आर्थिक नरमी पर नीति आयोग ने कहा, निवेश प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाने की जरूरत

आर्थिक नरमी पर नीति आयोग ने कहा, निवेश प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाने की जरूरत
नीति आयोग की पूर्व सीईओ सिंधुश्री खुल्लर को भी चार्जशीट में आरोपी बनाया है.

नीति आयोग (Niti Aayog) के उपाध्यक्ष राजीव कुमार (Rajiv Kumar) ने कहा कि सरकार को ऐसे कदम उठाने की जरूरत है जिससे निजी क्षेत्र (Private Sector) की कंपनियों की आशंकाओं को दूर किया जा सके और वे निवेश के लिए प्रोत्साहित हों.

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नीति आयोग (NITI Aayog) के उपाध्यक्ष राजीव कुमार (Rajiv Kumar) ने गुरुवार को कहा कि सरकार को ऐसे कदम उठाने की जरूरत है जिससे निजी क्षेत्र की कंपनियों की आशंकाओं को दूर किया जा सके और वे निवेश (Investment) के लिए प्रोत्साहित हों. आर्थिक नरमी को लेकर चिंता के बीच उन्होंने यह बात कही. उन्होंने वित्तीय क्षेत्र में बने अप्रत्याशित दबाव से निपटने के लिए लीक से हटकर कदम उठाने पर जोर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि निजी निवेश के तेजी से बढ़ने से भारत को मध्यम आय के दायरे से बाहर निकलने में मदद मिलेगी.

राजीव कुमार ने वित्तीय क्षेत्र में दबाव को अप्रत्याशित बताया. उन्होंने कहा कि किसी ने भी पिछले 70 साल में ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया जब पूरी वित्तीय प्रणाली में जोखिम है. कुमार ने एक कार्यक्रम में कहा, "कोई भी किसी पर भी भरोसा नहीं कर रहा है. निजी क्षेत्र (Private Sector) के भीतर कोई भी कर्ज देने को तैयार नहीं है, हर कोई नकदी लेकर बैठा है. आपको लीक से हटकर कुछ कदम उठाने की जरूरत है."

केंद्रीय बजट में उठाए गए थे कदम
इस बारे में विस्तार से बताते हुए कुमार ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र में दबाव से निपटने और आर्थिक वृद्धि को गति के लिए केंद्रीय बजट में कुछ कदमों की घोषणा पहले ही की जा चुकी है. वित्त वर्ष 2018-19 में वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रही जो 5 साल का न्यूनतम स्तर है.



ये बिना सोचे दिए गए कर्ज का नतीजा


वित्तीय क्षेत्र में दबाव से अर्थव्यवस्था में नरमी के बारे में बताते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि पूरी स्थिति 2009-14 के दौरान बिना सोचे-समझे दिये गये कर्ज का नतीजा है. इससे 2014 के बाद गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) बढ़ी हैं. उन्होंने कहा कि फंसे कर्ज में वृद्धि से बैंकों की नया कर्ज देने की क्षमता कम हुई है. इस कमी की भरपाई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने की. इनके कर्ज में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

एनबीएफसी कर्ज में इतनी वृद्धि का प्रबंधन नहीं कर सकती और इससे कुछ बड़ी इकाइयों में भुगतान  असफलता की स्थिति उत्पन्न हुई. अंतत: इससे अर्थव्यवस्था में नरमी आई.

नोटबंदी और जीएसटी ने बदला खेल
राजीव कुमार ने कहा, "नोटबंदी और माल एवं सेवा कर तथा ऋण शोधन अक्षमता और दिवाला संहिता के कारण खेल की पूरी प्रकृति बदल गई. पहले 35 प्रतिशत नकदी घूम रही थी, यह अब बहुत कम हो गई है. इन सब कारणों से एक जटिल स्थिति बन गई है. इसका कोई आसान उत्तर नहीं है."

सरकार और उसके विभागों द्वारा विभिन्न सेवाओं के लिए भुगतान में देरी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह भी सुस्ती की एक वजह हो सकती है. प्रशासन प्रक्रिया को तेज करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है.

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