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नवरात्रि वेल्थ स्पेशल: मां चंद्रघंटा की कहानी नहीं समझी तो निवेश में आप भी खाएंगे मात!

विकट परिस्थितियों में खुद से कोई फैसले लेने से पहले इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श करें.

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नवरात्रि का तीसरा दिन देवी के चंद्रघंटा स्वरूप को समर्पित है. मां चंद्रघंटा की कथा से निवेश के संबंध में जो पाठ हमें सी ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

कथा के अनुसार, देवी के इस रूप को शांतिप्रिय और सहजता का प्रतीक माना जाता है.
कथा को गहराई से देखें तो निवेश में इसकी व्याख्या डायवर्सिफिकेशन के साथ की जा सकती है.
निवेश में जोखिम को मैनेज करने का सबसे अच्छा तरीका डायवर्सिफिकेशन है.

नई दिल्ली. नवरात्रि का तीसरा दिन देवी के चंद्रघंटा स्वरूप को समर्पित है. देवी मां की कृपा से धन-दौलत और खुशहाली पाने के प्रयास तो बहुत लोग करते हैं, परंतु सबको ये सुख मिल नहीं पाते. हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि खुशहाल होना नामुमकिन है. इसे अचीव करने के लिए कुछ प्रयास तो व्यक्ति को खुद भी करने होंगे. मां की कृपा से सब-कुछ पाने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए हम एक खास सीरीज़ चला रहे हैं, जिसे “नवरात्रि Wealth स्पेशल” का नाम दिया गया है.

इस स्पेशल सीरीज में हम आपको हर दिन देवी के विभिन्‍न स्वरूपों के माध्यम से अमीर होने और शांति पाने के टिप्स देते हैं. आज सीरीज का तीसरा दिन है. इसलिए आज हम बात करेंगे ‘मां चंद्रघंटा’ और उनकी कथा से जुड़े निवेश के पाठ (Lesson) की. मां चंद्रघंटा की कथा अपने अंदर निवेशकों के लिए अहम संदेश समाए हुए है. इसे आपको बतौर तीसरा अध्याय ही समझना होगा. यदि आपने पहले के 2 भाग नहीं पढ़े हैं तो शायद आपको ये बात आसानी से समझ न आए, बिलकुल किसी वेब-सीरीज की तरह. इसलिए आप दोनों भाग (देवी शैलपुत्री और देवी ब्रह्माचारिणी) से जुड़े पाठ भी पढ़ लें, लिंक नीचे दिए हैं-
1. निवेश की शुरुआत मुश्किल, लेकिन चल पड़े तो बरसेगी कृपा
2. गिरते बाजार में याद रखें मां ब्रह्माचारिणी का ये मंत्र

पहले कथा समझें और फिर उसका अर्थ
Drikpanchang डॉट कॉम के अनुसार, भगवान शिव से विवाह के बाद देवी पार्वती ने अपने माथे पर अर्ध-चंद्र सजाना शुरू कर दिया. यह अर्ध-चंद्र आधे घंटे की तरह प्रतीत होता है. इसी वजह से देवी के इस स्वरूप को चंद्रघंटा के नाम से जाना गया. देवी के इस रूप को शांतिप्रिय और सहजता का प्रतीक माना जाता है.

देवी चंद्रघंटा बाघ की सवारी करती हैं. वह अपने माथे पर अर्ध-गोलाकार चंद्रमा (चंद्र) सजाती है. देवी को 10 हाथों का चित्रण किया गया है. देवी चंद्रघंटा अपने 4 बाएं हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार और कमंडल रखती हैं और पांचवें बाएं हाथ को वरद मुद्रा में रखती हैं. वह अपने 4 दाहिने हाथों में कमल का फूल, तीर, धनुष और जप माला धारण करती है और पांचवें दाहिने हाथ को अभय मुद्रा में रखती है.

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निवेश में डायवर्सिफिकेशन का पाठ
इस कथा से निवेश के संबंध में जो पाठ हमें सीखने को मिलता है, वह है विविधता अर्थात डायवर्सिफिकेशन (Diversification) का. देवी के 10 हाथ बताए गए हैं और दसों हाथों में अलग-अलग चीजों का वर्णन है. इसका मतलब कुछ यूं समझा जा सकता है कि निवेश के समय भी डायवर्सिफिकेशन का ध्यान रखा जाना चाहिए.

चूंकि ये देवी पार्वती का विवाहित रूप है तो कहा जा सकता है कि यह अधिक समझदारी और मैच्योरिटी का प्रतीक भी है. निवेश में मैच्योरिटी का मतलब ये है कि आप किसी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए. एक्सपर्ट आपको कभी भी किसी एक इंस्ट्रूमेंट में निवेश करने को नहीं कहता. वह कहता है कि आपको अपने पैसे को अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना चाहिए, जैसे इक्विटी, डेट फंड्स, सोना-चांदी इत्यादी. इसका फायदा ये होगा कि यदि एक मार्केट कमजोर होगा तो दूसरा आपके निवेश को बैलेंस कर लेगा.

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क्यों किया जाता है डायवर्सिफिकेशन

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दरअसल, जोखिम को मैनेज करने का सबसे अच्छा तरीका डायवर्सिफिकेशन है. सभी एसेट्स एक साथ नहीं गिरते हैं. इसे एक सिंपल उदाहरण से समझिए. यदि आप किन्हीं 5 कंपनियों के शेयर खरीदते हैं और उम्मीद करते हैं ये सब ऊपर ही जाएं तो आप गलत है. संभव है कि इनमें से 2 कंपनियों के शेयर गिरें और 3 के ऊपर जाएं. यदि 3 कंपनियों के शेयर 10 फीसदी के हिसाब से बढ़ें और बाकी दो कंपनियां के शेयर 15 फीसदी गिर जाएं, तो आपको न लाभ होगा, न नुकसान. यदि आपने केवल उन्हीं 2 कंपनियों के शेयर्स में पैसा लगा दिया, जो गिरी हैं, तो आपका पैसा डूब जाएगा.

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शेयरों में पैसा लगाते समय भी इंडस्ट्री के आधार पर डायवर्सिफिकेशन किया जाता है. अर्थात अलग-अलग सेक्टर के अच्छे शेयर निवेश के लिए चुने जाते हैं. इसी तरह बड़े स्तर पर जब निवेश होता है तो शेयर बाजार के अतिरिक्त, डेट फंड्स और सोना व चांदी में निवेश करके उसे बैलेंस किया जाता है.

मां चंद्रघंटा की कथा से निवेश के सबक
1. निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूरी.
2. निवेश किसी एक जगह पर न करके, डायवर्सिफाइड किया जाना चाहिए.
3. विकट परिस्थितियों में खुद से कोई फैसले लेने से पहले इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श करें.
4. निवेश करने के बाद आपको मैच्योरिटी का परिचय देना चाहिए और शांत रहना चाहिए.

नवरात्रि के चौथे दिन कूष्मांडा देवी की आराधना होती है. कल, 29 सितंबर 2022, को आप मां कूष्मांडा की कथा से संबंधित निवेश का फसलफा जानेंगे.

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