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जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल ने इस्तीफा दिया, लेनदारों के रेजॉल्यूशन प्लान को बोर्ड की मंजूरी

जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल ने इस्तीफा दिया, लेनदारों के रेजॉल्यूशन प्लान को बोर्ड की मंजूरी

जेट एयरवेज (Jet Airways) के चेयरमैन नरेश गोयल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. कंपनी ने एक्सचेंज को नरेश गोयल के इस्तीफे की औपचारिक तौर पर जानकारी दे दी है.

    कर्ज निपटारे की दिक्कतों से जूझ रही जेट एयरवेज (Jet Airways) के बोर्ड से एयरलाइन के फाउंडर और प्रोमोटर नरेश गोयल ने इस्तीफा दे दिया है. कंपनी ने एक्सचेंज को नरेश गोयल के इस्तीफे की औपचारिक तौर पर जानकारी दे दी है. आज जेट के बोर्ड की अहम बैठक थी जहां ये खबर निकल कर आई है. खबरें हैं कि अनीता गोयल ने भी बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है. साथ ही लेनदारों के रेजॉल्यूशन प्लान को भी बोर्ड से मंजूरी मिल गई है. यानी लेनदार अब जेट एयरवेज में करीब 1500 करोड़ रुपये की पूंजी डालेंगे. (ये भी पढ़ें: PHOTOS: दुनिया के दूसरे सबसे अमीर शख्स को मिली भारतीय दानवीर से प्रेरणा, अब तक 1.45 लाख करोड़ कर चुका है दान)

    जेट एयरवेज के लेंडर्स के कर्ज को 11.4 करोड़ इक्विटी शेयरों में बदला जाएगा. एतिहाद के एक नॉमिनी डायरेक्टर ने भी इस्तीफा दे दिया है. कंपनी के डेली ऑपरेशन को देखने के लिए एक अंतरिम मैनेजमेंट कमेटी बनाई गई है. कर्जदार कंपनी के शेयरों को निवेशकों को बेचने की प्रक्रिया शुरू करेगी. ये प्रक्रिया जून तिमाही में खत्म होगी.

    SBI के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि 2 महीने के भीतर जेट एयरवेज को 1500 करोड़ रुपये की फंडिंग मिलेगी. जेट एयरवेज में एतिहाद को 12 फीसदी हिस्सेदारी मिल सकती है.



    जेट एयरवेज पर 8 हजार करोड़ कर्ज
    फिलहाल जेट एयरवेज पर कुल 26 बैंकों का कर्ज है. इसमें कुछ प्राइवेट और विदेशी बैंक भी शामिल हैं. पब्लिक सेक्टर बैंक में केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सिंडिकेट बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, इलाहबाद बैंक शामिल हैं. अब इस लिस्ट में एसबीआई और पीएनबी का नाम भी जुड़ जाएगा. एयरलाइंस पर करीब 8 हजार करोड़ का कर्ज है. जेट के पायलट पहले ही अल्टीमेटम दे चुके हैं कि अगर 31 मार्च तक उनका बकाया नहीं दिया गया तो वह किसी फ्लाइट को नहीं उड़ाएंगे.

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    1974 में शुरू की थी जेट एयरवेज
    जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल ने बेहद कठिन परिस्थिति में अपनी मां के जेवर बेचकर ट्रैवल एजेंसी शुरू की थी. नरेश गोयल ने 1967 में अपनी मां के एक चाचा की एजेंसी में कैशियर के रूप में काम शुरू किया था. तब उन्हें 300 रुपए सैलरी मिलती थी. यहां काम करते हुए रॉयल जॉर्डन एयरलाइंस जैसे कई बड़ी कंपनियों में काम करने का मौका मिला. 1974 को उन्होंने अपनी ट्रैवल एजेंसी शुरू की और उसका नाम जेट एयरवेज रखा.

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    ट्रैवल एजेंसी शुरू करने के लिए नहीं थे पैसे
    ट्रैवल एजेंसी शुरू करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे. उन्होंने अपनी मां से बात की. मां ने अपने जेवर देकर कहा, इन्हें बेच दो. जेवर बेचने से उन्हें करीब 15 हजार रुपए मिले. उन्होंने 10 हजार रुपए से जेट एयर शुरू की.

    साल 1991 के बाद जेट एयरवेज के लिए रास्ता खुलना शुरू हुआ. जब भारत सरकार ने ओपन स्काई पॉलिसी को हरी झंडी दी और नरेश गोयल ने इस मौके का फायदा उठाया और डोमेस्टिक ऑपरेशन के लिए 1993 में जेट एयरवेज की शुरुआत की. कंपनी लगातार अपने काम को बढ़ाती रही और एक वक्त पर जब कंपनी अपने शीर्ष पर थी तब नरेश गोयल देश के 20 सबसे अमीर शख्सियत में शुमार हुआ करते थे.

     

    25 साल बाद देश की सबसे पुरानी प्राइवेट एयरलाइन जेट एयरवेज की कमान इसके फाउंडर नरेश गोयल के हाथों से निकल गई है. जेट पर बैंकों का 8,200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है.

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    Tags: Airlines, Business news in hindi, Flight service, Jet airways, Travel by flight, Trending news

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