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नवरात्रि वेल्थ स्पेशल: मां स्कंदमाता देती हैं अच्छे पेरेंट्स बनने की प्रेरणा, मिस न करें ये निवेश टिप्स

देवी स्कंदमाता भगवान शिव की पत्नी पार्वती का ही एक स्वरूप हैं.

देवी स्कंदमाता भगवान शिव की पत्नी पार्वती का ही एक स्वरूप हैं.

आदिशक्ति के मां बनने के स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है. इसलिए हम आज बच्चे के पैदा होने पर नए बने पेरेंट्स के लिए फाइने ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

मां स्कंदमाता ने अपने पुत्र की ऐसी परवरिश की कि उन्होंने असुरों को भी हराया.
यदि आप अभी पेरेंट बने हैं या बनने वाले हैं तो फाइनेंशियल प्लानिंग जरूरी है.
मासिक बजट से लेकर आपको हेल्थ कवर तक के बारे में फिर से सोचना होगा.

नई दिल्ली. नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना का विधान है. देवी स्कंदमाता भगवान शिव की पत्नी पार्वती का ही एक स्वरूप हैं. जब वे भगवान स्कंद को जन्म देती हैं और उन्हें पालती हैं तो उन्हें स्कंदमाता कहा जाता है. इनके पुत्र स्कंद को लोग कार्तिकेय के रूप में अधिक जानते हैं. कथा है कि वे अपने पुत्र स्कंद की परवरिश बेहद खास तरीके से करती हैं. बाद में इन्हीं स्कंद (कार्तिकेय) ने देवों की नाक में दम करने वाले असुरों के साथ युद्ध करके उन्हें पराजित किया था. तो समझा जा सकता है कि मां स्कंदमाता ने कार्तिकेय की परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी होगी.

न्यूज़18 की “नवरात्रि वेल्थ स्पेशल” सीरीज़ में आज हम मां स्कंदमाता के माध्यम से निवेश के बारे में अहम जानकारियां शेयर कर रहे हैं. यह इस सीरीज का पांचवां भाग है. इससे पहले 4 दिनों में चार भाग प्रकाशित हो चुके हैं. ये चारों सबक काफी महत्वपूर्ण हैं. यदि आपने अब तक पिछले 4 भाग नहीं पढ़े हैं तो उन्हें आप पढ़ सकते हैं. लिंक नीचे दिए गए हैं-

चौथा भाग – मां कूष्मांडा की मुस्कुराहट में छिपा फाइनेंशियल प्लानिंग का राज

तीसरा भाग – क्यों जरूरी है निवेश में डायवर्सिफिकेशन

दूसरा भाग – गिरते बाजार में याद रखें मां ब्रह्माचारिणी का ये मंत्र

पहला भाग – निवेश की शुरुआत मुश्किल, लेकिन चल पड़े तो बरसेगी कृपा

नए पेरेंट्स के लिए अहम है ये पाठ

जैसा कि पहले ही बता चुके हैं कि आदिशक्ति के मां बनने के स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है. तो आज हम बच्चे के पैदा होने पर नए बने पेरेंट्स के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में बताने जा रहे हैं. चूंकि घर में नए बच्चे के आने से बहुत कुछ बदल जाता है तो निवेश की रणनीति का बदलना भी जरूरी है. तो नीचे 5 अहम पॉइन्ट्स में हम आपको बता रहे हैं कि यदि आप नए-नए पेरेंट्स बने हैं तो आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए-

1. नया मासिक बजट प्लान करें

परिवार में एक नया सदस्य आने से आपके मासिक खर्च बढ़ जाते हैं, और अगर यह बच्चा है, तो खर्च एक वयस्क व्यक्ति के भी अधिक होगा. भोजन, दवाएं, डायपर, कपड़े, चाइल्ड केयर प्रोडक्ट्स, बाल रोग विशेषज्ञ के पास बार-बार जाना समते ऐसे कई खर्च हैं, जिन्हें आपको अपने मासिक खर्च की लिस्ट में शामिल करना होगा.

आप, अपने निवेश और बचत में कटौती करके अपना बजट बढ़ा सकते हैं, लेकिन यह अच्छा तरीका नहीं है. अपने निवेश और बचत में कटौती करना आपके वित्तीय भविष्य को खतरे में डाल सकता है. इसके बजाय, आपको उस बजट को देखना चाहिए, जिसे आप पहले से फॉलो कर रहे हैं और इसी में बदलाव करें. बच्चे के लिए अतिरिक्त खर्चों को शामिल करने के लिए, आपको अपने कुछ व्यक्तिगत खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है.

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इसे उदाहरण के यूं समझिए- बच्चे के जन्म से पहले यदि आप सप्ताह में 2 बार बाहर खाना खाते थे या खाने का ऑर्डर करते थे, तो अब आप इसे सप्ताह में 1 बार या 2 हफ्तों में एक बार कर सकते हैं. हर हफ्ते मूवी के लिए बाहर जाने के बजाय, आप ओटीटी प्लेटफॉर्म को सब्सक्राइब कर लें. इससे जो पैसा बचेगा, उससे बच्चे पर होने वाले खर्च को पूरा किया जा सकेगा.

