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नवरात्रि वेल्थ स्पेशल: समृद्ध होना है तो "सही समय" पर करें निवेश! बरसेगी अपार दौलत

दो जरूरी बातें सीखनी चाहिए 1. स्टडी और प्लानिंग, 2. सही समय पर सही निर्णय.

दो जरूरी बातें सीखनी चाहिए 1. स्टडी और प्लानिंग, 2. सही समय पर सही निर्णय.

नवरात्रि वेल्थ स्पेशल में हम आज सातवें दिन में प्रवेश कर चुके हैं. आज हम आपके साथ मां कालरात्रि की कथा के आधार पर धन-सं ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

नवरात्रों के पावन पर्व का छढा दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना के लिए है.
सबसे पहले आपको संभावित समस्याओं के बारे में पूरा अध्ययन कर लेना चाहिए.
खुद को कमजोर महसूस करने वाला इंसान बहुत-सारे गलत निर्णय लेता है.

नई दिल्ली. नवरात्रि वेल्थ स्पेशल में समृद्धि की तरफ बढ़ने के विज्ञान के साथ हम आज सातवें दिन में प्रवेश कर चुके हैं. नवरात्रों के पावन पर्व का यह दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना के लिए है. आज हम आपके साथ मां कालरात्रि की कथा के आधार पर धन-संपदा को बढ़ाकर खुशहाल जीवन जीने के मंत्र शेयर कर रहे हैं.

इससे पहले के 6 दिनों पर निवेश के अलग-अलग गुर बताए जा चुके हैं. यदि आपने उन्हें नहीं पढ़ा है तो यकीन कीजिए आपने इस नवरात्रि बहुत कुछ मिस किया है. इन्वेस्टमेंट को लेकर ज्ञानवर्धन के लिए आपको पिछले 6 दिनों के आर्टिकल पढ़ लेने चाहिए. उन सभी आर्टिकल्स के लिंक हम इस लेख के अंत में दिए गए हैं.

मां कालरात्रि की कथा
एक पौराणिक कथा बताती है कि रक्तबीज नाम का एक खतरनाक राक्षस था. देवता तक उससे परेशान थे. कहते हैं कि उसके रक्त (खून) की बूंद धरती पर गिरते ही, उस बूंद से एक और राक्षस पैदा हो जाता था. देवताओं ने इस प्रॉब्लम का सॉल्यूशन पाने के लिए भगवान शिव का दरवाजा खटखटाया.

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भगवान शिव ने रक्तबीज के अंत के लिए मां पार्वती से अनुरोध किया, क्योंकि पार्वती आदिशक्ति दुर्गा का स्वरूप थीं. कथा के अनुसार, उसके बाद आदिशक्ति ने अपनी शक्ति से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया. मां कालरात्रि को उत्पन्न करने का एक विशेष कारण था. मां कालरात्रि की सहायता के बिना संसार से रक्तबीज का अंत संभव नहीं था. क्योंकि रक्तबीज ऐसा राक्षस था, जिसके खून की हर एक बूंद से नया राक्षस पैदा हो जाता. यह चक्र ऐसे ही चलता रहता तो लाखों की संख्या में रक्तबीज बन जाते. इसलिए जरूरी था कि रक्तबीज के वध के समय उसके रक्त की एक बूंद भी धरती पर न गिरे.

जब देवी ने रक्तबीज का वध किया, तो मां कालरात्रि ने उसके शरीर से गिरने वाली हर बूंद को अपने मुख में समा लिया. इस तरह कोई नया रक्तबीज पैदा नहीं हो पाया और जिससे आतंक से देवता परेशान थे, उसका भी अंत हो गया. यह वजह है कि नवरात्रि के 7वें दिन मां कालरात्रि की अपार महिमा का गुणगान होता है. एक अन्य कथा के अनुसार, मां पार्वती ने शुंभ और निशुंभ नामक 2 राक्षसों के अंत के लिए अपनी गोल्डन स्किन को उतराकर देवी कालरात्रि का रूप धारण किया था.

क्या सिखाती है मां कालरात्रि की कथा?
इस कथा से हमें मुख्य रूप से 2 बातें जरूरी सीखने को मिलती हैं. 1. स्टडी और प्लानिंग, 2. सही समय पर सही निर्णय. तो पहले हम बात करते हैं स्टडी और प्लानिंग की.

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रक्तबीज को मारने से पहले प्लानिंग की गई. यह प्लानिंग इस स्टडी के आधार पर थी कि यदि उसे सीधे-सीधे मारा गया तो लाखों रक्तबीज पैदा हो जाएंगे, और फिर उसे मारना बेहद मुश्किल हो जाएगा. इसी आधार पर देवी आदिशक्ति ने मां कालरात्रि को प्लान का अहम हिस्सा बनाया. मां कालरात्रि को ऐसी पावर दी कि रक्तबीज का रक्त मुख के समाने के बाद निष्क्रिय हो जाए. इसलिए जरूरी है कि निवेश से पहले आपको संभावित समस्याओं के बारे में पूरा अध्ययन कर लेना चाहिए. इसी अध्ययन के आधार पर आपको निवेश की योजना बनानी चाहिए.

