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ये हैं दुनिया के दौलतमंद शहर, यहां रहते हैं विश्व के सबसे ज्यादा रईस..

पीटीआई
Updated: November 22, 2019, 3:41 PM IST
ये हैं दुनिया के दौलतमंद शहर, यहां रहते हैं विश्व के सबसे ज्यादा रईस..
आर्थिक एवं सामाजिक समावेशिता रैंकिंग

टॉप 113 देशों में भारत के बेंगलुरु (Bangalore), दिल्ली (Delhi) और मुंबई (Mumbai) शामिल हुए. आर्थिक एवं सामाजिक समावेशिता (new global prosperity index) के मामले में बेंगलुरु को 83वां स्थान हासिल हुआ है.

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नई दिल्ली. टॉप 113 देशों में भारत के बेंगलुरु (Bangalore), दिल्ली (Delhi) और मुंबई (Mumbai) शामिल हुए. आर्थिक एवं सामाजिक समावेशिता (New Global Prosperity Index) के मामले में बेंगलुरु को 83वां स्थान हासिल हुआ है. इस लिस्ट में दिल्ली और मुंबई का नाम भी शामिल है, जो 101वें और 107वें स्थान पर हैं. उत्तरी स्पेन के बिल्बाओ में जारी ‘प्रॉस्पेरिटी एंड इन्क्लूजन सिटी सील एंड अवार्ड्स’ (पीआईसीएसए) इंडेक्स में स्विट्जरलैंड का ज्यूरिख टॉप पर रहा है. यह इंडेक्स किसी शहर का आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि इस विकास की गुणवत्ता और जनसंख्या के बीच इसके डिस्ट्रीब्यूशन को भी दर्शाता है.

दुनिया के दौलतमंद शहरों की लिस्ट -इस लिस्ट में ज्यूरिख पहले, आस्ट्रिया की राजधानी विएना दूसरे और डेनमार्क का कोपेनहोगन तीसरे स्थान पर रहा है. लक्समबर्ग और हेलसिंकी चौथे एवं पांचवें स्थान पर रहे. लिस्ट में टॉप 20 में ज्यादातर यूरोपीय शहर हैं. ताइपे एकमात्र ऐसा एशियाई शहर है जो टॉप 20 में जगह बनाने में कामयाब रहा. ताइपे छठे स्थान पर रहा. उत्तरी अमेरिका से ओटावा 8वें, वाशिंगटन 11वें, सिएटल 14वें और बॉस्टन 16वें स्थान पर है.

पहली बार आया ये Index-यह सूचकांक पहली बार जारी किया गया है. इसमें मेजबान शहर बिल्बाओ को 20वां स्थान मिला. लिस्ट में टॉप 20 देशों को ‘प्रॉस्पेरिटी एंड इन्क्लूजन सिटी सील एंड अवार्ड्स’ मिला है.

बिस्के की क्षेत्रीय परिषद में सामरिक कार्यक्रम के निदेशक असियर एलिया कास्टानोस ने पहली बार सूचकांक जारी किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि पहला गैर वाणिज्यिक रैंकिंग इंडेक्स पीआईसीएसके इकोनॉमिक प्रोडक्टिविटी यानी आर्थिक उत्पादकता के नए उपाय बताता है. यह जीडीपी से परे की बात करता है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि अर्थव्यवस्था में लोगों की स्थिति क्या है.

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उन्होंने कहा कि देशों की सरकारें और निजी क्षेत्र इस बात को समझ रहे हैं कि सफलता का नए तरीकों से आकलन किया जाना चाहिए. समृद्धि का पता लगाते समय नौकरियों, दक्षता और आय के साथ स्वास्थ्य, आवासीय सामर्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.

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First published: November 22, 2019, 3:39 PM IST
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