लाइव टीवी

VIDEO: आपके म्युचूअल फंड्स में शामिल शेयर अगर गिर रहे हैं तो करें ये काम

News18Hindi
Updated: June 4, 2018, 5:30 PM IST

आपके म्युचूअल फंड्स में शामिल शेयर अगर गिर रहे हैं तो टेंशन नहीं लें, बल्कि धैर्य बनाए रखें. एक्सपर्ट्स आपको इसके लिए कुछ सुझाव दे रहे हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में...

  • Share this:
दुनिया भर के शेयर बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में पिछले छह महीने से गिरावट देखने को मिल रही है. ऐसे में म्युचूअल फंड्स में निवेश करने वाले इन्वेस्टर्स की भी टेंशन बढ़ गई है. लेकिन अब सवाल उठता है कि निवेशकों को क्या करना चाहिए. इस पर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर आपके म्युचूअल फंड्स में शामिल शेयर गिर रहे हैं तो आपको सोचना चाहिए. छह महीने में अगर पोर्टफोलियो में शामिल शेयर 10 फीसदी तक गिर जाएं तो उस फंड्स से बाहर निकलना बेहतर होता है.

शेयरधारकों के मुकाबले म्युचूअल फंड्स धारक को नुकसान कम
आनंदराठी प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट के डिप्टी सीईओ फिरोज अजीज कहते हैं कि शेयर में गिरावट के बाद म्यूचुअल फंड पर असर से निवेशक नहीं घबराएं. उतार-चढ़ाव से म्यूचुअल फंड में गिरावट होती है. 1 से 2 फीसदी से ज्यादा गिरावट मुमकिन नहीं है. फंड मैनेजर फंड के निवेश पर काम करते हैं. म्यूचुअल फंड में शेयर के मुकाबले जोखिम कम होता है. म्यूचुअल फंड निवेशक के मुकाबले शेयरधारकों को ज्यादा नुकसान होता है. म्यूचुअल फंड में निवेशक फंड में बने रहें.

स्मॉलकैप फंड्स से निवेश की शुरुआत नहीं करें

मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स से निवेश की शुरुआत नहीं करें. पहली बार निवेश करने वाले लोगों को बैलेंस्ड फंड्स, मल्टीकैप फंड्स या टैक्स सेविंग्स फंड्स में निवेश करना चाहिए. उनका मानना है कि ये तीन तरह के फंड्स ज्यादातर निवेशकों की जरूरत पूरी कर देते हैं. आप चाहे तो एसआईपी के जरिए या एकमुश्त निवेश कर सकते हैं. आप चाहे तो पहले फिक्स्ड इनकम वाले फंड में निवेश करें और धीरे-धीरे शेयरों की तरफ बढ़ें.

लंबी अवधि के लिए निवेश करें
अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं तो अब भी शेयर निवेश के लिए सबसे शानदार माध्यम हैं. हालांकि, निवेशक को अपने पोर्टफोलियो का एक छोटा हिस्सा डेट फंड या फिक्स्ड इनकम फंड में जरूर रखना चाहिए. अगर आपको 5 साल के अंदर पैसे की जरूरत है या आप इमर्जेंसी फंड बनाना चाहते हैं तो आपको फिक्स्ड इनकम फंड का इस्तेमाल करना चाहिए. इस दौरान आपको बॉन्ड यील्ड में होने वाले उतार-चढ़ाव पर ध्यान नहीं देना चाहिए. इसके अलावा आपको बैलेंस्ड फंड में निवेश करना चाहिए, जो अपने पोर्टफोलियो का 35 फीसदी हिस्सा फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स (बॉन्ड) में लगाते हैं. 3. बॉन्ड यील्ड पर ज्यादा ध्यान ने दें. इसकी वजह यह है कि ज्यादातर लंबी अवधि के इक्विटी फंड्स अपने पोर्टफोलियो में जो फिक्स्ड इनकम इस्ट्रूमेंट रखते हैं, वे आम तौर पर ज्यादा यील्ड वाले बॉन्ड्स या कॉर्पोरेट बॉन्ड्स होते हैं.जरूरी बातें
अभी चार लार्जकैप फंड्स में निवेश किया जा सकता है. इनमें आईसीआईसीआई प्रू फोकस्ड ब्लूचिप, मोतीलाल ओसवाल फोकस्ड 25, मिराए एसेट इंडिया अपर्चुनिटीज और एसबीआई ब्लूचिप शामिल हैं. बैलेंस्ड फंड्स में आदित्य बिड़ला सन लाइफ बैलेंस्ड 95, एचडीएफसी बैलेंस्ड, आईसीआईसीआई प्रू बैलेंस्ड और टाटा बैलेंस्ड फंड में निवेश किया जा सकता है. अंत में सबसे जरूरी बात. निवेशकों को धैर्य बनाए रखने की जरूरत है. घबराने की जरूरत नहीं है. अगर आप धैर्य नहीं रख सकते तो अच्छा होगा कि आप म्यूचुअल फंड्स से दूर ही रहें. अन्यथा आप शेयरों से मिलने वाले रिटर्न के मौके गंवा देंगे.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: June 4, 2018, 5:29 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर