ऑटो सेक्टर के लिए आ रहा है राहत पैकेज! पुरानी कार बेचने पर 20 हजार रुपये देने की तैयारी

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Updated: August 21, 2019, 2:57 PM IST

CNBC आवाज को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक सरकार पुरानी गाड़ियों के लिए स्क्रैपेज पॉलिसी का ऐलान कर सकती है. 10 साल पुरानी कॉमर्शियल गाड़ियां बेचने पर 50 हजार रुपये तक की छूट भी देने की तैयारी है.

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  • Last Updated: August 21, 2019, 2:57 PM IST
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देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सरकार ऑटो सेक्टर (Auto Sector Crisis) के लिए राहत पैकेज का ऐलान कर सकती है. CNBC आवाज को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, ऑटो सेक्टर को लेकर सरकार 5 प्रस्ताव पर विचार कर रही है. मोदी सरकार (Modi Govenrment) ने पिछले हफ्ते ऑटो कंपनियों (Auto Companies) के अधिकारियों के साथ मुलाकात की थी. इसके बाद अब माना जा रहा है कि सरकार पुरानी गाड़ियों के लिए स्क्रैपेज पॉलिसी (Auto Scrap age Policy) का ऐलान कर सकती है. 10 साल पुरानी कॉमर्शियल गाड़ियां (Commercial Vehicles) बेचने पर 50 हजार रुपये तक की छूट भी देने की तैयारी है. वहीं, 7 साल पुरानी दो पहिया और तिपहिया बेचने पर 5000 रुपये तक की छूट दी जा सकती है. इसके अलावा नई गाड़ियां खरीदने पर ही छूट दी जाएगी.

(1) प्रस्ताव-पुरानी गाड़ियों के लिए एक स्क्रैपेज पॉलिसी आ सकती है. सूत्रों के मुताबिक, 10 साल पुरानी कॉमर्शियल गाड़ियां बेचने पर 50 हजार रुपये तक की छूट मिलेगी. 10 साल पुरानी पैसेंजर कार बेचने पर 20 हजार रुपये तक की छूट देने का प्रस्ताव है. वहीं, 7 साल पुराने 2-व्हीलर्स और 3-व्हीलर्स बेचने पर 5000 रुपये तक की छूट मिल सकती है. लेकिन ये छूट नई गाड़ियां खरीदने पर ही मिलेगी.

(2) प्रस्ताव: सूत्रों की मानें तो वन टाइम रजिस्ट्रेशन चार्जेज़ में की गई बढ़ोतरी मार्च 2020 तक टाली जा सकती है. आपको बता दें कि पेट्रोल डीजल वाली नई कारों की रजिस्ट्रेशन फीस 600 से बढ़ाकर 5000 रुपये करने का प्रस्ताव था. पेट्रोल डीज़ल वाली पुरानी कारों के रजिस्ट्रेशन रिन्यूवल चार्ज बढ़ाकर 15000 रुपये करने का प्रस्ताव था



(3) प्रस्ताव: सरकार  मार्च 2020 तक 15 फीसदी का एडिशनल डेप्रिसिएशन देने पर विचार कर सकती है. इससे ऑटो कंपनियों को मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा बढ़ जाएगा.



(4) प्रस्ताव: सरकार ऑटो सेक्टर के लिए जीएसटी की दरें 28 परसेंट से घटाने पर विचार भी कर रही है.
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केंद्र सरकार जीएसटी काउंसिल में ये प्रस्ताव रख सकती है. जीएसटी काउंसिल में सहमति बनने पर ही फैसला होगा.

(5) प्रस्ताव: ईलेक्ट्रिक गाड़ियों को जरूरी करने की मियाद भी बढ़ाई जा सकती है.आपको बता दें कि ऑटो इंडस्ट्री में लगातार 9वें महीने गिरावट दर्ज की गई है. ब्रिकी के लिहाज़ से जुलाई का महीना बीते 18 साल में सबसे खराब रहा. इस दौरान बिक्री में 31 फीसदी की गिरावट आई.

सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबिल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मुताबिक जुलाई में बीते नौ महीने के दौरान सबसे कम 2,00,790 वाहनों की बिक्री ही हुई. सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर कहते हैं कि इस इंडस्ट्री को तुरंत एक राहत पैकेज की ज़रूरत है. उनका कहना है कि जीएसटी की दरों में अस्थायी कटौती से भी इंडस्ट्री को कुछ राहत मिल सकती है.

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इन छोटी कंपनियों पर भी पड़ता असर-इस मंदी का प्रभाव गाड़ियों के कलपुर्जे बनाने वाली सहायक कंपनियों पर भी हुआ है. टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड के लिए सस्पेंशन (शॉकर) बनाने वाली जमना ऑटो इंडस्ट्री ने कहा कि कमज़ोर मांग के चलते अगस्त में वो अपने सभी नौ प्रोडक्शन प्लांट को बंद कर रहे हैं.

कारों और मोटरसाइकिलों की बिक्री में कमी से ऑटो सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियों की कटौती हो रही है. कई कंपनियां अपने कारखानों को बंद करने के लिए मजबूर हैं. इंडस्ट्री के शुरुआती अनुमानों से पता चलता है कि व्हीकल प्रोडक्शन, ऑटो एंसिलरी और डीलर्स अप्रैल अब तक करीब 3,50,000 कर्मचारियों की छंटनी कर चुके हैं.

लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक-पॉलिसी एडिटर, CNBC आवाज़

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First published: August 21, 2019, 1:35 PM IST
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