कहानियां जो संजीवनी का गौरव हैं

संजीवनी अभियान की कहानियां.

फेडरल बैंक लिमिटेड की पहल पर शुरू हुए जागरुकता अभियान Network18 Sanjeevani – A Shot Of Life ने हेल्थ और इम्यूनिटी के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन को सफलतापूर्वक संगठित किया है. 

  • Share this:
    कहते हैं, अंधेरी रात में ही तारे सबसे अधिक रोशनी बिखेरते हैं. कोविड-19 की लगातार आने वाली लहरों ने भले ही देश पर गहरा आर्थिक और भावनात्मक प्रभाव डाला हो. साथ ही इसने करुणा और लचीलेपन के हमारे विशाल भंडार को सामने लाने में भी मदद की है. यह भारत के सबसे बड़े जागरुकता अभियान, Network18 Sanjeevani – A Shot Of Life, जो फेडरल बैंक लिमिटेड की एक CSR पहल है, में भी समाविष्ट है. इसने हेल्थ और इम्यूनिटी के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन को सफलतापूर्वक संगठित किया है और आम भारतीय को सशक्त किया ताकि अपने समुदाय को स्वस्थ रखने की कोशिश में वह और ऊपर जा सकें.

    चुनौतियों के लिए बढ़ना
    नासिक के अशपाक शेख का उदाहरण लेते हैं. जब तक संजीवनी (Sanjeevani) अभियान महाराष्ट्र के सबसे अधिक प्रभावित जिलों में से एक इस गांव तक पहुंचा, तब तक अशपाक को ‘108 हेल्पलाइन असिस्टेंट’ का निकनेम मिल चुका था. यह हमेशा लोगों की मदद करने की उनकी इच्छा के कारण ही था कि वह दूसरी लहर के दौरान 300 मरीज़ों को बेड ढूंढ़ने में मदद कर चुके हैं. संजीवनी ऑन-ग्राउंड टीम की मदद से, अब वह अपने समुदाय को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठा रहे हैं, लोगों को वैक्सीन के बारे में शिक्षित कर रहे हैं और टीकाकरण के लिए उनका रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं.

    यकीनन, गलत जानकारी और अविश्वास के माहौल में, सही रास्ते पर चलना अपने आप में एक साहस भरा काम है. अमृतसर जिले के बल्लारवास गांव की जसकरन से पूछें, जिन्होंने सामाजिक कलंक और बहिष्कार के डर से बाहर आकर खुद का और अपनी मां का टीकाकरण करवाया. ज़मीन पर संजीवनी टीम की मौजूदगी ने स्वास्थ्य और इम्यूनिटी के प्रति उनके तर्कों को और मज़बूती दी- यहां तक कि उन्होंने अपने एक अविश्वासी पड़ोसी को भी टीका लगवाने का इंतज़ाम करवाया.

    मददगार शख्स जिसकी हमें ज़रूरत है
    ऐसे सशक्त निर्णय लेना देश के उन इलाकों में आम हैं जहां बेहतर सुविधाए हैं, लेकिन उन लोगों का क्या जिन्हें हमारे हेल्थकेयर सेटअप में भूला दिया जाता है या जहां हेल्थकेयर सुविधाएं ना के बराबर हैं? ग्रामीण दक्षिण कन्नड़ के मनोहर और उनके परिवार की कहानी उनके संघर्ष को बयां करती है, जिसका सामना उन्होंने खासतौर पर संकट के दौरान किया. अपने बुज़ुर्ग माता-पिता को टीका लगवाने की उनकी योजना राज्य में लगे लॉकडाउन और आसपास के इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण पूरी नहीं हो पाई. जब ऐसा लगा कि अब उनका टीकाकरण नहीं हो सकता, संजीवनी अभियान उनके बचाव में आया, परिवारों को वैक्सीन के बारे में जानकारी दी और वैक्सीन केंद्र तक पहुंचाने के लिए यात्रा में मदद की.

    इसी तरह, गुंटूर के कावुरु गांव की रामाडू को भी संजीवनी गाड़ी आने से पहले इस बारे में बहुत कम जानकारी थी कि कोविड​​-19 क्या है. वैन के साइड में प्रसारित होने वाले जानकारीपूर्ण वीडियो के ज़रिए उसे कोविड-19 उचित व्यवहार और टीकाकरण के महत्व के बारे में पता चला.

    इंदौर के सांवेर गांव की प्रतिभा भदौरिया की तरह जागरूक लोग कभी-कभी अपने आप स्वास्थ्य और कल्याण के एंबेस्डर बन जाते हैं. प्रतिभा मशहूर आशा एनजीओ से जुड़ी एक कार्यकर्ता हैं, जिसने कोविड-19 के प्रति जागरूकता फैलाने और टीकाकरण से जुड़े मिथक को दूर करने के लिए बहुत काम किया. संजीवनी अभियान ने अपने समुदाय की हिफाज़त के लिए उनकी कोशिशों को और तेज़ किया.

    इनमें से हर एक कहानी जीत का प्रतिनिधित्व करती है, जो सुनहरे भविष्य के लिए पावर ऑफ एक्शन यानी कार्रवाई की शक्ति के महत्व को उजागर करती है. आप सभी Network18 TV और डिजिटल चैनलों पर प्रसारित स्पेशल फीचर में संजीवनी की इन कहानियों को जीवंत होते हुए देख सकते हैं. ट्यून करना याद रखें और स्वास्थ्य व कल्याण के लिए भारत के संघर्ष में शामिल हो जाएं.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.