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नवरात्रि वेल्थ स्पेशल: मां कूष्मांडा की मुस्कुराहट में छिपा फाइनेंशियल प्लानिंग का राज, जानिए

देवी कूष्मांडा को ऊर्जा का अनंत स्रोत माना जाता है.

देवी कूष्मांडा को ऊर्जा का अनंत स्रोत माना जाता है.

देवी कूष्मांडा को ऊर्जा का अनंत स्रोत माना जाता है और वही हैं जो सूर्य के मध्य में रहने की क्षमता से परिपूर्ण हैं. उन्ह ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

फाइनेंशियल प्लानिंग के मुख्य रूप से 3 भाग हैं. 1. लाइफ इंश्योरेंस, 2. हेल्थ इंश्योरेंस, और 3. सेविंग्स.
बीमारी पर अपनी सेविंग्स लुटाने से बेहतर है कि हेल्थ इंश्योरेंस लिया जाए.
परिवार के मुखिया की मृत्यु की स्थिति में लाइफ इंश्योरेंस परिवार का आर्थिक सहारा बन सकता है.

नई दिल्ली. देवी कूष्मांडा को नवरात्रि के चौथे दिन पूजा जाता है. कहा जाता है कि मां कूष्मांडा की हल्की-सी मुस्कुराहट से ही इस पूरे ब्रह्माण्ड की रचना हुई है. यदि मां कूष्मांडा की कृपा न होती तो यह जगत होता ही नहीं. यही वजह है कि नवरात्रि के अहम 9 दिनों में मां कूष्मांडा का अहम स्थान है.

न्यूज़18 की “नवरात्रि वेल्थ स्पेशल” सीरीज़ में आज हम मां कूष्मांडा की कथा के जोड़कर निवेश के बारे में एक जरूरी जानकारी शेयर करेंगे. यह सीरीज का चौथा भाग है. इससे पहले 3 दिनों अथवा तीन भागों में हम निवेश की शुरुआत, गिरावट के दिनों में शेयर बाजार, और निवेश में डायवर्सिफिकेशन के बारे में पढ़ चुके हैं. ये तीनों अहम सबक हमें पहली तीन देवियों के माध्यम से सीखने को मिलते हैं. यदि आपने अब तक पिछले 3 भाग नहीं पढ़े हैं तो उन्हें आप पढ़ सकते हैं. लिंक नीचे दिए गए हैं-
तीसरा भाग – क्यों जरूरी है निवेश में डायवर्सिफिकेशन
दूसरा भाग – गिरते बाजार में याद रखें मां ब्रह्माचारिणी का ये मंत्र
पहला भाग – निवेश की शुरुआत मुश्किल, लेकिन चल पड़े तो बरसेगी कृपा

क्या है मां कूष्मांडा की कहानी
Drikpanchang के अनुसार, ब्रह्माण्ड की रचना के लिए भगवान रुद्र ने आदि-पराशक्ति की आराधना की. माना जाता है कि आदि-पराशक्ति उस समय किसी भी रूप में नहीं थीं. ऊर्जा अथाव शक्ति की सबसे बड़ी देवी, आदि-पराशक्ति, भगवान शिव के बाएं हाथ से देवी सिद्धिदात्रि के रूप में प्रकट हुईं.

परमशक्ति द्वारा मां सिद्धिदात्रि के रूप में प्रकट होने के बाद वे सूर्य के मध्य (Center) में रहने लगीं, ताकि वे ब्रह्माण्ड (यूनिवर्स) को ऊर्जा दे पाएं. यह भी माना जाता है कि उन्होंने अपनी हल्की-सी मुस्कान से इस विश्व को बनाया. तब से उन्हें देवी कूष्मांडा के नाम से जाना जाने लगा. देवी कूष्मांडा को ऊर्जा का अनंत स्रोत माना जाता है और वही हैं जो सूर्य के मध्य में रहने की क्षमता से परिपूर्ण हैं.

मुस्कुराहट में छिपी है बड़े राज की बात
इंसान के तौर पर हम तपते हुए सूर्य के मध्य में रहने से अभिप्राय तमाम मुसीबतों के बीच रहने को मान सकते हैं. अपने परिवार को ऊर्जा देने के लिए आप निरंतर तपते हैं. जिनके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी होती है, उनके चेहरे पर आप मुस्कान भी पाएंगे, क्योंकि वे अपनी तकलीफ को छिपाने के लिए मुस्कुराहट का ही सहारा लेते हैं.

