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म्यूचुअल फंड्स में पैसा लगाने वालों के लिए बड़ी खबर! बजट के इस फैसले से घट जाएगा आपका मुनाफा

 मान लीजिए अगर आपको किसी म्‍यूचुअल फंड स्कीम में डिविडेंड मिलता हैं तो अब  194K के तहत 10 फीसदी की दर से डिविडेंड पर TDS देना होगा.

मान लीजिए अगर आपको किसी म्‍यूचुअल फंड स्कीम में डिविडेंड मिलता हैं तो अब 194K के तहत 10 फीसदी की दर से डिविडेंड पर TDS देना होगा.

मान लीजिए अगर आपको किसी म्‍यूचुअल फंड स्कीम में डिविडेंड मिलता हैं तो अब 194K के तहत 10 फीसदी की दर से डिविडेंड पर TDS देना होगा.

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    नई दिल्ली. म्‍यूचुअल फंड (Mutual Funds) में पैसा लगाने वालों के लिए इस बार बजट से निराशा हाथ लगी हैं. सरकार ने डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को लेकर बड़ा फैसला किया है. सरकार ने शुक्रवार को कंपनियों पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (Dividend Distribution Tax) हटाने का प्रस्ताव किया है. नए फैसले के तहत अब डिविडेंड पर टैक्स निवेशक चुकाएगा. आपको बता दें कि मौजूदा समय में कंपनियों को शेयरधारकों को दिये जाने वाले डिविडेंड भुगतान पर 15 फीसदी की दर से डीडीटी चुकाना होता है. इसके अलावा इस पर सरचार्ज और सेस लगता है. यह कंपनी द्वारा लाभ पर दिये गये टैक्स  के अतिरिक्त होता है.

    अब क्या होगा- मान लीजिए अगर आपको किसी म्‍यूचुअल फंड स्कीम में डिविडेंड मिलता है तो अब  194K के तहत 10 फीसदी की दर से डिविडेंड पर TDS देना होगा. ये सरकार की ओर डीडीटी को हटाकर निवेशक पर डिविडेंड पर टैक्स लगाने की पुरानी व्यवस्था की ओर उठाया गया कदम हैं.

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     म्युचूअल फंड्स निवेशकों को हाथ लगी निराशा- बजट से म्‍यूचुअल फंड निवेशकों को निराशा हाथ लगी है. वे उम्‍मीद कर रहे थे कि इक्विटी म्‍यूचुअल फंडों पर लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्‍स को खत्‍म किया जाएगा.लेकिन, ऐसा नहीं हुआ. वित्‍त मंत्री ने इक्विटी म्यूचुअल फंडों पर एलटीसीजी टैक्‍स को कायम रखा है. बाजार के कई जानकारों को उम्‍मीद थी कि एलटीसीजी टैक्‍स को रोलबैक किया जाएगा.



    यह नहीं भी हुआ तो कम से कम एलटीसीजी टैक्‍स के लिए होल्डिंग पीरियड को बढ़ाया जाएगा. शनिवार को वित्‍त मंत्री ने अपना दूसरा बजट पेश करते हुए इनमें से दोनों ही उम्‍मीदों पर पानी फेर दिया.

    अगर इक्विटी म्‍यूचुअल फंडों को एक साल से ज्‍यादा समय के लिए रखा जाता है तो इनके रिटर्न को लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) माना जाता है. किसी वित्‍त वर्ष में एक लाख रुपये से ज्‍यादा के इस तरह के गेन पर 10 फीसदी की दर से टैक्‍स लगता है.

    2016 में अपने बजट भाषण में तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने इसकी वापसी की थी. पिछले हफ्ते हमने ट्विटर पर एक सर्वे किया था.

    इसमें ज्‍यादातर म्‍यूचुअल फंड निवेशकों ने इक्विटी म्‍यूचुअल फंडों पर एलटीसीजी टैक्‍स हटाने के पक्ष में वोट किया था. इसके बाद सेक्‍शन 80सी के तहत उपलब्‍ध टैक्‍स डिडक्‍शन की सीमा को बढ़ाने और पर्सनल इनकम टैक्‍स को घटाने पर वोट किया गया था.

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    आज क्या हुआ-वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट पेश करते हुए कहा कि प्रस्ताव से भारत निवेश के लिये और आकर्षक स्थल बनेगा. उन्होंने कहा, यह एक और महत्वपूर्ण साहसिक कदम है जिससे भारत निवेश के लिये आकर्षक गंतव्य बनेगा. वित्त मंत्री के अनुसार हालांकि इससे 25,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा.



    म्यूचुअल फंड कंपनी कैसे करती है डिविडेंड का ऐलान-म्यूचुअल फंड की स्कीम तभी डिविडेंड का ऐलानकरती है, जब उसे अपने पोर्टफोलियो से कोई मुनाफा होता है. फंड मैनेजर शेयरों को खरीदता और बेचता है, जिससे पोर्टफोलियो को प्रॉफिट होता है. डेट फंड्स के मामले में पोर्टफोलियो को बॉन्ड में निवेश पर इंट्रेस्ट या डिविडेंड मिलता है. ऐसी रकम को फंड मैनेजर डिविडेंड के रूप में निवेशकों को बांट सकता है.

    म्यूचुअल फंड की स्कीम रोजाना, हर महीने, हर तिमाही या साल में एक बार डिविडेंड का एलान कर सकती है. यह स्कीम की कैटेगरी पर भी निर्भर करता है. मसलन, कई हाईब्रिड प्लान या मंथली इनकम प्लान यूनिटहोल्डर्स को हर महीने डिविडेंड देने की कोशिश करते हैं.

    हालांकि, डिविडेंड मिलना पक्का नहीं होता और यह भी निश्चित नहीं कि डिविडेंड के रूप में कितनी रकम मिलेगी. डिविडेंड स्कीम में नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) को बढ़ने नहीं दिया जाता है. जब भी एनएवी एक निश्चित स्तर पर पहुंच जाती है, एसेट मैनेजमेंट कंपनी डिविडेंड का एलान कर देती है.



    मान लीजिए आपने 14 रुपये की एनएवी पर किसी फंड में निवेश किया है और आपने डिविडेंड स्कीम का विकल्प चुना है. स्कीम अच्छा प्रदर्शन करती है और एनएवी बढ़कर 16 रुपये पर पहुंच जाती है. ऐसे में फंड हाउस 2 रुपये डिविडेंड के रूप में देने का एलान कर सकता है. आपको 2 रुपये डिविडेंड के रूप में मिल जाते हैं और एनएवी घटकर 14 रुपये पर आ जाती है.

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    एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसे निवेशकों को डिविडेंड स्कीम में निवेश की सलाह देते हैं, जो ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते और कुछ आय चाहते हैं. जो निवेशक एसआईपी के जरिए लंबी अवधि में बड़ी संपत्ति बनाना चाहते हैं, उन्हें ग्रोथ स्कीम का विकल्प चुनना चाहिए. इसकी वजह यह है कि डिविडेंड मिल जाने से कंपाउंडिंग का फायदा नहीं मिल पाता है.

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