दूसरी मुख्य बात है सही समय पर सही निर्णय. परंतु यह पॉइन्ट मूल रूप से “स्टडी और प्लानिंग” का दूसरा भाग है. यदि आपने स्टडी नहीं की और न ही आपके पास कोई प्लान है तो फिर आप मैदान-ए-जंग में सही निर्णय नहीं ले पाएंगे. यदि आपने स्टडी और प्लानिंग की है तो ही दूसरे पॉइन्ट पर अमल कर सकेंगे.

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निवेश में सही समय पर सही फैसले का मतलब?
खुद को कमजोर महसूस करने वाला इंसान बहुत-सारे गलत निर्णय लेता है. उसका हर फैसला उसके खिलाफ जाता है. उसके हर गलत फैसले से उसकी फीलिंग्स प्रभावित होती हैं और पैसा खोने के डर से वे अपने फाइनेंशियल गोल अचीव नहीं कर पाते. उन्हें डर रहता है कि कहीं उन्होंने गलत स्कीम में पैसा तो नहीं लगा दिया. यह स्थिति किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि दुनियाभर में करोड़ों लोगों की है. यदि आप भी ऐसा ही महसूस करते हैं तो नीचे दिए गए कुछ पॉइन्ट्स पर आपको जरूर गौर करना चाहिए –

बाजार किसी का इंतजार नहीं करता!
जी हां, ये बात सोलह आने सच है. बाजार वोलाटाइल होता है और इसमें उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. लेकिन यह भी है कि हर बार आपको नीचे से स्तर नहीं मिलते. यदि आपने एक मौका खो दिया तो संभवत: दोबारा वैसा ही मौका न मिले. लोग बाजार में निवेश के लिए अक्सर “सही समय” का इंतजार करते हैं. परंतु यह “सही समय” कभी नहीं आता. इसी सही समय के इंतजार में सुनहरी मौका हाथ से छूट जाता है.

सोचने के लिए “जरूरी समय” लीजिए
यहां जरूरी समय का मतलब है कुछ समय. यदि आपको लगता है कि यह निवेश का सही समय है तो उस पर विचार करें. लेकिन विचार करने के लिए बहुत अधिक समय न लें. जैसे इस कथा में हमने देखा कि परिस्थितियों को देखते हुए देवी पार्वती ने मां कालरात्रि को उत्पन्न करने का फैसला लिया. इसलिए सोचने के लिए लिया गया समय न तो बहुत अधिक हो और न ही बहुत कम. यदि आपके पास सोचने और विचार करने लायक नॉलेज नहीं है तो विशेषज्ञ की मदद लें. यदि आपको कुछ नॉलेज है भी, तो आपको निवेश एक्सपर्ट की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

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समय कैसा भी हो, बाजार ने रिटर्न दिया
शेयर बाजार अथवा स्टॉक/इक्विटी, बॉन्ड्स, फिक्स्ड डिपॉजिट्स (FDs), इंडेक्स फंड्स और म्यूचुअल फंड्स, रियल एस्टेट, और कमोडिटीज (कृषि, एनर्जी, मेटल) निवेश के कुछ प्रकार हैं. यदि आप लम्बी अवधि (10 साल से अधिक) में इनमें से किसी का भी रिटर्न देखेंगे तो पाएंगे कि सबसे मुनाफा ही दिया है. परंतु इनमें निवेश से पहले एक्सपर्ट्स की सेवाएं जरूर लेनी चाहिए, तभी ये अधिक फायदे का सौदा साबित होते हैं. तो कहा जा सकता है कि “सही समय पर सही फैसला” लिया गया हो तो अंत भला ही होता है. और यही है मां की कृपा से धन-संपदा और समृद्धि पाने का रास्ता.

पिछले 6 भाग
1. निवेश की शुरुआत मुश्किल, लेकिन चल पड़े तो बरसेगी कृपा
2. गिरते बाजार में याद रखें मां ब्रह्माचारिणी का ये मंत्र! छापेंगे पैसा
3. क्यों जरूरी है निवेश में Diversification, ताकि बना रहे बैलेंस
4. फाइनेंशियल प्लानिंग को समझ लिया तो कोई नहीं रोक पाएगा अमीर होने से
5. अच्छे पेरेंट्स बनना है तो मां स्कंदमाता से सीखें निवेश का Lesson
6. शेयर बाजार में हुए Loss को कैसे रिकवर करें? सीखें मां कात्यायनी की कथा से

Note – कल नवरात्रि का 8वां दिन है और इस दिन मां महागौरी की आराधना होती है. कल हम आपके लिए मां महागौरी की कथा के माध्यम से निवेश के कुछ मंत्र शेयर करेंगे.

Tags: Investment, Investment scheme, Investment tips, Mutual fund, Mutual funds, Navratri, Systematic Investment Plan

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