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    Consumer Protection Act 2019 लागू हो जाने के बाद फिल्मी हस्तियां और क्रिकेटर्स भी नहीं बख्शे जाएंगे

    काफी इंतजार के बाद देश में नया कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-2019 लागू होने जा रहा है.
    काफी इंतजार के बाद देश में नया कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-2019 लागू होने जा रहा है.

    निर्माता को भ्रामक प्रचार के लिए 10 लाख रुपए का जुर्माना अथवा दो साल की जेल या फिर दोनों हो सकती है. भ्रामक विज्ञापन का प्रचार करने वाले पर भी पहली बार 10 लाख रुपए का जुर्माना और एक साल का प्रतिबंध लग सकता है. अगर बार-बार प्रचार किया जाता है तो प्रचारक पर 50 लाख रुपए का जुर्माना और तीन साल तक का प्रतिबंध भी झेलना पड़ सकता है.

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    नई दिल्ली. पूरे देश में 20 जुलाई, 2020 से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 (Consumer Protection Act-2019) कानून लागू होने जा रहा है. मोदी सरकार (Modi Government) ने इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. काफी इंतजार के बाद उपभोक्ताओं को नया कानून मिलने जा रहा है. इन नए कानून में कई खास बातें हैं, जैसे अब उपभोक्ताओं के पास अधिकार होगा कि देश के किसी भी उपभोक्ता अदालत में वह मामला दर्ज करा सके. पहले के कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 में ऐसा प्रावधान नहीं था. नए कानून में एक और सबसे बड़ी बात यह है कि अब उपभोक्ताओं को भ्रामक प्रचार से भी मुक्ति मिलेगी. अगर कोई फिल्मी कलाकार या क्रिकेटर्स के द्वारा किसी प्रोडक्ट्स का प्रचार किया जाता है और उस प्रोडक्ट्स में खामियां निकल जाती हैं तो ऐसी स्थिति में उस सेलेब्रिटी पर भी जवाबदेही तय की जाएगी. ऐसे में क्रिकेट खिलाड़ियों और फिल्मी हस्तियों को अब किसी भी प्रोडक्ट्स का प्रचार करने से पहले उसकी विश्वसनीयता परखनी अनिवार्य हो जाएगा.

    भ्रामक प्रचार के जवाबदेही से अब सेलेब्रिटी भी बच नहीं पाएंगे
    नए कानून में मोटी-मोटी रकम लेकर भ्रामक प्रचार करने वाले सेलेब्रिटी पर भी जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान किया गया है. नए कानून में प्रावधान किया गया है कि अगर उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए भ्रामक विज्ञापन किए जाते हैं तो कंपनी के साथ-साथ प्रचार करने वाले सेलेब्रिटीज पर भी कार्रवाई की जाएगी. इसलिए अब बड़े-बड़े क्रिकेट स्टार हों या फिल्मी हस्तियां या कोई अन्य कलाकार या फिर कोई और सेलेब्रिटी अगर किसी प्रोडक्ट का विज्ञापन करते हैं तो सावधान हो जाएं. विज्ञापन का प्रचार करने से पहले सेलिब्रिटी का दायित्व बनता है कि वह विज्ञापन में किए गए दावे की जांच कर लें. नए कानून में उत्पाद से संबंधित कोई भी गलत जानकारी उस विज्ञापन को करने वाले सेलेब्रेटी को मुश्किल में डाल देगा.

    निर्माता को भ्रामक प्रचार के लिए 10 लाख रुपए का जुर्माना अथवा दो साल की जेल या फिर दोनों हो सकती है. भ्रामक विज्ञापन का प्रचार करने वाले पर भी पहली बार 10 लाख रुपए का जुर्माना और एक साल का प्रतिबंध लग सकता है. अगर बार-बार प्रचार किया जाता है तो प्रचारक पर 50 लाख रुपए का जुर्माना और तीन साल तक का प्रतिबंध भी झेलना पड़ सकता है.
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    नए कानून में मोटी-मोटी रकम लेकर भ्रामक प्रचार करने वाले सेलेब्रिटी पर भी जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान किया गया है.




    केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण भ्रामक प्रचार पर रखेगी नजर
    नए कानून के तहत उपभोक्ता अदालतों के साथ-साथ एक केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) बनाया गया है. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को ऐसा महसूस होता है कि किसी भ्रामक विज्ञापन को प्रकाशित करने में प्रकाशक भी भागीदार है या उसकी गलती पाई जाती है तो उस पर भी 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. उपभोक्ता भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत लिखित में या ऑनलाइन कर सकते हैं. इसकी शिकायत कलेक्टर, जिला क्षेत्रीय आयुक्त कार्यालय अथवा केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण में की जा सकती है.

    क्या कहते हैं निर्माता
    मिडिटास इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश कुमार चौधरी न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'मोदी सरकार का यह एक अतिसराहनीय कदम है. नए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 उपभोक्ताओं के हित में लिया गया एक बहुत बड़ा कदम है. उपभोक्ताओं को अब कई तरह की समस्याों से निजात मिल जाएगी. खासकर प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता को लेकर उनकी जो शिकायत रहती थी वह नए कानून के आ जाने के बाद दूर हो जाएगी. अब कंपनियां उपभोक्ताओं को बेवकूफ नहीं बना सकती. प्रोडक्ट्स को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाना अब उनके लिए जेल का दरबाजा भी खोल सकता है. विदेशों में पहले से ही इस तरह के सख्त नियम हैं. खासकर फूड प्रोडक्ट्स को लेकर यह अधिनियम काफी प्रभावी साबित होगा. भारत जैसे देश में मिलावटी सामान और खराब प्रोडक्ट्स पर अब कंपनियों पर जुर्माना और सजा का प्रावधान से स्थितियां काफी बदल जाएंगी.'

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    ए कानून के तहत उपभोक्ता अदालतों के साथ-साथ एक केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) बनाया गया है.


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    बता दें कि अब तक 20 लाख रुपए तक के मामलों की सुनवाई जिला उपभोक्ता फोरम में किया जाता था, लेकिन नए कानून में इसे बढ़ाकर एक करोड़ रुपए तक कर दिया गया है. 20 लाख रुपये से ज्यादा की राशि का विवाद की सुनवाई के लिए राज्य फोरम जाना पड़ता था. वहीं अब एक करोड़ रुपए से ज्यादा और 10 करोड़ रुपए तक के मामले राज्य उपभोक्ता फोरम में सुने जाएंगे. 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का विवाद अब राष्ट्रीय फोरम के अंतगर्त आएंगे.
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