लाइव टीवी

सोने की जूलरी खरीदने का है आपका प्लान तो ठहरिए! बदलने वाला है ये नियम, सरकार ने दी मंजूरी

News18Hindi
Updated: October 5, 2019, 11:21 AM IST
सोने की जूलरी खरीदने का है आपका प्लान तो ठहरिए! बदलने वाला है ये नियम, सरकार ने दी मंजूरी
सोने की जूलरी खरीदने का है आपका प्लान तो ठहरिए! बदलने वाला है ये नियम, सरकार ने दी मंजूरी

अगर आपने सोने की जूलरी (Gold Jewellery) खरीदने जा रहे हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार ने सोने की जूलरी खरीद का नि‍यम बदलने की तैयारी कर ली है. इसका जूलरी इंडस्‍ट्री (Jewelry Industries) पर बहुत बड़ा असर पड़ने वाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2019, 11:21 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. अगर आपने सोने की जूलरी (Gold Jewellery) खरीदने जा रहे हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकार ने सोने की जूलरी खरीद का नि‍यम बदलने की तैयारी कर ली है. इसका जूलरी इंडस्‍ट्री (Jewelry Industries) पर बहुत बड़ा असर पड़ने वाला है. हालांकि‍ ग्राहकों को इससे फायदा होगा. आपको बात दें कि उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan, Cabinet Minister of Consumer Affairs) ने शुक्रवार को कहा कि वाणिज्य मंत्रालय ने सोने की जूलरी के लिए बीआईएस हॉलमार्किंग (BIS Hallmarking) को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. अब इसे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को सूचित करने के बाद ही लागू किया जा सकता है.

अब क्या होगा- रामविलास पासवान ने बताया कि वाणिज्य विभाग ने एक अक्टूबर को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसे लागू करने के पहले डब्ल्यूटीओ के संदर्भ में कुछ तकनीकी समस्या है. इसको जल्दी सुलझा लिया जाएगा.

>> मौजूदा समय में देश भर में लगभग 800 हॉलमार्किंग केंद्र हैं और सिर्फ 40 प्रतिशत आभूषणों की हॉलमार्किग की जाती है. भारत सोने का सबसे बड़ा आयातक देश है, जो मुख्य रूप से आभूषण उद्योग की मांग को पूरा करता है. भारत प्रति वर्ष 700-800 टन सोने का आयात करता है.



>> डब्ल्यूटीओ की ओर से तय किए नियमों के तहत, इस मामले में पहले उसको सूचित करना होगा. इस प्रक्रिया में लगभग दो महीने का समय लग सकता है.

>> आपको बता दें कि सोने की हॉलमार्किंग का मतलब उसकी शुद्धता का प्रमाण है और मौजूदा समय में इसे स्वैच्छिक आधार पर लागू किया गया है. WTO की ओर से मंजूरी मिलने के बाद इसे अनिवार्य बनाया जाएगा.

>> उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के पास हॉलमार्किंग के लिए प्रशासनिक अधिकार है. इसने तीन ग्रेड - 14 कैरट, 18 कैरट और 22 कैरट के सोने के लिए हॉलमार्किंग के लिए मानक तय किए हैं.
Loading...

ग्राहकों को मिलेगा सीधा फायदा- अभी देश में सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग करना स्वैच्छिक है. हालांकि इस नियम के लागू हो जाने के बाद सभी जूलर्स को इन्हें बेचने से पहले हॉलमार्किंग लेना अनिवार्य हो जाएगा.



अभी तक देश में स्वर्ण आभूषणों में सोने की गुणवत्ता को लेकर कोई कसावट नहीं है. ऐसे में अनजान ग्राहकों को कई मौकों पर 22 कैरेट की बजाय 21 या अन्य अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों से कम कैरेट का सोना बेच दिया जाता है, जबकि दाम उनसे अच्छी गुणवत्ता वाले सोने के वसूले जाते हैं.

हॉलमार्किंग के सही ना होने की स्थिति में उन्हें पहले चरण में नोटिस जारी किया जाएगा. मौजूदा नियमों में हॉलमार्किंग केंद्र खोलने के लिए स्वर्णकारों को 10,000 रुपये का शुल्क देना होगा. यह केंद्र हरेक आभूषण पर 35 रुपये का शुल्क लेता है.

क्या होती है हॉलमार्किंग- हॉलमार्किंग से जूलरी में सोने कितना लगा है और अन्य मेटल कितने है इसके अनुपात का सटीक निर्धारण एवं आधिकारिक रिकार्ड होता है.नए नि‍यमों के तहत अब सोने की जूलरी की हॉल मार्किंग होना अनि‍वार्य होगा. इसके लि‍ए ज्‍वैलर्स को लाइसेंस  लेना होगा.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 5, 2019, 10:19 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...