इस छोटी सी कंपनी में बनता है लाल किले पर फहराया जाने वाला तिरंगा झंडा, यहां जानिए इससे जुड़े सभी राज़

देश के कर्नाटक राज्य के हुबली शहर में स्थित बेंगेरी इलाके में कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्‍त संघ यानी KKGSS देश का राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’ बनाने का काम करती है.

News18Hindi
Updated: August 15, 2019, 1:56 PM IST
इस छोटी सी कंपनी में बनता है लाल किले पर फहराया जाने वाला तिरंगा झंडा, यहां जानिए इससे जुड़े सभी राज़
इस छोटी सी कंपनी में बनता है लाल किले पर फहराया जाने वाला तिरंगा झंडा, यहां जानिए इससे जुड़े सभी राज़
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Updated: August 15, 2019, 1:56 PM IST
भारत अपने 73वें स्‍वतंत्रता दिवस (73rd Independence Day) का जश्‍न मना रहा है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले स्‍वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्‍त को राष्ट्रीय राजधानी दिल्‍ली (Delhi) के लाल किले (Red Fort) पर राष्‍ट्रीय ध्‍वज ‘तिरंगा’ फहराया. लेकिन देश के तिरंगे झंडे से जुड़ी खास बातों को कम ही जानते है. जैसे राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और सभी सरकारी बिल्डिंगों पर फहराए जाने वाले झंडे कहां बनते है और इसे बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल होता है.

आइए जानें अपने देश के तिरंगे झंडे के बारे में...

>> फर्स्टपोस्ट में छपी खबर के मुताबिक, देश के कर्नाटक राज्य के हुबली शहर में स्थित बेंगेरी इलाके में कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्‍त संघ यानी KKGSS देश का राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’ बनाने का काम करती है.

>> यह देश के इकलौती कंपनी है जो तिरंगा झंडा बनाती है. KKGSS खादी और विलेज इंडस्‍ट्रीज कमीशन द्वारा सर्टिफाइड इकलौती ऑथराइज्‍ड नेशनल फ्लैग मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट है. मतलब साफ है कि इस कंपनी के अलावा देश में कोई भी तिरंगा झंडा नहीं बना सकता है.

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देश के कर्नाटक राज्य के हुबली शहर में स्थित बेंगेरी इलाके में कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्‍त संघ यानी KKGSS देश का राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’ बनाने का काम करती है. (फाइल फोटो)


>> आपको बता दें कि KKGSS की स्‍थापना नवंबर 1957 में हुई थी. इसने 1982 से खादी बनाना शुरू किया.
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>> साल 2005-06 में इसे ब्‍यूरो ऑफ इंडियन स्‍टैंडर्ड्स (BIS) से सर्टिफिकेशन मिला और इसने तिरंगा झंडा बनाना स्टार्ट किया.

>> भारत में जहां भी किसी सरकारी इमरात या फिर किसी अन्य जगह पर राष्‍ट्रीय ध्‍वज इस्‍तेमाल होता है. वहां, पर KKGSS के बने झंडे ही इस्तेमाल किए जाते हैं.

>> आपको बता दें कि विदेशों में मौजूद इंडियन एंबेसीज यानी भारतीय दूतावासों के लिए भी यहीं से तिरंगे बनकर जाते हैं.

>> देश में कोई ऑर्डर देकर कुरियर के जरिए ​राष्ट्रीय ध्वज KKGSS खरीद सकता है.

गलती होने पर जेल का प्रावधान-फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के प्रावधानों में साफ कहा गया है कि अगर झंडे की मैन्‍युफैक्‍चरिंग में रंग, साइज या धागे को लेकर किसी भी तरह का डिफेक्‍ट होता है तो ये एक गंभीर अपराध है और ऐसा होने पर जुर्माना या जेल या दोनों हो सकते हैं.

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>> KKGSS में बनने वाले राष्ट्रीय ध्वज की क्वालिटी को BIS चेक करता है और इसमें थोड़ा सा भी डिफेक्ट होने पर रिजेक्ट कर देता है.

>> कंपनी की ओर से बनाए जाने वाले तिरंगों में से लगभग 10 फीसदी रिजेक्‍ट होते हैं. हर सेक्‍शन पर कुल 18 बार तिरंगे की क्‍वालिटी चेक की जाती है. राष्ट्रीय ध्वज को कुछ मानकों पर खरा उतरना होता है.

KKGSS की बागलकोट यूनिट में हाई क्‍वालिटी के कच्‍चे कॉटन (सूती धागे) से तिरंगा झंडा बनाया जाता है. (फाइल फोटो)


कैसे बनता है देश का तरिंगा झंडा- KKGSS की बागलकोट यूनिट में हाई क्‍वालिटी के कच्‍चे कॉटन (सूती धागे) से इसे बनाया जाता है.

>> यहां पर धागा हाथ से मशीनों के अलावा चरखे का इस्तेमाल कर बनाया जाता है. इसके अलावा गाडनकेरी, बेलॉरू, तुलसीगिरी यूनिट में कपड़ा तैयार होता है.

>> इन सब के बाद KKGSS की हुबली यूनिट में कपड़े की डाइंग और अन्य प्रॉसेस पूरे किए जाते है. आपको बता दें कि तिरंगे झंडे के लिए तैयार किया जाने वाला कपड़ा जीन्स से भी ज्यादा मजबूत होता है.

फर्स्टपोस्ट
First published: August 15, 2019, 12:13 PM IST
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