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nhai to monetise 2 more roads for collect approx 4 thousand crore prdm

सरकार दो हाइवे का टोल निजी हाथों में देकर कमाएगी 4,000 करोड़! इसमें एक टोल यूपी का भी शामिल

मुद्रीकरण के तहत सरकार ने करीब 6 लाख करोड़ जुटाने की योजना बनाई है.

मुद्रीकरण के तहत सरकार ने करीब 6 लाख करोड़ जुटाने की योजना बनाई है.

केंद्र सरकार ने मुद्रीकरण योजना के तहत दो और टोल को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर ली है. इसके जरिये सरकार को करीब 4 हजार करोड़ रुपये जुटाने में मदद मिलेगी, जबकि बोली जीतने वाली कंपनियां अगले डेढ़ दशक तक वाहन चालकों से टोल की वूसली करेंगी.

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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार मुद्रीकरण (Monetisation) नीति के तहत दो और हाइवे के टोल को निजी कंपनियों के हाथ लीज पर देने की तैयारी में है. इसके जरिये सरकार को करीब 4,000 करोड़ रुपये की आमदनी होगी.

भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अपनी टोल ऑपरेट ट्रांसफर (TOT) योजना के तहत 9वीं और 10वीं नीलामी करने जा रहा है. इससे पहले NHAI की 6वीं और 8वीं नीलामी खरीदारों की बेहद खराब प्रतिक्रिया के कारण रद्द हो गई थी. मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि दो सड़कों के लिए प्राधिकरण अलग-अलग बोलियां मंगाएगा.

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यूपी और एमपी की सड़कें शामिल
इकोनॉमिक टाइम्‍स की खबर के अनुसार, NHAI जिन दो सड़कों पर टोल वसूली का काम निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहा है, उनमें एक यूपी और एक एमपी की सड़क शामिल है. यूपी में इलाहाबाद-वाराणसी के बीच NH-30 पर 73 किलोमीटर लंबी सड़क है, जबकि मध्‍य प्रदेश में ग्‍वालियर-शिवपुरी के बीच NH-03 पर 125 किलोमीटर लंबी सड़क को निजी हाथों में सौंपा जाएगा. बोली लगाने की अंतिम तिथि 28 अप्रैल है.

घरेलू और विदेशी सभी कंपनियां लगाएंगी बोली
इन दोनों सड़कों का टोल खरीदने के लिए घरेलू खिलाडि़यों में अडाणी रोड ट्रांसपोर्ट, आईआरबी इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, प्रकाश अस्‍फाल्टिंग एंड टोल हाईवे, डीपी जैन एंड सुरेखा रोड जैसी कंपनियां शामिल होंगी, जबकि सीडीपीक्‍यू, सीपप इन्‍वेस्‍टमेंट, क्‍यूब हाइवे और मैक्‍वायर एं होमग्रोन फंड जैसी विदेशी कंपनियां भी इसके लिए बोलियां लगा सकती हैं.

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15 साल तक टोल वसूलेंगी निजी कंपनियां
दोनों टोल के लिए बोली जीतने वाली कंपनियां अगले 15 साल तक इस पर टोल वसूलेंगी. मुद्रीकरण के जरिये सरकार को ToT9 के लिए 2,300 से लेकर 2,600 करोड़ रुपये तक मिलेंगे जबकि ToT10 के लिए 1,100-1,500 करोड़ रुपये मिल सकते हैं. सरकार को यह राशि एकमुश्‍त मिल जाएगी जबकि कंपनियां टोल के जरिये धीरे-धीरे इसकी भरपाई करेंगी.

Tags: Asset monetization, Highway toll, NHAI

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