New Education Policy 2020: GDP का 6% शिक्षा पर किया जाएगा खर्च, फीस की अधिकतम सीमा होगी तय

New Education Policy 2020: GDP का 6% शिक्षा पर किया जाएगा खर्च, फीस की अधिकतम सीमा होगी तय
GDP का 6% शिक्षा पर किया जाएगा खर्च

New Education Policy 2020 में अब शिक्षा में कुल जीडीपी (GDP) का 6 फीसदी खर्च किया जाएगा. अभी तक राज्य और केंद्र को मिलाकर करीब 4 फीसदी होता है. फीस की अधिकतम सीमा तय होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 29, 2020, 10:21 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई शिक्षा नीति को (New Education Policy 2020) ने मंजूरी दे दी है. नई शिक्षा नीति में शिक्षा का अधिकार (Right to Eductaion) कानून के दायरे को व्यापक बनाया गया है. अब 3 साल से 18 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के अंदर लाया जाएगा. अब शिक्षा में कुल जीडीपी (GDP) का 6 फीसदी खर्च किया जाएगा. अभी तक राज्य और केंद्र को मिलाकर करीब 4 फीसदी होता है. फीस की अधिकतम सीमा तय होगी. नई नीति में शिक्षण संस्थाओं को ग्रेडेड ऑटोनॉमी दिए जाने का प्रावधान है. जितनी अच्छी ग्रेड, उतनी Autonomy दी जाएगी. उच्च शिक्षा के लिए सिर्फ एक ही रेगुलेटर होगा। डीम्ड और सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए एक मानदंड होगा.

नई शिक्षा नीति में स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई बड़े बदलाव किए गए हैं . इसमें (लॉ और मेडिकल शिक्षा को छोड़कर) उच्च शिक्षा के लिये सिंगल रेगुलेटर (एकल नियामक) रहेगा . इसके अलावा उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फीसदी सकल नामांकन दर पहुंचने का लक्ष्य है.

रुचि के हिसाब से हो सकेगा विषय का चुनाव
नई शिक्षा नीति ने रुचि के हिसाब से विषय का चुनाव किया जा सकेगा. अब PCB या PCM का कॉम्बिनेशन जरूरी नहीं होगा. शिक्षा में तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा. पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप भी होगा. GDP का 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च किया जाएगा. फीस की अधिकतम सीमा तय होगी. शिक्षा के लिए वर्चुअल लैब विकसित की जाएगी. देश की प्रमुख 8 भाषाओं में ई-कोर्स होंगे.शिक्षा पर खर्च करीब दोगुना करने का लक्ष्य है. शिक्षा क्षेत्र में रेगुलेशन कम करने पर जोर दिया गया है. अलग-अलग रेगुलेटर की जगह सिर्फ एक रेगुलेटर होगा. शिक्षा में तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर होगा. 5वीं तक अंग्रेज़ी की पढ़ाई नहीं होगी. 5वीं तक मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई होगी. 8वीं तक अंग्रेजी की पढ़ाई नहीं करने की छूट होगी.
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मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम
नई नीति में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट (बहु स्तरीय प्रवेश एवं निकासी) व्यवस्था लागू किया गया है . आज की व्यवस्था में अगर चार साल इंजीनियरंग पढ़ने या 6 सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारणवश आगे नहीं पढ़ पाते हैं तो कोई उपाय नहीं होता, लेकिन मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम में 1 साल के बाद सर्टिफिकेट, 2 साल के बाद डिप्लोमा और 3-4 साल के बाद डिग्री मिल जाएगी.
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