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यही बात देवी की कृपा पाने अथवा धन-दौलत बनाने पर भी लागू होती है. हर व्यक्ति चाहता है कि उसका परिवार खुशहाल रहे. पैसे की कमी न हो. पर इस चाहत को पूरा करने के लिए कुछ समझौते तो करने ही होंगे. जिस तरह देवी कूष्मांडा ने सूर्य के बीच रहकर संसार को ऊर्जा दे रही हैं, उसी प्रकार हमें भी अपने परिवार को शक्ति देते रहना है. परंतु इंसान के साथ किसी भी समय कोई अनहोनी घटना हो सकती है. यदि कोई अनहोती होती है तो आपके परिवार का क्या होगा? हर इंसान को ऐसी प्लानिंग करनी चाहिए कि यदि वह न भी रहे तो उसके परिवार को ऊर्जा मिलती रहे मतलब उनके चेहरे पर हमेशा के लिए उदासी और तंगहाली न छा जाए.

तो ऐसा करने का उपाय क्या है?
हमने इसी सीरीज के लगभग हर भाग में वित्तिय योजना (फाइनेंशियल प्लानिंग) के बारे में बात की है. और यही प्लानिंग ही सबसे बेहतर उपाय है. फाइनेंशियल प्लानिंग के मुख्य रूप से 3 भाग हैं. 1. लाइफ इंश्योरेंस, 2. हेल्थ इंश्योरेंस, और 3. सेविंग्स.

सेविंग्स की शुरुआत कैसे करनी है और किस तरीके से आगे बढ़ना है, इसका जिक्र हम पिछले 3 भागों में कर चुके हैं. यदि आपने उन्हें नहीं पढ़ा है तो एक बार पढ़ लीजिए, बहुत कुछ क्लीयर हो जाएगा. आज हम बात कर रहे हैं लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस की.

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आज के समय में व्यक्ति का सबसे अधिक पैसा तब खर्च होता है, जब वह या उसके परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ जाए. लाखों रुपये तक खर्च हो सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि हेल्थ इंश्योरेंस जरूर लें. हेल्थ इंश्योरेंस से आप इलाज पर होने वाला बड़ा खर्च बचा सकते हैं. किस कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस लेना चाहिए, कितने प्रीमियम वाला इंश्योरेंस ठीक होगा, ये चीजें आपको खुद तय करनी हैं. आप किसी फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह ले सकते हैं.

इसके अलावा, आपके पास एक लाइफ इंश्योरेंस भी होना चाहिए. इसे टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) भी कहते हैं. इसमें काफी कम प्रीमियम में बहुत अच्छा कवर मिल जाता है. परिवार के लिए कमाने वाले की मृत्यु होने की स्थिति सबसे खराब है, क्योंकि इसके बाद परिवार के सभी लोग बुरी तरह से प्रभावित होते हैं. बच्चों की पढ़ाई वैसी नहीं हो पाती, जैसा कि प्लान किया गया था. घर वैसा नहीं बन पाता, जैसा बनाने की योजना थी. इसलिए, लाइफ इंश्योरेंस बेहद महत्वूर्ण है. यदि व्यक्ति की असमय मृत्यु हो जाए तो टर्म इंश्योरेंस के तहत मृतक के परिवार को अच्छी-खासी रकम मिल जाती है. ऐसा होने से बच्चों की पढ़ाई और घर के सामान्य खर्च चलते रह सकते हैं.

मां कूष्मांडा की कथा से सबक
1. परिस्थितियां कैसी भी हों, पॉजिटिव रहें. मुस्कुराहट सबसे अहम है.
2. हेल्थ इंश्योरेंस होना बेहद जरूरी है, ताकि इलाज पर सबकुछ लुट न जाए.
3. लाइफ इंश्योरेंस इसलिए जरूरी है ताकि किसी अनहोनी में परिवार के सपने न टूटें.

नोट – कल नवरात्रि का पांचवां दिन है और देवी स्कंदमाता की पूजा अर्चना होती है. कल हम मां स्कंदमाता की कथा से संबंधित फाइनेंशियल लेसन शेयर करेंगे.

Tags: Business news, Finance, Health Insurance, Life Insurance, Navratri, Navratri festival, Personal finance

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