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Investment करने से पहने जानें ये जरूरी बातें, नहीं डूबेगा पैसा और मिलेगा अच्छा रिटर्न

Investment करने से पहने जानें ये जरूरी बातें, नहीं डूबेगा पैसा और मिलेगा अच्छा रिटर्न

म्यूचुअल फंड में 5-7 साल के निवेश पर आपको 15 परसेंट तक रिटर्न मिल जाता है.

म्यूचुअल फंड में 5-7 साल के निवेश पर आपको 15 परसेंट तक रिटर्न मिल जाता है.

कुछ Mutual Funds टैक्स सेविंग होते हैं, जहां निवेश कर आप Income Tax में छूट का फायदा ले सकते हरैं. लेकिन इनमें तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है. आप तीन साल से पहले पैसा नहीं निकाल पाएंगे.

    Mutual Funds Investment: ये तो सभी जानते हैं कि म्यूचुअल फंड में इन दिनों अच्छा रिटर्न मिल रहा है. यह सामान्य बात है कि म्यूचुअल फंड में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट से आपको 15 फीसदी तक रिटर्न मिल जाता है.

    इन बातों को पढ़कर या सुनकर आप म्यूचुअल फंड में निवेश का प्लान बना रहे हैं तो ऐसा बिल्कुल भी ना करें. क्योंकि निवेश कभी भी किसी को देखकर या किसी के कहने पर नहीं किया जाता है.

    कुछ ऐसी बेसिक बातें हैं जिन्हें निवेशक को किसी भी तरह का निवेश करने से पहले जान लेना जरूरी है. यहां हम बात म्यूचुअल फंड में निवेश की कर रहे हैं तो आपको इनके बारे में अच्छी तरह से स्टडी करनी चाहिए.

    दरअसल म्यूचुअल फंड हाउस इक्विटी में निवेश करते हैं, इसलिए इनकी वोलैटिलिटी अधिक होती है. वोलैटिलिटी रिस्क को नापने का तरीका है. वोलैटिलिटी (Volatility) यानी अस्थिरता किसी दी गई सिक्योरिटी या मार्केट इंडेक्स के लिए रिटर्न के डिस्पर्सन की एक सांख्यिकीय माप है. वोलैटिलिटी जितनी अधिक होती है सिक्योरिटी उतनी ही जोखिम भरी होती है.

    यही वजह है कि फाइनेंस एक्सपर्ट म्यूचुअल फंड्स में लॉन्ग टर्म निवेश की सलाह देते हैं. म्यूच्युअल फंड्स में 5 या 10 साल तक किया गया निवेश महंगाई की दर के अनुपात में बहुत अच्छे रिटर्न देने वाले साबित होते हैं.

    म्यूचुअल फंड हाउस
    म्यूचुअल फंड हाउस में एक फंड मैनेजर होता है, जो आपके पैसे को अलग-अलग स्टॉक में लगाकर मुनाफा कमाता है और रिटर्न देकर इसके बदले में अपने लिए कमीशन लेता है. फंड हाउस मैनेज करने के लिए ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी होती है, जैसे- एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, आदित्यबिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, एसबीआई म्यूचुअल फंड, आदित्य बिरला म्यूचुअल फंड आदि.

    म्यूचुअल फंड्स के प्रकार
    म्यूचुअल फंड्स तीन तरह के होते हैं- इक्विटी, डेब्ट और हाइब्रीड फंड्स. इनमें रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से निवेश किया जाता है. अगर आप ज्यादा रिस्क लेने में सक्षम हैं तो इक्विटी फंड्स में निवेश कर सकते हैं. कम रिस्क वालों के लिए डेट फंड्स बेहतर होते हैं. और उदारवादी हैं और मॉडरेट रिस्क ले सकते हैं तो हाइब्रिड में निवेश बेहतर होगा.

    म्यूचुअल फंड भी कई सेक्टर में भी बंटे होते हैं. कोई टेक्नोलॉजी में निवेश करता है तो कोई बैंकिंग में. कोई ऑटोमोबाइल सेक्टर को प्राथमिकता देता है तो कोई एग्रीकल्चर और एफएमसीजी को.

    कुछ म्यूचुअल फंड टैक्स सेविंग होते हैं, जहां निवेश कर आप आयकर में छूट का फायदा ले सकते हरैं. लेकिन इनमें तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है. आप तीन साल से पहले पैसा नहीं निकाल पाएंगे.

    निवेश का तरीका
    म्यूचुअल फंड में आप दो तरह से निवेश कर सकते हैं. इनमें आप एकमुश्त राशि निवेश कर सकते हैं या फिर हर महीने थोड़ी-थोड़ी राशि एसआईपी यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान आप सीधे ले सकते हैं, इससे आपको रेगुलर सेविंग इन्वेस्टमेंट की आदत बन जाएगी. मगर लमसम इंवेस्ट की सलाह तब दी के माध्यम से निवेश की जा सकती है.

    कैसे करें निवेश
    किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले फंड हाउस का 5 से 10 साल का रिटर्न प्रोसेस जरूर देखना चाहिए. निवेश पर वे क्या कमीशन लेते हैं इसकी जानकारी भी होनी चाहिए. एंट्री-एग्जिट लोड यानी जब आप निवेश कर रहे हो तब आपका कितना पैसा कट सकता है और मैच्योरिटी आपके हाथ में कितना पैसा आएगा और कितना कटेगा.

    इसमें आप खुद से या फिर किसी एजेंट के माध्यम से निवेश कर सकते हैं. इसके लिए केवाईसी करना जरूरी है. पैन कार्ड, आधार कार्ड और म्यूचुअल फंड हाउस के नाम एक कैंसिल चेक देकर रजिस्ट्रेशन करना होता है. अब कुछ मोबाइल एप भी आ गए हैं, जिनके माध्यम से आप निवेश कर सकते हैं.

    क्या है फायदा
    यह तो आप जान ही चुके हैं कि 5-7 साल के निवेश पर आपको 15 परसेंट तक रिटर्न मिल जाता है. एक दूसरा फायदा यह है कि आप म्यूचुअल फंड में कभी भी निवेश शुरू कर सकते हैं और कभी भी इससे बाहर हो सकते हैं. एसआईपी के माध्यम से छोटी-छोटी रकम भी निवेश कर सकते हैं. म्यूचुअल फंड में निवेश से आपको बाजार के दैनिक उतार-चढ़ाव की चिंता नहीं रहती है.

    Tags: Investment, Mutual funds

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