एक दशक के निचले स्‍तर पर पहुंचेंगी नेचुरल गैस की कीमतें! सस्ता हो सकता है CNG व PNG

एक दशक के निचले स्‍तर पर पहुंचेंगी नेचुरल गैस की कीमतें! सस्ता हो सकता है CNG व PNG
नेचुरल गैस की कीमतों में छमाही आधार पर संशोधन किया जाता है. अनुमान है कि 1 अक्‍टूबर को देश में नेचुरल गैस का भाव बहुत नीचे पहुंच जाएगा.

प्राकृतिक गैस निर्यातक देशों (Natural Gas Exporters) की बेंचमार्क दरों में बदलाव के हिसाब से भारत में गैस का दाम (Gas Prices in India) घटकर 1.90-1.94 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) रह जाएगा. इससे एक तरफ आम लोगों को फायदा मिल सकता है. वहीं, ओएनजीसी (ONGC) की कमाई पर बुरा असर पड़ेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 16, 2020, 6:38 PM IST
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नई दिल्ली. देश में प्राकृतिक गैस के दामों (Natural Gas Prices) में बड़ी गिरावट आ सकती है. इससे ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) जैसी गैस उत्पादक कंपनियों की कमाई (Revenue) पर बुरा असर पड़ सकता है. अनुमान के मुताबिक, भारत में अक्टूबर से प्राकृतिक गैस की कीमत घटकर 1.90-1.94 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू पर आ सकती है. यह देश में एक दशक से अधिक समय में प्राकृतिक गैस की कीमतों का सबसे निचला स्तर होगा. बता दें कि इस समय देश की गैस उत्‍पादक कंपनियां पहले से ही भारी नुकसान में हैं. हालांकि, उम्‍मीद की जा सकती है कि नेचुरल गैस के दामों में कमी से सीएनजी, एलपीजी और पीएनजी की कीमतें घटेंगी.

गैस निर्यातक देशों की बेंचमार्क दरों में बदलाव से घटेंगी कीमतें
सूत्रों के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2020 से प्राकृतिक गैस की कीमतों में संशोधन होना है. गैस निर्यातक देशों (Natural Gas Exporters) की बेंचमार्क दरों में बदलाव के हिसाब से गैस का दाम घटकर 1.90 से 1.94 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) रह जाएगा. अगर ऐसा होता है तो एक साल में यह प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगातार तीसरी कटौती होगी. इससे पहले अप्रैल में नेचुरल गैस की कीमतों में 26 फीसदी की बड़ी कटौती की गई थी. इससे नेचुरल गैस के दाम घटकर 2.39 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू रह गए थे.

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एलपीजी, सीएनजी के तौर पर होता है नेचुरल गैस का इस्‍तेमाल


प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल उर्वरक और बिजली उत्पादन में होता है. इसके अलावा इसे सीएनजी में बदला जाता है, जिसका इस्तेमाल वाहनों में होता है. साथ ही रसोई गैस के रूप में भी इसे इस्तेमाल में लाया जाता है. गैस के दाम छह महीने के अंतराल पर 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को तय किए जाते हैं. सूत्रों के मुताबिक, गैस की कीमतों में कटौती का मतलब है कि देश की सबसे बड़ी तेल व गैस उत्पादक ओएनजीसी का घाटा बढ़ जाएगा. ओएनजीसी को 2017-18 में गैस कारोबार में 4,272 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. चालू वित्त वर्ष में इसके बढ़कर 6,000 करोड़ रुपये पर पहुंचने का अनुमान है.

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अभी एक दशक के निचले स्‍तर पर है नेचुरल गैस की कीमत
ओएनजीसी को प्रतिदिन 6.5 करोड़ घनमीटर गैस के उत्पादन पर नुकसान हो रहा है. केंद्र सरकार ने नवंबर, 2014 में नया गैस मूल्य फॉर्मूला पेश किया था. यह अमेरिका, कनाडा और रूस जैसे गैस अधिशेष वाले देशों के मूल्य केंद्रों पर आधारित है. इस समय गैस का दाम 2.39 डॉलर प्रति इकाई है, जो पिछले एक दशक से अधिक समय में सबसे कम है. सूत्रों ने बताया कि ओएनजीसी ने हाल में सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि नई खोजों से गैस उत्पादन में 5-9 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू का दाम होने पर ही वह लाभ की स्थिति में रह सकती है. सरकार ने मई 2010 में बिजली और उर्वरक कंपनियों को बेची जाने वाली गैस का दाम 1.79 डॉलर प्रति इकाई से बढ़ाकर 4.20 डॉलर प्रति इकाई किया था.

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हर छह महीने पर संशोधन की व्‍यवस्‍था के बाद घटते गए दाम
ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को गैस उत्पादन के लिए 3.818 डॉलर प्रति इकाई का दाम मिलता था. इसमें 10 फीसदी रॉयल्टी जोड़ने के बाद उपभोक्ताओं के लिए इसकी लागत 4.20 डॉलर बैठती थी. कांग्रेस के नेतृत्‍व वाली यूपीए सरकार ने एक नए मूल्य फॉर्मूला को मंजूरी दी थी, जिसका क्रियान्वयन 2014 से होना था. इससे गैस के दाम बढ़ जाते. लिहाजा, भाजपा के नेतृत्‍व वाली एनडीए सरकार ने इसे रद्द कर नया फॉर्मूला पेश किया. इसके जरिये पहले संशोधन के समय गैस के दाम 5.05 डॉलर प्रति इकाई रहे. इसके बाद छमाही संशोधन में गैस के दाम नीचे आते रहे.
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