Decision : निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की तो लगेगा 10 करोड़ रुपए का जुर्माना, ऐसी है एनएचएआई की जुर्माने की पॉलिसी

 परियोजना में शामिल कंसल्टेंसी फर्म पर भी 40 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा.

परियोजना में शामिल कंसल्टेंसी फर्म पर भी 40 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा.

एनएचएआई ने निर्माण में बड़ी खामियों से निपटने के लिए एक सख्त नीति तैयार की है. नई नीति के तहत एनएचएआई ऐसे ठेकेदारों को तीन साल तक किसी भी एनएचएआई परियोजना के लिए प्रतिबंधित करेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 3, 2021, 1:33 PM IST
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नई दिल्ली. सड़क के बनने के साथ उसका गड्‌ढों में तब्दील हो जाना. बिना किसी आपदा के ही फ्लाईओवर या ब्रिजों का ढह जाना. कंस्ट्रक्शन में दरारें आ जाना. ऐसी ही बड़ी गड़बड़ियाें को रोकने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, National Highways Authority of India (NHAI, एनएचएआई) ने सख्त नीति तैयार की है. इसके तहत चूक करने वालों पर 10 करोड़ रुपए तक जुर्माना लगाया जाएगा. यही नहीं, उस फर्म या व्यक्ति को तीन साल तक प्रतिबंधित किया जा सकता है.

एनएचएआई ने कहा है कि उसके इस कदम का मकसद राजमार्गों के विकास में उच्च गुणवत्ता वाले मानकों को बनाए रखना है. एनएचएआई ने एक बयान में कहा कि राजमार्गों के विकास में खामियों से निपटने के लिए उसने ठेकेदारों द्वारा पुलों या संरचनाओं के ढांचे आदि के निर्माण मानकों में कोई चूक करने पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए एक सख्त नीति जारी की है.

ऐसी है नीति

यदि किसी कंस्ट्रक्शन से मानव जीवन का नुकसान होता है तो 10 करोड़ रुपए तक का भारी जुर्माना और 3 साल तक फर्म / कर्मियों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. बड़ी चूक लेकिन जहां किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, वहां दोषी ठेकेदारों / फर्म को 1 साल तक की सजा के साथ 5 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही संबंधित कर्मियों पर 2 साल तक का प्रतिबंध लगाया जाएगा. हालांकि, मामूली खामियों के लिए, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ है, ठेकदार या कंपनी पर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही फर्म को एक लिखित चेतावनी के अलावा सुधार कार्य करने के लिए निर्माण को ठीक करने का खर्च वहन करना होगा.
कंसल्टेंसी फर्म पर भी होगी कार्रवाई

एनएचएआई के बयान में कहा गया है कि परियोजना में शामिल कंसल्टेंसी फर्म पर भी 40 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही कंसल्टेंसी फर्म को तीन साल तक की अवधि के लिए एनएचएआई प्रोजेक्ट्स से हटा दिया जाएगा. गड़बड़ी करने वाले ठेकेदार, कंपनी या कंसल्टेंसी फर्म यदि फिर भी सुधार नहीं करते हैं तो जुमार्न और दंड में 50 प्रतिशत का इजाफा किया जाएगा. इसके अलावा प्रोजेक्ट से संबंधित अधिकारियों पर भी एनएचएआई उपयुक्त कार्रवाई करेगा. ऐसे मामलों में एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया जाएगा. जांच की अवधि के दौरान, ठेकेदार / रियायतकर्ता और परामर्श फर्म के संबंधित कर्मियों को परियोजना / प्राधिकरण की किसी भी अन्य परियोजनाओं पर काम करने से निलंबित रखा जा सकता है.

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