2. अपने इमरजेंसी फंड को बढ़ाएं

इमरजेंसी फंड वह होता है, जिस आप किसी इमरजेंसी स्थिति के लिए बचाकर रखते हैं. कहा जाता है कि 6 महीने से लेकर 1 साल तक खर्च चलाने योग्य इमरजेंसी फंड आपको जरूर रखना चाहिए.

अब, जब एक बच्चा घर आएगा तो आपके मासिक खर्चे बढ़ जाएंगे. तो, आपको अपने आपातकालीन फंड को भी बढ़ाना होगा. उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि बच्चे के जन्म से पहले, आपका मासिक खर्च 30,000 रुपये प्रति माह था, और उसी के आधार पर आपने 3.6 लाख रुपये का आपात फंड रखा हुआ था. बच्चे के जन्म के बाद, आपका मासिक खर्च बढ़कर 40,000 रुपये हो जाता है, और फिर आपका इमरजेंसी फंड भी 4.8 लाख रुपये होना चाहिए. साथ ही, कभी-कभी वर्किंग मदर्स अपने बच्चे की देखभाल के लिए 1 या 2 साल के लिए आराम करना पसंद करती हैं. ऐसे में इमरजेंसी फंड का साइज बड़ा होना चाहिए.

नंबर 3. नए Goals के लिए निवेश करना शुरू करें

नए लक्ष्यों (गोल्स) से यहां मतबल बच्चे के बढ़ने के साथ आने वाले खर्च की तैयारी करने से है. बच्चा पैदा होने के 3 साल बाद उसे प्ले-स्कूल भेजने की जरूरत होती है. प्ले-स्कूल का भी अच्छा-खासा खर्च होता है. उसके बाद वह सामान्य स्कूल में जाएगा. तो ऐसे में आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि जब वह स्कूल जाने के लिए तैयार हो तो आपके पास उसके लिए पैसा हो.

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यदि आपके पास पैसा है तो आपको उसे फिक्स्ड डिपॉजिट में रखना चाहिए. FD इसलिए, क्योंकि इस पर बाजार की मंदी या तेजी का असर नहीं रहता और आपका फंड लगातार बढ़ता रहता है. आपको कैलकुलेट करना होगा कि उसके स्कूल जाते समय कितने पैसे की जरूरत होगी. जाहिर है इस लक्ष्य को निर्धारित करने के लिए आपको किसी अच्छे फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लेनी चाहिए.

नंबर 4: अपना टर्म लाइफ कवर बढ़ाएं

टर्म लाइफ इंश्योरेंस आपके परिवार की वित्तीय जरूरतों का ख्याल रखने के लिए होता है. यह तब काम आता है, जब किसी अप्रिय घटना में परिवार में कमाने वाला मुखिया न रहे. इसलिए यदि आपने बच्चे के जन्म से पहले कवर खरीदा है, तो आपको अपने न्यूनतम कवर निर्धारित करने के लिए अपने वर्तमान खर्चों और देनदारियों पर ध्यान देना चाहिए.

अब जब आपका बच्चा है, तो आपको अपने भविष्य के वित्तीय लक्ष्य में अपने बच्चे की शिक्षा और शादी आदि को शामिल करना होगा. तो आपके लिए आवश्यक टर्म लाइफ इंश्योरेंस कवरेज राशि भी बढ़ जाएगी. इसलिए, आपको जिस कवर की जरूरत है और जो आपके पास है, उसके बीच के अंतर की गणना करें, फिर उस गैप को दूसरे टर्म प्लान से भरें. इसके लिए भी आप एडवाइज़ ले लें तो बेहतर होगा.

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नंबर 5. अपने बच्चे को हेल्थ पॉलिसी में कवर करें

हमने कल ही आपको हेल्थ पॉलिसी की जरूरत के बारे में विस्तार से बताया था. यदि आपने नहीं पढ़ा है तो यहां पढ़ें – क्यों जरूरी है हेल्थ कवर? जब आपके घर में बच्चा पैदा होता है तो उसके 90 दिन का होने के बाद उसे हेल्थ पॉलिसी में जुड़वा सकते हैं. चूंकि, आप किसी बच्चे के लिए अलग से हेल्थ कवर नहीं खरीद सकते, इसलिए आपको अपनी हेल्थ कवर पॉलिसी में ही उसका नाम शामिल कराना होगा.

हालांकि, अगर आपके पास हेल्थ कवर नहीं है या आप और आपका पार्टनर (पति या पत्नी) अलग-अलग पॉलिसीज़ के तहत कवर हैं, तो आपको एक फ्लोटर फैमिली प्लान पर जरूर विचार करना चाहिए. इसमें अपने बच्चे को भी शामिल करें.

उपरोक्त सभी पॉइन्ट्स एक जिम्मेदार पेरेंट बनने के लिए बेहद जरूरी हैं. इनमें से किसी भी बिंदु को मिस करना मतलब खतरे से खेलने की तरह है. यदि आप अपने बच्चे का बेहतर भविष्य चाहते हैं तो आपको समय-समय पर किसी फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह लेते रहना चाहिए.

कल नवरात्रि का छठा दिन है. छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान होता है. कल आप मां कात्यायनी के माध्यम से निवेश का नया सबक जानेंगे.

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