंड मिलता हैं उन्हीं पर टैक्स लगेगा. वहीं, आप आप अपना पैसा स्कीम से निकालते हैं तो कोई भी टैक्स नहीं देना होगा. आपको बता दें कि सरकार ने डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को लेकर बड़ा फैसला किया है. सरकार ने कंपनियों पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (Dividend Distribution Tax) हटाने का प्रस्ताव किया है. नए फैसले के तहत अब डिविडेंड पर टैक्स निवेशक चुकाएगा.

अब क्या होगा- मान लीजिए अगर आपको किसी म्‍यूचुअल फंड स्कीम (Mutual Funds Scheme) में डिविडेंड मिलता है तो अब  194K के तहत 10 फीसदी की दर से डिविडेंड पर TDS देना होगा. इसका मतलब साफ है कि चुनिंदा स्कीम पर ही टैक्स लगेगा. वहीं, आप जब भी अपना (डिविडेंड स्कीम को छोड़कर) पैसा स्कीम से निकालेंगे तो नए प्रस्ताव के मुताबिक टीडीएस नहीं कटवाना होगा.



एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसे निवेशकों को डिविडेंड स्कीम (Dividend Scheme) में निवेश की सलाह देते हैं, जो ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते और कुछ आय चाहते हैं. जो निवेशक एसआईपी के जरिए लंबी अवधि में बड़ी संपत्ति बनाना चाहते हैं, उन्हें ग्रोथ स्कीम का विकल्प चुनना चाहिए. इसकी वजह यह है कि डिविडेंड मिल जाने से कंपाउंडिंग का फायदा नहीं मिल पाता है.

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कौन सी होती हैं डिविडेंड देने वाली स्कीम- एक्सपर्ट्स बताते हैं कि म्यूचुअल फंड की सभी स्कीम में डिविडेंड नहीं मिलता हैं. उसकी स्कीम में डिविडेंड का ऐलान होता है, जब उसे अपने पोर्टफोलियो से कोई बड़ा मुनाफा होता है. स्कीम को चलाने वाले फंड मैनेजर शेयरों को खरीदता और बेचता है, जिससे मुनाफा होता है. डेट फंड्स के मामले में पोर्टफोलियो को बॉन्ड में निवेश पर इंट्रेस्ट या डिविडेंड मिलता है. ऐसी रकम को फंड मैनेजर डिविडेंड के रूप में निवेशकों को बांट सकता है.

म्यूचुअल फंड की स्कीम रोजाना, हर महीने, हर तिमाही या साल में एक बार डिविडेंड का एलान कर सकती है. यह स्कीम की कैटेगरी पर भी निर्भर करता है. मान लीजिए कई हाईब्रिड प्लान या मंथली इनकम प्लान यूनिटहोल्डर्स को हर महीने डिविडेंड देने की कोशिश करते हैं.

हालांकि, डिविडेंड मिलना पक्का नहीं होता और यह भी निश्चित नहीं कि डिविडेंड के रूप में कितनी रकम मिलेगी. डिविडेंड स्कीम में नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) को बढ़ने नहीं दिया जाता है. जब भी एनएवी एक निश्चित स्तर पर पहुंच जाती है, एसेट मैनेजमेंट कंपनी डिविडेंड का एलान कर देती है.

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First published: February 5, 2020, 9:37 AM IST
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