मोदी सरकार का बड़ा फैसला- खत्म किए 58 कानून और 137 कानूनों को खत्म करने की तैयारी

मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में अनावश्यक हो चुके 1824 पुराने कानूनों को खत्म करने के लिए काम शुरू किया है.

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 1:59 PM IST
मोदी सरकार का बड़ा फैसला- खत्म किए 58 कानून और 137 कानूनों को खत्म करने की तैयारी
मोदी सरकार का बड़ा फैसला- खत्म किए 58 कानून
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Updated: July 18, 2019, 1:59 PM IST
केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 58 कानून को खत्म कर दिया है. कैबिनेट की बैठक में उस बिल को भी मंजूरी दे दी, जिसमें प्रासंगिकता खो चुके 58 कानूनों को खत्म करने की बात कही गई है. मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में अनावश्यक हो चुके 1824 पुराने कानूनों को खत्म करने के लिए काम शुरू किया है. निरसन और संशोधन विधेयक 2019 को संसदीय मंजूरी मिलने के बाद अगले हिस्से में 137 कानूनों को खत्म किया जाएगा. जिन 58 कानूनों को खत्म किया जाएगा, तत्काल उनकी सूची उपलब्ध नहीं हो पाई है, लेकिन सरकार के सूत्रों ने कहा कि अधिकतर ऐसे कानून हैं जो प्रमुख और मुख्य कानूनों में संशोधन के लिए लागू किए गए थे.

इन कानूनों को किया खत्म-मोदी सरकार की ओर से खत्म किए गए कुछ पुराने कानूनों में घोड़ा गाड़ियों के नियमन और नियंत्रण के लिए बनाए गए हैकनी कैरिज एक्ट 1879 और ब्रिटिश शासन के खिलाफ नाटकों के जरिये होने वाले विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए बनाए गए ड्रामैटिक परफॉर्मेंस एक्ट 1876 शामिल हैं.

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>> लोकसभा द्वारा इसी तरह का खत्म किया गया एक अन्य कानून गंगा चुंगी कानून 1867 है, जो गंगा में चलने वाली नौकाओं और स्टीमरों पर चुंगी (12 आना से अधिक नहीं) वसूलने के लिए था.

>> एक बार इस तरह के 100 कानूनों को एक झटके में खत्म किया गया. साल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद पुराने कानूनों को खत्म करने के मामले को देखने के लिए दो सदस्यीय एक समिति गठित की गई थी.

>> समिति ने खत्म किए जाने वाले कानूनों की सिफारिश करते समय केंद्र और राज्य सरकारों से भी बात की थी.

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>> साल 1950 से लेकर 2001 के बीच 100 से अधिक कानूनों को खत्म किया गया है. एक बार इस तरह के 100 कानूनों को एक झटके में खत्म कर दिया गया.

>> सितंबर 2014 में विधि आयोग ने मुद्दे का अध्ययन करते हुए कहा था कि पिछले कई साल में पारित हुए अनेक विनियोग कानूनों की अब कोई जरूरत नहीं है. यानी असल में अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं, लेकिन वे कानूनी किताबों में लगातार बने हुए हैं.

 
First published: July 18, 2019, 12:08 PM IST
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