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म्यूचुअल फंड्स से हुए मुनाफे पर लगता है टैक्स, जानें इससे जुड़े सवालों के जवाब

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बहुत कम ही लोग म्यूचुअल फंड से होने वाले मुनाफे पर टैक्स के नियमों के बारे में जानते हैं. आइए जानें इसके बारे में सबकुछ...

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    शेयर बाजार में सीधे निवेश करने में ज्यादा रिस्क होता है. इसीलिए देश में तेजी से म्यूचुअल  फंड  एसआईपी के जरिए निवेश बढ़ रहा है. लेकिन एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बहुत कम ही लोग म्यूचुअल फंड से होने वाले मुनाफे पर टैक्स के नियमों के बारे में जानते है. म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश को भुनाने पर आपके लिए टैक्स देनदारी बनती है. इससे होने वाली कमाई आपकी कुल आमदनी में जोड़ दी जाती है और उस पर आपके स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना पड़ता है या दूसरे मामलों में उस पर अलग से टैक्स चुकाना पड़ता है.

    आइए जानें इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब...

    सवाल: म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर टैक्स किस हिसाब से बनता है?
    जवाब: अगर आपने स्कीम खरीदने के बाद उसे 12 महीने से अधिक समय तक होल्ड किया और फिर बेचा तो Mutual Fund से होने वाली कमाई लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के तहत आती है. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है.

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    सवाल: एसआईपी पर किस तरह से टैक्स लगता है?
    जवाब: एसआईपी के जरिये निवेश के मामले में आखिरी सिप से 12 महीने का समय जोड़ा जाता है, एसआईपी शुरू करने के समय से नहीं है. 12 महीने से कम समय में निवेश भुनाने पर इक्विटी फंड्स से कमाई पर शार्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स लगता है. यह मौजूदा नियमों के हिसाब से कमाई पर 15% तक लगाया जाता है.

    सवाल: डिविडेंड स्कीम पर क्या टैक्स लगता है?
    जवाब: 
    बहुत से निवेशक इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश पर डिविडेंड ऑप्शन का विकल्प चुनते हैं. इक्विटी म्यूचुअल फंड से डिविडेंड टैक्स फ्री है, भले ही यह आपको कभी मिले.

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    सवाल: डेट फंड स्कीम पर टैक्स कैसे लगता है?
    जवाब: डेट फंड में निवेश को लॉन्ग टर्म तब माना जायेगा, अगर उसमें निवेश तीन साल से अधिक समय तक बना रहे. डेट फंड से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर 20 फीसदी की दर से टैक्स लगाया जाता है. ओरिजिनल डेट फंड के मामले में हालांकि कमाई पर आप इंडेक्सेशन का लाभ (आय कर कानूनों के हिसाब से) ले सकते हैं.

    >> इसका मतलब यह है कि आप वास्तविक निवेश को महंगाई और टैक्स के हिसाब से बढ़ाकर कमाई में से उसे घटा कर उस पर टैक्स चुका सकते हैं. महंगाई की दर शामिल करने के बाद वास्तविक निवेश बढ़ जायेगा और कमाई घट जाएगी, इस हिसाब से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) पर देनदारी बहुत कम बनेगी.

    >> डेट फंड से कमाई डिविडेंड के जरिये भी हो सकती है. निवेशक के हाथ में आने पर डिविडेंड टैक्स फ्री हो जाता है. निवेशक को डिविडेंड चुकाने से पहले म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) हाउस उस पर 28.84 फीसदी की दर से डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) चुकाते हैं.

    >> निवेशक को डिविडेंड चुकाने से पहले म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) हाउस उस पर 28.84 फीसदी की दर से डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) चुकाते हैं.

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