…तो इसलिए हरियाणा को छोड़कर नोएडा आ जाएंगी बड़ी-बड़ी कंपनियां, यूपी कर रहा तैयारी

नोएडा में बनेगा इंटरनेशनल लेवल का हैबिटेट सेंटर

नोएडा में बनेगा इंटरनेशनल लेवल का हैबिटेट सेंटर

हरियाणा की बड़ी इंडस्ट्रियों ने यूपी (UP) के नोएडा और ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) की तरफ देखना शुरु कर दिया है. यूपी सरकार भी इस मौके को भुनाने की कोशिश में है. इसके लिए लेबर लॉ से लेकर जमीन आवंटन तक में तमाम तरह की रियायते दी जा रही हैं.

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  • Last Updated: March 11, 2021, 8:25 AM IST
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नोएडा. हाल ही में हरियाणा (Haryana) सरकार नया इंप्लॉयमेंट बिल लेकर आई है. इस बिल के आने से हरियाणा की बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री में खलबली मच गई है. चर्चा तो यह भी है कि अब हरियाणा की बड़ी इंडस्ट्रियों ने यूपी (UP) के नोएडा और ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) की तरफ देखना शुरु कर दिया है. यूपी सरकार भी इस मौके को भुनाने की कोशिश में है. इसके लिए लेबर लॉ से लेकर जमीन आवंटन तक में तमाम तरह की रियायते दी जा रही हैं. लेकिन जानकारों की मानें तो कारोबारियों को वो चार परियोजनाएं सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही हैं जो किसी भी कारोबार के लिए सबसे अहम होती हैं.

यह परियोजनाएं नोएडा-ग्रेटर नोएडा लाएंगी हरियाणा की इंडस्ट्री

इंडस्ट्रियल एक्सपर्ट केसी जैन बताते हैं कि कारोबार छोटा हो या बड़ा उसके लिए रेल, हवाई और सड़क ट्रांसपोर्ट सबसे अहम होता है. अब अगर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस इंडस्ट्रीय डवलपमेंट अथॉरिटी की योजनाओं को देखें तो जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काम जोर-शोर से चल रहा है. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे को जेवर एयरपोर्ट से जोड़ने का काम चालू है.

दिल्ली-मुंबई के फासले को चंद घंटों के सफर में बदलने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को भी जेवर एयरपोर्ट से जोड़ा जा रहा है. ग्रेटर नोएडा से जेवर एयरपोर्ट तक मेट्रो लाइन शुरु हो रही है. इसके अलावा पीएम नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट दिल्ली से वाराणसी के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन का एक स्टेशन जेवर एयरपोर्ट के पास भी बनेगा. यह प्लान डीपीआर में शामिल है. आगरा-अलीगढ़ को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेस-वे पहले से बना हुआ है. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे भी चालू है. नोएडा में इंटरनेशनल लेवल का हैबिटेट सेंटर और हेलीपोर्ट बनाने का काम भी चालू हो चुका है.
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इसलिए हरियाणा छोड़ने को मजबूर होंगी इंडस्ट्री

हरियाणा सरकार जो नया इंप्लॉयमेंट बिल लेकर आई है उसके मुताबिक सभी छोटी-बड़ी इंडस्ट्री में 50 हज़ार रुपये से कम वेतन वाले स्टाफ की कुल संख्या का 75 फीसद हरियाणा को देना होगा. हरियाणा के युवाओं को भर्ती करना होगा. इंडस्ट्रियल एक्सपर्ट केसी जैन का कहना है कि इस तरह का बिल किसी भी राज्य में व्यवाहरिक नहीं है. यह मुमकिन ही नहीं है कि किसी एक ही राज्य में आपको ट्रेंड लेबर या स्टाफ मिल जाए. हरियाणा के मामले में तो पटियाला स्थित पंजाबी यूनिवर्सिटी की 2018 की एक रिपोर्ट बताती है कि हरियाणा की इंडस्ट्री में 59 फीसदी लेबर प्रवासी मजदूर हैं मतलब हरियाणा से बाहर के हैं.





गुरुग्राम भी फटाफट इसलिए कर पाया था तरक्की

केसी जैन का कहना है कि बिजनेस के मामले में आज अगर इंटरनेशनल लेवल पर हरियाणा का नाम लिया जाता है तो ऐसा नहीं है कि उसमे किसी और का योगदान नहीं है. गुरुग्राम से हाईटेक शहर का आईजीआई एयरपोर्ट से नजदीक होना, देश की राजधानी से सटे होना भी इसका बड़ा कारण है. इसी सब के चलते ही मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक, गूगल, नेस्ले, एचयूएल, कोका-कोला, पेप्सी, बीएमडब्ल्यू, एगिलेंट टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी और मल्टीनेशनल कंपनियों ने इस शहर में अपना कदम रखा था.
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