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लक्ष्‍मी विलास बैंक का 27 नवंबर से बदल जाएगा नाम, जानें 20 लाख ग्राहकों पर क्‍या पड़ेगा असर

आरबीआई ने मर्जर योजना को 25 नवंबर, 2020 को मंजूरी दी थी और 27 नवंबर, 2020 को यह मर्जर हुआ था.

आरबीआई ने मर्जर योजना को 25 नवंबर, 2020 को मंजूरी दी थी और 27 नवंबर, 2020 को यह मर्जर हुआ था.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने संकटग्रस्‍त लक्ष्‍मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) का डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (DBS Bank India ltd.) के साथ विलय (Merger) कर दिया है. ये विलय 27 नवंबर 2020 से लागू हो रहा है. सिंगापुर (Singapore) का ये बैंक एलवीएस बैंक में 2,500 करोड़ रुपये का निवेश (Investment) करेगा. विलय के बाद मोरेटोरियम भी खत्‍म हो जाएगा.

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    नई दिल्‍ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने नकदी संकट (Cash Crunch) से जूझ रहे लक्ष्‍मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) पर पहले कई तरह की पाबंदियां लगाईं और इसके तुरंत बाद उसके डीबीएस बैंक में विलय (Merger in DBS Bank) की घोषणा कर दी. कैबिनेट (Cabinet) ने आज यानी 25 नवंबर 2020 को आरबीआई के प्रस्‍ताव को हरी झंडी दिखा दी. अब ये विलय 27 नवंबर 2020 से लागू हो जाएगा. इसके साथ ही लक्ष्‍मी विलास बैंक का नाम बदलकर डीबीएस बैंक हो जाएगा. इसके तुरंत बाद केंद्रीय बैंक की ओर से लक्ष्‍मी विलास बैंक पर लगाया गया मोरेटोरियम (Moratorium) भी हटा दिया जाएगा.

    बैंक के 20 लाख डिपॉजिटर्स पर पड़ेगा ये असर
    लक्ष्‍मी विलास बैंक से पहले रिजर्व बैंक ने यस बैंक (YES Bank) और पीएमसी बैंक (PMC Bank) पर भी कई तरह की रोक लगाई थीं. लेकिन, यह पहली बार है कि केंद्रीय बैंक ने किसी भारतीय बैंक (Indian Bank) को संकट से उबारने के लिए विदेशी बैंक में विलय का फैसला लिया हो. अब सवाल ये उठता है कि एलवीएस का नाम बदलने के बाद बैंक के ग्राहकों (Bank Customers) और कर्मचारियों (Bank Employees) का क्‍या होगा. कैबिनेट में लिए गए फैसलों को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने बताया कि बैंक के 20 लाख ग्राहकों को राहत मिलेगी. वे शुक्रवार से अपने खातों को डीबीएस बैंक इंडिया के ग्राहकों के तौर पर ऑपरेट कर सकेंगे. बेलआउट पैकेज के तहत लक्ष्मी विलास बैंक के जमाकर्ताओं को उनका पूरा पैसा मिल जाएगा. अगर वे बैंक में अपना पैसा रखना चाहें तो भी सुरक्षित रहेगा.

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    एलवीएस की सेहत बिगाड़ने वाले होंगे दंडित
    जावड़ेकर ने बताया कि विलय से लक्ष्‍मी विलास बैंक के कर्मचारियों को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है. बैंक के 4,000 कर्मचारियों की सेवाएं भी सुरक्षित रहेंगी. उन्होंने कहा कि सिर्फ लक्ष्मी विलास बैंक की वित्तीय सेहत को खराब करने वाले लोगों को दंडित किया जाएगा. बता दें कि लक्ष्मी विलास बैंक इस साल का दूसरा बैंक है, जिसे रिजर्व बैंक ने डूबने से बचाया है. मार्च 2020 में आरबीआई ने यस बैंक को डूबने से बचाया था. प्लान के मुताबिक, सिंगापुर सरकार समर्थित डीबीएस बैंक लक्ष्मी विलास बैंक में 2,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगा. इसके तहत लक्ष्मी विलास बैंक की 560 शाखाओं के जरिये डीबीएस बैंक की पहुंच इसके होम, पर्सनल लोन और स्मॉल स्केल इंडस्ट्री लोन ग्राहकों तक हो जाएगी.



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    एलवीएस के श्‍रेयरहोल्‍डर्स को नहीं मिलेंगे पैसे
    विलय के बाद डीबीएस इंडिया को लक्ष्‍मी विलास बैंक की 563 शाखाओं, 974 एटीएम और रिटेल बिजनेस में 1.6 अरब डॉलर की फ्रेंचाइजी मिलेगी. वहीं, 94 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक की इक्विटी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. बैंक का पूरा डिपॉजिट डीबीएस इंडिया के पास चला जाएगा. ऐसे में बैंक के शेयर होल्डर्स को पैसा नहीं मिलेगा. बता दें कि आरबीआई ने लक्ष्मी विलास बैंक पर इसी महीने 1 महीने का मोरेटोरियम लागू किया था. उसने बैंक के ग्राहकों के लिए पैसे निकालने की सीमा भी तय कर दी. बैंक के ग्राहक अपने खाते से 25,000 रुपये से ज्यादा रकम नहीं निकाल सकेंगे. रिजर्व बैंक के अनुसार लक्ष्मी विलास बैंक की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ती रही है.

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