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Indian Railway इस रूट पर एक्सप्रेस ट्रेन की स्पीड से दौड़ा रहा मालगाड़ियां

अभ्यर्थियों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा.

अभ्यर्थियों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा.

भारतीय रेलवे (Indian Railways) सामान्य तौर पर 700 मीटर लंबी मालगाड़ियों (Goods Trains) का संचालन करती है. वहीं, आधुनिक तकनीक और वैश्विक सुविधाओं से लेस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के न्यू खुर्जा और न्यू भाउपुर सेक्शन पर चलने वाली मालगाड़ियों की लंबाई 1,500 मीटर तक है. इससे ना सिर्फ तेजी से सामान गंतव्य तक पहुंचाया जा रहा है, बल्कि किफायती दर से भी ट्रांसपोर्टेशन हो रहा है.

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नई दिल्‍ली. इंडियन रेलवे (Indian Railways) पटरियों पर माल रेलगाड़ियों (Goods Trains) का दबाव कम करने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) परियोजना पर काम कर रही है. इसके तहत सरकार ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 29 दिसंबर को ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के 351 किमी लंबे न्यू खुर्जा और न्यू भाउपुर सेक्शन का उद्घाटन किया था. मकसद साफ था कि सामान को ज्‍यादा तेजी से गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके. इस सेक्शन पर मालगाड़ियां 90 किमी प्रति घंटा से ज्‍यादा रफ्तार के साथ दौड़ रही हैं.

6 दिन में किया गया 50 से अधिक मालगाड़ियों का परिचालन
रेलवे सामान्य तौर पर 700 मीटर लंबी मालगाड़ियों का संचालन करती है. हालांकि, आधुनिक तकनीक और वैश्विक सुविधाओं से लेस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर चलने वाली मालगाड़ियों की लंबाई 1,500 मीटर यानी डेढ़ किमी तक की है. इससे ना सिर्फ तेजी से सामान गंतव्य तक पहुंचाया जा रहा है, बल्कि किफायती दर से भी ट्रांसपोर्टेशन हो रहा है. इस सेक्शन पर अब तक 53 फ्रेट ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं. इन 53 ट्रेनों में न्यू खुर्जा और न्यू भाउपुर के बीच 32 ट्रेनें चलाई गईं. इन ट्रेनों की टॉप स्पीड 93.70 किमी प्रति घंटा रही. वहीं, न्यू भाउपुर से न्यू खुर्जा के बीच 21 मालगाड़ियां दौड़ाई गईं. इनकी टॉप स्पीड 85.98 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई.

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ईस्‍टर्न डीएफसी पर इन सामान का किया गया ट्रांसपोर्टेशन
29 दिसंबर से शुरू हुए इस नए रेलवे सेक्शन पर कोयला, जूट, पेट्रोलियम, कंटेनर, लोहा व इस्पात और अन्य दूसरे मिनरल का ट्रांसपोर्टेशन बड़े पैमाने पर किया गया. इन सामानों को नॉर्थ सेंट्रल रीजन और पंजाब व हरियाणा के लिए ट्रांसपोर्ट किया गया. इसके अलावा पंजाब से चावल, गेहूं और खाद्यान्न की भी ढुलाई की गई. यहीं नहीं फर्टिलाइजर, स्टील, कोयला लदान के लिए खाली वेगन भी पूर्वी भारत के लिए भेजे गए. प्रधानमंत्री मोदी ने 29 दिसंबर को ही 1.5 किमी लंबी मालगाड़ी को न्यू खुर्जा से न्यू भाउपुर के लिए हरी झंडी दिखाई थी. इसमें 9,400 टन खाद्यान्न का लदान किया गया था. इसे पंजाब में लुधियाना के फरीदकोट और मुल्लानपुर से लोड किया गया था. वहीं, न्यू भाउपुर से न्यू खुर्जा आने वाली 1.5 किमी लंबी मालगाड़ी में रांची, झारखंड और मध्य प्रदेश के सिंगरौली से पावर कोल लादा गया था. अनलोड़िग के बाद इन ट्रेनों ने 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ी थी.

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जून 2022 तक पूरा किया जाना है डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
डीएफसीसीआईएल (DFCCIL) द्वारा निर्माण किए जा रहे ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का पूरा काम जून 2022 तक खत्‍म होना है. इसमें से ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर 1,856 रूट किमी और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर 1,504 रूट किमी होगा. ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पंजाब के लुधियाना के नजदीक साहनेवाल से पश्चिम बंगाल के दानकुनी तक होगा. यह कॉरिडोर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से होकर गुजरेगा. वहीं, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के दादरी से मुंबई में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक होगा. यह कॉरिडोर हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से होकर गुजरेगा. उम्मीद की जा रही है कि परियोजना के पूरे होने से उद्योगों, व्यापारियों, कारोबारियों, किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा होगा. वहीं, आम लोगों को सस्ती दरों पर सामान मिल सकेगा.

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