करोड़ों कारोबारियों के लिए आसान हो जाएगा GST रिटर्न फाइल करना, लॉन्च होने जा रहा नया इंटरफेस

करोड़ों कारोबारियों के लिए आसान हो जाएगा GST रिटर्न फाइल करना, लॉन्च होने जा रहा नया इंटरफेस
जीएसटी रिटर्न

जीएसटी नेटवर्क (GST Return) के CEO प्रकाश कुमार ने कहा कि 22 अक्टूबर से जीएसटी रिटर्न फाइलिंग इंटरफेस (GST Return Filing Interface) का नया वर्जन लॉन्च किया जाएगा. इससे रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया पहले से और आसान हो जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2019, 8:03 PM IST
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नई दिल्ली. जीएसटी ​नेटवर्क द्वारा (GST Network) ​जीएसटी रिटर्न फइ​लिंग (GST Return Filing) का नया इंटरफेस 22 अक्टूबर को रिलीज किया जाएगा. इसके बाद जीएसटी रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी. जीएसटी नेटवर्क के CEO प्रकश कुमार ने कहा, 'जीएसटी रिटर्न फाइलिंग इंटरफेस के लिए वर्जन 2 में अधिकतर सलाहों को ध्यान में रखा गया था जोकि अभी भी चल रहा है. इसी माह की 22 तारीख को इसका तीसरा वर्जन लॉन्च किया जाएगा.' जीएसटी नेटवर्क केंद्र, राज्य सरकारों, टैक्सपयेर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स के लिए आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर और सर्विस मुहैया कराता है.

टैक्स रिटर्न फॉर्म्स की संख्या घटी
कुमार ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के बाद टैक्स रिटर्न फाइल करना पहले से आसान हो गया है. जीएसटी लागू होने से पहले 17 केंद्र और राज्यों के कानून के तहत 495 फॉर्म्स होते थे. अब यह घटकर केवल 12 हो गए हैं. उन्होंने कहा कि इनडायरेक्ट टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से भी डेटा  साझा करता है.

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कुल 1.23 करोड़ रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स


इससे टैक्स चोरी पर लगाम लगाने में मदद मिली है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट (Income Tax Department) टर्नओवर के रेंज के बारे में पता लगाता है. टैक्सपेयर्स (Taxpayers) का पूरा डेटा नहीं साझा किया जाता है. उन्होंने कहा मौजूदा समय में 1.23 करोड़ रजिस्टर्ड जीएसटी टैक्सपेयर्स हैं.


जीएसटी लागू होने के बाद कम हुआ लॉजिस्टिक्स खर्च
जीएसटी काउंसिल (GST Council) के स्पेशल सेक्रेटरी राजीव रंजन ने कहा कि GST लागू होने के बाद​ कई बिजनेस को लॉजिस्टिक्स खर्च (Logistics Cost) कम करने में मदद मिली है. साथ ही जीएसटी दरों में कई बार कटौती के बाद वस्तुओं की कीमतें कम हुई और इससे महंगाई पर भी लगाम लगाने में मदद मिली है. राजीव रंजन ने कहा कि जीएसटी की वजह से औसतन टैक्स कम हुआ है और वस्तुओं की कीमतों पर भी इसका बेहतर असर पड़ा है.

जीएसटी से पहले भारत में किसी वस्तु की कीमत में लॉजिस्टिक्स खर्च करीब 14 फीसदी होता था. अब यह घटकर केवल 10-12 फीसदी तक हो गया है. उन्होंने कहा कि जीएसटी से पहले कोई भी ट्रक एक दिन में कुल 225 किलोमीटर की दूरी कवर कर लेता था. जीएसटी लागू होने के बाद अब यह बढ़कर 300 से 325 किलोमीटर हो गया है.

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